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ब्रेकिंग न्यूज़

Category: डॉ अजय खेमरिया

Total 58 Posts

स्वामी विवेकानंद औऱ वामपंथी बौद्धिक जगत की खोखली दलीलें 

स्वामी विवेकानंद को लेकर वामपंथी बुद्धिजीवी एक नकली विमर्श खड़ा करने की कोशिशों में जुटे हुए है।हिन्दुत्व को लेकर अपनी ओछी मानसिकता औऱ सतही समझ उनके बुनियादी चिंतन के मूल

मिक्स थैरेपी औऱ 135 करोड़ के आरोग्य का लक्ष्य

वन नेशन वन हैल्थ पॉलिसी की ओर बढ़ती मोदी सरकार  देश भर के एलोपैथिक चिकित्सक काम बंद हड़ताल पर रहे है। यह हड़ताल मोदी सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों को कतिपय

मिशनरी विद्वान…बाबा साहेब  औऱ  एक युगपुरुष 

डॉ बी आर अम्बेडकर पुण्यतिथि 6 दिसम्बर पर विशेष   आज कल राजनीतिक फायदे के लिए एक नई थ्योरी गढ़ी जा रही है -“जय भीम-जय मीम”। यानी चुनावी सियासत के लिए

कोविड 19 औऱ भारतीय प्रशासनिक सेवा 

70 साल बाद भी नागरिक प्रशासन में औपनिवेशिक भार से दबा भारत..! मप्र में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के पद से हटाए गए अफसर बीए पास कर आईएएस बने है।इसी तरह

बीजेपी में सिंधिया का विरोध कितना जायज ?

मप्र में पीढ़ीगत बदलाब को भी समझने की जरूर मप्र में बीजेपी के कुछ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के दलबदल के साथ ही मुरझाए हुए है।कैबिनेट के गठन के बाद तो

क्रोनी कैपिटलिज्म, मीडिया ट्रायल, औऱ बाजार के बीच कोरोना

हमारे लोकजीवन की चेतना, ऊर्जा,औऱ संकेन्द्रण मीडिया ट्रायल पर अबलंबित हो गए है।सूचना क्रांति ने सूचना की सीमित महत्ता को अनावश्यक व्यापक और विशाल बना दिया है। केवल निजी तौर

सिंधिया ने मप्र में अपने पिता का बदला पूरा किया

राजनीति औऱ प्रबन्धन शास्त्र के अंतर को रेखांकित करता है सिंधिया का बीजेपी में जाना   जो हिम्मत स्व.माधवराव सिंधिया अपने विराट राजनीतिक प्रभाव के बाबजूद नही दिखा पाए उसे उनके

निजी मेडिकल कॉलेज :कारपोरेट, कालेधन और अफसरशाही का समुच्चय

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या भूमिका है?इस सवाल के अक्स में केवल कारपोरेट पूंजी औऱ उससे उपजी संपन्न चिकित्सकीय बिरादरी ही नजर आती है।हाल ही

मप्र में कांग्रेस की घरेलू कलह से हिली सरकार

मप्र में कमलनाथ सरकार पर छाया संकट असल में पार्टी आलाकमान की कमजोरी और मंत्रिमंडल चयन में बरती गई अपरिपक्वता का नतीजा है। 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए

क्या इंदिरा के अक्स से भी डरने लगी है कांग्रेस ..!

मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक परिचय संजय गांधी के परम मित्र औऱ इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे वाला भी है।वही संजय गांधी जिन्होंने दिल्ली के तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण

आखिर क्यों दिवालिया हो रहे है डिस्काम..?

देश भर में पिछले 17 बर्षों से बिजली घोटाला हो रहा है। करीब 10 लाख करोड़ का सरकारी घाटा औऱ इतनी राशि की बंदरबांट मौजूदा विधुत अधिनियम 2003 के क्रियान्वयन

कलेक्टर : नाम नही मन बदलने की दरकार

मप्र में सरकार कलेक्टर का नाम बदलने जा रही है।अंग्रेजी हुकूमत के लिए राजस्व वसूलने यानी कलेक्ट करने के लिए ईजाद किये गए कलेक्टर के पद में अभी भी औपनिवेशिक

मप्र में क्यों सड़क पर उतरना चाहते है सिंधिया..!

मप्र के उत्तरी औऱ मालवा इलाके में सोशल मीडिया पर एक नारा ट्रेंड कर रहा है “माफ करो कमलनाथ … हमारे नेता तो महाराज”। कमलनाथ के दिल्ली आवास पर ज्योतिरादित्य

दीनदयाल जी के अक्स में दिल्ली के नतीजे

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर बीजेपी दिल्ली विधानसभा का चुनाव एक बार फिर हार गई।यह पार्टी की लगातार छठवीं पराजय है उसी दिल्ली की गलियों में जहां की चौडी,

वर्ड ऑफ ईयर “संविधान” संसदीय सियासत का बदरंग शोर..!

ऑक्सफोर्ड शब्दकोश ने ” संविधान”शब्द को हिंदी वर्ड ऑफ ईयर 2019 घोषित किया है।भारत में बीते बर्ष यह शब्द संसद,सुप्रीम कोर्ट और सड़क पर सर्वाधिक प्रचलित औऱ प्रतिध्वनित हुआ है।ऑक्सफोर्ड

5 ट्रिलियन की इकॉनमी और खैराती भीड़ गढ़ती संसदीय राजनीति

जबाबदेह नागरिक समाज के अपरिहार्य तत्व को खत्म करने की समवेत सहमति बनाती चुनावी राजनीति एक खतरनाक संकेतक है।दिल्ली विधानसभा चुनाव में जिस तरह मुफ्तखोरी की उद्घोषणाए हो रही है

संविधान के सनातन स्तंभ और सेक्युलरिज्म का सियासत

गणतंत्र दिवस विशेष देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लोग सड़कों पर संविधान की किताब,बाबासाहब अंबेडकर की तस्वीर और तिरंगा लेकर आंदोलन कर रहे है।इस दलील के

कमिश्नर सिस्टम : क्या आईएएस के मिथक को तोड़ सकते है आईपीएस

नोयडा और लखनऊ में आरम्भ की गई पुलिस आयुक्त प्रणाली के बहाने देश के आईपीएस संवर्ग के समक्ष पुलिस की जनोन्मुखी छवि बनाने की चुनौती भी है। भारत मे परम्परागत

बाल सवाल .. आफ्टरकेयर के मोर्चे पर कहाँ खड़ा है भारत?

“जुबेनाइल जस्टिस एक्ट 2015” भारत मे करीब 20 साल पुराना है।मौजूदा एक्ट सन 2000 औऱ 2006 का अधतन विस्तार है।इसका उद्देश्य भारत के हर बालक को उसकी जन्मजात प्रतिभा और

सत्ता सिंडिकेट के खूंटे से बंधा देश का मैदानी प्रशासन तंत्र..!

तथ्य एक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नीतीश कुमार,कमलनाथ, खट्टर ,भूपेश बघेल सभी के जनता दरबार को गहराई से समझिए। एकीकृत और कार्बन कॉपी इस आशय से नजर आयेंगे की यहाँ आने

हमारे बदलते अवचेतन और आग्रह को बयां करती न्यू इंडिया की सेलिब्रिटी लिस्ट

एक सामयिक विश्लेषण फोर्ब्स इंडिया सेलिब्रिटी 2019 मप्र के झाबुआ औऱ अलीराजपुर जिलों के करीब पांच सौ से अधिक गांवों में ” हलमा ” (एक वनवासी लोकप्रथा) के जरिये जल

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