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Category: ऋतुपर्ण दवे

Total 8 Posts

 फिर प्रमाणित समाचार-पत्रों की विश्वनीयता

हमेशा ठगा तो दर्शक ही जाता है. चाहे वह टेलीविजन का हो या फिर क्रिकेट का. निश्चित रूप से याद आया होगा कुछ साल पहले बेहद चर्चाओं में रहा एक

अर्थव्यवस्था बेपटरी हुई है पलटी नहीं

भारत की अर्थव्यवस्था इस सदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. इसको लेकर चिन्ता स्वाभाविक है. वैश्विक महामारी के बीच तमाम विकसित देशों का भी यही हाल है.

नया दौर! और कब तक बाढ़ का पुराना ठौर?

स्वतंत्रता के बाद देश में यदि कुछ तय है तो वह है कुछ खास प्रदेशों के निश्चित इलाकों में बाढ़ की विभीषका. यह बात अलग है कि किसी साल यह

जब कोरोना का आया उफान तब बेफिक्र हुआ इंसान!

कोरोना पर हर रोज चौंकाने वाले आंकड़े भले ही दुनिया भर की सरकारों के लिए चिन्ता का बड़ा कारण हों लेकिन यह भी सच है कि आज दुनिया में कहीं

फरमान! कोरोना बीच गुरू जी बाँटे घर-घर ज्ञान..

जब समूची दुनिया कोरोना के संक्रमण काल को झेल रही हो, उस दौर में नौनिहालों और देश के भावी भविष्य के शिक्षा की चिन्ता स्वाभाविक है, होनी भी चाहिए. लेकिन

दम तोड़ता पर्यावरण, संतुलन खोती प्रकृति..!

आज प्रकृति ऐसे बदले स्वरूप में देखने को मिल रही है जिसको किसी ने कभी सोचा नहीं होगा. अब तो स्थितियां इतनी बदतर हो गई हैं कि मौसम के छिन-पल

क्या ‘केजरीवाल फॉर्मूला’ बदलेगा राजनीति का चेहरा..?

क्या भारतीय राजनीति में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों ने वायदों को नकारने और हकीकत को स्वीकारने एक नई शुरुआत कर दी है? या भारतीय मतदाता ने अपनी परिपक्वता

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