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ब्रेकिंग न्यूज़

Category: डॉ. प्रदीप उपाध्याय

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व्यंग्य : शव की बेचैनी और आत्मा को सुकून

अब तो शव बहुत बुरी तरह से बिफर गया था।यह शव विक्रमार्क के कांधे पर लटका बेताल का शव नहीं था बल्कि कोरोना का सताया हुआ आदम जात था ।कितनी

घोड़ो पर दांव और सल्तनत की सलामती

भाई साहब,ये तख़्त-ओ-ताज की लड़ाई भी क्या-क्या नहीं करवा रही है। रियाया भले ही सोचे कि -” कोउ नृप होइ हमै का हानि, चेरि छांडि कि होइब रानी” लेकिन उन्हें

व्यंग्य : इसकी भी जय-जय,उसकी भी जय-जय

” दद्दाजी, क्या बात है!पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा व्यस्त हो गए हैं।आपको तो बात करने की ही फुर्सत नहीं मिल रही है।हम लोग तरस से गए हैं आपकी

व्यंग्य : फिफ्टी-फिफ्टी का गेम और गेम चेंजर

जमाना बदल गया है और बदलता ही जा रहा है।नित नये प्रयोग हो रहे हैं।पहले एक ही स्वाद का बिस्कुट खाते थे पार्लेजी,जो भी था,जैसा भी था,लेकिन शतप्रतिशत वाला! सौ

व्यंग्य : आओ , पिट्ठू बने तोतों की कुछ बातें कर लें

पुलिस-पुलिस कहकर तस्करों को अलर्ट करने वाला तोता तो आखिरकार पकड़ में आ ही गया ! कब तक बकरे की माँ खैर मनाती, एक न एक दिन तो पकड़ में

मजदूर -किसान के जीवन में कब खुशहाली आएगी !

आजादी के बाद से मजदूर और किसान आज भी बदहाली का जीवन जीने को अभिशप्त हैं।एक ओर मजदूर को अपना श्रम बेचने के लिए मजदूर मण्डी में स्वयं को प्रदर्शित

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