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Category: कृष्ण कुमार निर्माण

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प्रेम बिना कुछ नाहीं रे भाई

प्रेम शास्वत है।नित्य है।आधार है।जीवन शैली है।प्रेम उपासना है।प्रेम ईश्वर है।प्रेम ही धर्म है और प्रेम का अनुसरण करने वाला ही धार्मिक है।प्रेम के अलावा और कोई दूसरा धर्म हो

आइए! हम भी रिटर्न भर लें जीवन की

इकतीस मार्च बीत गया है और अप्रैल के भी कई दिन बीत चुके हैं।वित्त वर्ष के नियमानुसार हम सब एक साल की आयकर रिटर्न भरते है कि हमने साल भर

जरूरी है हम सबके लिए संभलना अब तो

लिखने तो बैठा था कि आज कोई हास्य लिखूंगा लेकिन न जाने क्यों कलम कहीं और ही चल पड़ी।मन बैचैन है,आत्मा द्रवित है,दिल घायल है।आज जब एक हफ्ते से ऊपर

सब याद रखा जाएगा, याद रखिए!!!

कोई भी समस्या जब भी आती है तो हमें कुछ न कुछ समझाकर ही जाती है।कोरोना रूपी महामारी भी कुछ इसी तरह की है।इसी बीच कुछ बेहद डरावनी खबरें भी

छात्रों के लिए खास है ये समय

समय का सदुपयोग करना ही समझदारी कहा जाता है और समझदार ही इंसान की श्रेणी में शुमार किया जाता है।वर्तमान वक्त थोड़ा बेरहम चल रहा है लेकिन फिर भी घबराने

ये कदम भी उठाने जरुरी हैं जनाब!!

हमारे यहाँ एक कहावत है कि–इलाज से परहेज बेहतर है।सही है लेकिन परहेज ऐसा भी ना हो कि परहेज ही बीमार के लिए मुसीबत बन जाए। एक कोरोना वायरस क्या

हेट स्पीच ही नहीं हेट पॉलिटिक्स भी रोकिए जनाब!!

तमाम राजनीतिक दल एक-से हैं,अगर आप सही और निष्पक्ष सोचें तो,अपनी अपनी पार्टियों के प्रति झुकाव को छोड़कर।आजकल जो भी दल देश के भले की सबसे ज्यादा बात करता हो

मुद्दे कौन उठा रहा है, इसे ना देखें

यकीन मानिए हम उस हर विचारधारा के खिलाफ और विरोध में हो जो कट्टर है,जो मानवता के खिलाफ है,जो बांटने का काम करती है,जो आपस में लड़ाने का काम करती

काश कोई मानवता के पक्ष में बोले!!!

“एंटी नैशनल”एक शब्द है जो कि आजकल बहुत अधिक प्रचलित है।ख़ैर,असल में”छपाक”की निर्माता और मुख्य किरदारा के जेएनयू जाने से एकदम भूचाल सा गया।कोई बात नहीं।इस तरह के भूचाल आते

समय रहते गर नहीं सोचा तो…

निश्चय किया था कि नहीं लिखूंगा लेकिन निश्चय टूट गया और कलम की जिद्द की जीत हुई।लिखना पड़ रहा है।ऊब रहे हैं हम।हिंसक हो रहे हैं हम।पल-प्रतिपल बदल रहे हैं

नागरिकता कानून,हम और हमारा समाज?

निश्चित मान लीजिए कि नागरिकता कानून वास्तव में देश में रह रहे किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है और किसी भी मुसलमान को किसी भी रूप में डरने की

आखिर हम कहाँ जा रहे हैं ?

आओ मिलकर तालियां बजाएं,ढोल पीटे।आखिर क्यों नहीं खुश हों?न्याय जो मिला है,लेकिन ध्यान रखिए अगर न्याय की सही और सटीक यही परिभाषा है तो फिर तैयार हो जाइए, एक भावी

क्या कानून से रेप रुक पाएगा?

क्या कानून से रेप रुक पाएगा? शायद नहीं। लेकिन फर्क जरूर पड़ेगा।आज ये सवाल कुछ ज्यादा ही जोर पकड़ रहा है कि रेपिस्ट को फांसी ही दी जानी चाहिए, तब

शेरो -शायरी

शेरो -शायरी दिल के आईने में झांककर देखना। गैर का दुःख भी भांपकर देखना।। जिंदगी बहुत प्यारी लगेगी आपको। औरों की गलती माफ़ कर देखना।। कृष्ण कुमार निर्माण

बदल लिया सै यो आपणा हरियाणा

म्हारा हरियाणा जिस खातर जाणा जावे था,साची पूछो तो वे सारी बात खत्म ए होली भाई।देखो गिंदोडा,बिटोड़ा और लिसोड़ा इब कित सै।परस में बैठणा,सांग का सुआद,भाईचारे की मिठास रही ए

सिद्धान्तों से भटकती राजनीति

पहली बात तो ये कि हरियाणा और महाराष्ट्र में नई सरकार को बधाई।आशा है जनता के फैसले के बाद नवनिर्वाचित सरकारें जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेंगी। लेकिन कर्नाटक का

हरियाणवी जनादेश का मायना ?

अहम और वहम जितनी जल्दी निकल जाए अच्छा होता है,लेकिन बिना अहम और वहम के राजनीति नहीं चलती खेर कर्मचारियों को वहम है कि उन्होंने खट्टर सरकार को हिला दिया

मूल प्रश्नो को टालते हैं राजनैतिक दल

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान और अभी हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान खुद मैंने नेशनल टी वी चैनल के लाइव कार्यक्रम में उस वक्त हाजिर तमाम राजनितिक दलों के

शेरो शायरी

गिरने लगा जब मैं तो उठाया नहीं किसी ने। उड़ना सीख लिया तो सब गिराने लग गए।। जिसने सीखा था मुझसे ही जीने का हुनर। समझदार क्या हुए हमें समझाने

विश्व हृदय दिवस पर हरियाणवी बोल

विश्व हृदय दिवस पर बोल दिल थारा यो आपणा,इसका राखो ख्याल। फेर किमे जै होग्या त्य,होता घणा मलाल।। होता घणा मलाल,ध्यान त्ये सुण ल्ये भाई। हार्ट आल्या डे,ज्यात दिल की

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