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Category: ऋतुपर्ण दवे

Total 21 Posts

दल जीते पर देश कोरोना के दलदल में जा फँसा

बंगाल में चुनाव हो गए. चार अन्य राज्यों में भी हुए. उप्र सहित कुछ अन्य राज्यों में पंचायती चुनाव भी साल के शुरू से अब तक होते रहे. यह कहना

भारत का यश अब मंगल पर होगा वश

भारत दुनिया का इकलौता देश है जो अपने मंगल मिशन में पहली ही कोशिश में पूरी तरह से कामियाब भी रहने के साथ सबसे सस्ता अभियान पूरा करने वाला देश

कोरोना से डरना और लड़ना दोनों जरूरी

कोरोना घातक है…पता है, कोरोना जानलेवा है….पता है, कोरोना पास-पास रहने से फैलता है….यह भी पता है, कोरोना की कोई दवा नहीं जो फौरन फायदा पहुँचाए…. पता है, कोरोना से

धरती को  बचाने इस हाथ दे उस हाथ ले

दुनिया भर में प्रकृति और पर्यावरण को लेकर जितनी चिन्ता वैश्विक सगंठनों की बड़ी-बड़ी बैठकों में दिखती है, उतनी धरातल पर कभी उतरती दिखी नहीं. इस बात से इंकार नहीं

अब जरूरी हो कॉमन टास्क कहाँ है आपका मास्क?

कोरोना की नई लहर फिर उफान मारती दिख रही है. दिखे भी क्यों न, जब पहली लहर रोक ली थी तो काबू रखना था. रोजमर्रा की जद्दोजेहद खातिर जरूरी छूट

ममता का प्लास्टर और बंगाल चुनाव!

सच में देश में कोरोना के बाद सबसे चर्चित यदि हैं तो बंगाल के चुनाव. बुधवार शाम को ममता के चोटिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में एकाएक जो

आधी आबादी पूरा सच! जानकर भी हैं अनजान!!

महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों को लेकर यूँ तो शायद ही कोई दिन जाता हो जब विश्व पटल पर कहीं न कहीं गंभीर चर्चा न होती हो, लेकिन नतीजे

सावधान!  कोरोना महामारी अभी नहीं हारी!!

तावनियों के बाद भी जरा सी लापरवाही पर दुनिया की इस सदी की महामारी फिर भारी पड़ती दिख रही है. दुनिया के कई देशों में पहले ही कोरोना की दूसरी

काश तकनीक से रोके जाते सड़क हादसे

जहाँ फिर एक बस दुर्घटना ने समूचे विन्ध्य सहित पूरे देश को जबरदस्त झकझोर दिया. वहीं विन्ध्य अँचल को तीसरी बार बहुत बड़ा बस हादसा देखने को मजबूर कर दिया.

सावधान! क्या वाट्सऐप बनेगा बेईमान?

इंटरनेट, संचार क्रान्ति में वरदान तो जरूर साबित हुआ और देखते ही देखते पूरी मानव सभ्यता की अहम जरूरत बन भी गया. हकीकत भी यही है कि ‘दुनिया मेरी मुट्ठी

दाता बनाम अन्नदाता की दूरियाँ जल्द मिटे

क्या किसान आन्दोलन  ने पूरे देश में एक नई अलख जगा दी है? क्या किसानों की माँगे वाकई में न्यायोचित नहीं है? यदि ये कानून किसानों के हित में है,

 फिर प्रमाणित समाचार-पत्रों की विश्वनीयता

हमेशा ठगा तो दर्शक ही जाता है. चाहे वह टेलीविजन का हो या फिर क्रिकेट का. निश्चित रूप से याद आया होगा कुछ साल पहले बेहद चर्चाओं में रहा एक

अर्थव्यवस्था बेपटरी हुई है पलटी नहीं

भारत की अर्थव्यवस्था इस सदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. इसको लेकर चिन्ता स्वाभाविक है. वैश्विक महामारी के बीच तमाम विकसित देशों का भी यही हाल है.

नया दौर! और कब तक बाढ़ का पुराना ठौर?

स्वतंत्रता के बाद देश में यदि कुछ तय है तो वह है कुछ खास प्रदेशों के निश्चित इलाकों में बाढ़ की विभीषका. यह बात अलग है कि किसी साल यह

जब कोरोना का आया उफान तब बेफिक्र हुआ इंसान!

कोरोना पर हर रोज चौंकाने वाले आंकड़े भले ही दुनिया भर की सरकारों के लिए चिन्ता का बड़ा कारण हों लेकिन यह भी सच है कि आज दुनिया में कहीं

फरमान! कोरोना बीच गुरू जी बाँटे घर-घर ज्ञान..

जब समूची दुनिया कोरोना के संक्रमण काल को झेल रही हो, उस दौर में नौनिहालों और देश के भावी भविष्य के शिक्षा की चिन्ता स्वाभाविक है, होनी भी चाहिए. लेकिन

दम तोड़ता पर्यावरण, संतुलन खोती प्रकृति..!

आज प्रकृति ऐसे बदले स्वरूप में देखने को मिल रही है जिसको किसी ने कभी सोचा नहीं होगा. अब तो स्थितियां इतनी बदतर हो गई हैं कि मौसम के छिन-पल

क्या ‘केजरीवाल फॉर्मूला’ बदलेगा राजनीति का चेहरा..?

क्या भारतीय राजनीति में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों ने वायदों को नकारने और हकीकत को स्वीकारने एक नई शुरुआत कर दी है? या भारतीय मतदाता ने अपनी परिपक्वता

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