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ब्रेकिंग न्यूज़

Category: डॉ अजय खेमरिया

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कमिश्नर सिस्टम : क्या आईएएस के मिथक को तोड़ सकते है आईपीएस

नोयडा और लखनऊ में आरम्भ की गई पुलिस आयुक्त प्रणाली के बहाने देश के आईपीएस संवर्ग के समक्ष पुलिस की जनोन्मुखी छवि बनाने की चुनौती भी है। भारत मे परम्परागत

बाल सवाल .. आफ्टरकेयर के मोर्चे पर कहाँ खड़ा है भारत?

“जुबेनाइल जस्टिस एक्ट 2015” भारत मे करीब 20 साल पुराना है।मौजूदा एक्ट सन 2000 औऱ 2006 का अधतन विस्तार है।इसका उद्देश्य भारत के हर बालक को उसकी जन्मजात प्रतिभा और

सत्ता सिंडिकेट के खूंटे से बंधा देश का मैदानी प्रशासन तंत्र..!

तथ्य एक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नीतीश कुमार,कमलनाथ, खट्टर ,भूपेश बघेल सभी के जनता दरबार को गहराई से समझिए। एकीकृत और कार्बन कॉपी इस आशय से नजर आयेंगे की यहाँ आने

हमारे बदलते अवचेतन और आग्रह को बयां करती न्यू इंडिया की सेलिब्रिटी लिस्ट

एक सामयिक विश्लेषण फोर्ब्स इंडिया सेलिब्रिटी 2019 मप्र के झाबुआ औऱ अलीराजपुर जिलों के करीब पांच सौ से अधिक गांवों में ” हलमा ” (एक वनवासी लोकप्रथा) के जरिये जल

झूठ ,हिंसा,अफवाह और भय पर खड़े भारत के वाममार्गी ..!

भारत में अल्पसंख्यकवाद को क्यों जिंदा रखना चाहते है वामपंथी वे देश के इतिहास ,संस्कृति, कला,साहित्य,पत्रकारिता और अन्य सभी बौद्धिक क्षेत्रों में एकाधिकार के स्वामी थे।सरकारी सुविधाओं पर टिके ये

राज्य प्रशासन में भी मोदी का अक्स चाहते है लोग

झारखंड का चुनावी सन्देश अबकी बार झारखंड में 65 पार ,हरियाणा और छत्तीसगढ़ में 75 पार, मप्र में 200 पार,राजस्थान में 150 पार, महाराष्ट्र में 200 पार ।यह नारे बीजेपी

भारत में”मतदान व्यवहार “को परिपक्वता देता झारखंड का जनादेश

कैडर के मन की बात को भी समझने की जरूरत अबकी बार 65 पार झारखंड में,हरियाणा और छत्तीसगढ़ में 75 पार, मप्र में 200 पार,राजस्थान में 150 पार, महाराष्ट्र में

नए भारत के विरुद्ध खड़े वाममार्गी बुद्धिजीवी

भारत में अल्पसंख्यकवाद को क्यों जिंदा रखना चाहते है वामपंथी रामचन्द्र गुहा और अन्य लेखकों को विरोध प्रदर्शन करते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया इसे लेकर वामपंथी विचारक और

बॉरिस जॉनसन की जीत के दक्षिणपंथी निहितार्थ

लेबर पार्टी की शिकस्त नकली सेक्युलरिज्म की भी पराजय है नागरिकता संशोधन कानून के शोर शराबे के बीच एक दूसरी खबर भी भारत में चर्चा का विषय है , ब्रिटिश

मोदी के मुमकिन मैन

संसदीय सियासत में नई इबारत औऱ व्याकरण गढ़ते अमित शाह “मोदी है तो मुमकिन है”यह नारा पिछले लोकसभा चुनावों में जमकर चला।यह भारतीय मतदाताओं को भी खूब भाया और 2014

भरोसे की जमीन तलाशते पुलिस और नागरिक सबंध..!

भारत में मौजूदा पुलिस तंत्र करीब डेढ़ सौ साल पुराना है और इसकी कार्य संस्कृति में आज भी  उसी अंग्रेजी हुकूमत का अक्स दिखाई देता है जिसके सरंक्षण और निर्बाध

गीता और गांधी से पुलिस के सामाजिक समेकन की कोशिश

मप्र में एक आईपीएस अफसर अपने सामाजिक सरोकारों के जरिये लिख रहे है सोशल पुलीसिंग की नई कहानी नाम : राजाबाबू सिंह पद : अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पदस्थापना : ग्वालियर

मिशनरी विद्वानों के परकोटे में कैद अंबेडकर का राष्ट्रीय दर्शन

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर पुण्यतिथि 6 दिसम्बर पर विशेष क्या डॉ. बी.आर. अंबेडकर सिर्फ दलित नेता थे ? और थोड़ा सुने तो भारत के संविधान के निर्माता। सरकारी इश्तहारों और

धारा 151 और 323 506 बी के दिन अब गिनती के बचे है

गृहमंत्री अमित शाह ने भारत की मौजूदा आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल परिवर्तन के मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है।लख़नऊ में आयोजित47वी पुलिस साइंस कांग्रेस के समापन

डेढ़ सौ साल बाद अब बदलेगी हमारी पुलिस

अमित शाह अंग्रेजी राज के अवशेष को खत्म करने की तैयारी मेंं गृहमंत्री अमित शाह ने भारत की मौजूदा आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल परिवर्तन के मसौदे पर काम

यूपी,बिहार की तरह महाराष्ट्र में शरद राव के आगे सरेंडर करती दिखी कांग्रेस

महाराष्ट्र की सियासी महाभारत में कांग्रेस को क्या हांसिल हुआ है ?यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिवसेना को तो सीएम की कुर्सी चाहिये थी, जो उसे मिल गई। और

महाराष्ट्र के नैतिक सन्देश को समझने की ईमानदारी दिखाए बीजेपी

हर कीमत पर सरकार बनाना वैचारिकी के भी विरुद्ध है क्या महाराष्ट्र में मिली शिकस्त से बीजेपी का आला नेतृत्व आत्मचिंतन की ओर उन्मुख होगा?यह सवाल आज इस पार्टी के

दर्द देता निचला प्रशासन और सत्ता की बीन बजाती अफसरशाही

तथ्य एक: मप्र में पिछली बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई “संबल योजना” में लगभग 80 फीसदी हितग्राहियों को हटाने की करवाई कमलनाथ सरकार कर रही है।अकेले शिवपुरी जिला मुख्यालय

ब्यूरोक्रेटिक एक्टिविज्म के विरुद्ध मप्र में डॉक्टरों का सत्याग्रह कितना तार्किक

लोकस्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को आईएएस से मुक्त कराने का अभियान सामयिक औऱ तार्किक भी है। मप्र में सरकारी औऱ गैर सरकारी डॉक्टर्स इन दिनों ब्यूरोक्रेसी के विरुद्ध लामबंद हो

सूचना अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ,जबाबदेह तंत्र और असली चुनौती की दुरभिसंधि

*अफसरशाही की शरणस्थली बनी सूचना अधिकार की सुविधाएं* *मुल्क की जनता के लिये आज भी औपनिवेशिक ही है प्रशासन तंत्र का ढांचा* भारत का सुप्रीम कोर्ट सूचना के अधिकार कानून

गौरी, ग़जनी की जगह कलाम, और हमीद क्यों नही मेरे मुल्क की पहचान!

*अयोध्या निर्णय :अवसर है एक भारत श्रेष्ठ भारत के उद्घोष का* अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय भारत के हिन्दू और मुसलमानों के लिए एक ऐसा अवसर है जहां

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