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Category: डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त

Total 63 Posts

दो अक्षरों का सवाल

वह मलीन बस्ती है। रेतीले पैर नमकीली चमड़ी वाले चेहरों पर हल्की मुस्कान के सिवाय कुछ नहीं है। उनके पास न शहर की चकाचौंध है न बनावटी रिश्ते। न दिखावा

जिंदगी की चादर और सांसों के धागे

अरी सुनती हो माधुरी! वो सुनीता है न! वही जिसकी दो साल पहले चंडीगढ़ में शादी हुई थी। हाँ-हाँ वही! एक महीने पहले उसके पति का देहांत हो गया। कैसे? सुनीता तो टीबी की

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

आज सुबह- सुबह पंडित जी ने तीन बार छींक दिया। पहली छींक पर ओम् नमः शिवाय, दूसरी छींक पर कुछ कहते इससे पहले तीसरी छींक ने उन्हें हिलाकर रख दिया।

एक अनार सौ बीमार

रोजगार के गुड़ पर बेरोजगार मक्खियों का भिनभिना आम दृश्य हो गया है। पहले सरकार जब-तब गुड़ का टुकड़ा फेंका करती थी, तब-तब बेरोजगार मक्खियाँ उसे चट करने में व्यस्त

प्रधानी के चक्कर में…

बड़ी देर से मोबाइल कान से सटाए प्रधानी के उम्मीदवार रामभरोसे किसी से बात कर रहे थे। कह रहे थे – चाहे कुछ भी हो जाए चुनाव हमें ही जीतना

छोटे-छोटे सीरियाई बम

बड़े परदे तो बड़े परदे छोटे परदे सुभान अल्लाह की तर्ज पर हिंदी चैनलों के आंगन में अजीबोगरीब धारावाहिकों की बाढ़ सी आ गयी है। ये धारावाहिक हम लोगों में

कल की पुरवाई

अभी भी वह लकड़ियाँ जल रही हैं। आप चाहें तो लकड़ियों को लड़कियाँ भी पढ़ सकते हैं। लड़कियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें लकड़ियों से कोई शिकायत नहीं

भाई! यह कोरोना भला कब जाएगा?

सुना था केवल फिल्मों के सिक्वेल होते हैं। यहाँ तो कोरोना का सिक्वेल भी निकल आया। न जाने यह कोरोना कहाँ से फंडिंग कराता है कि धड़ल्ले से एक के

डू नॉट आस्क

कोबरा एंड पार्टी के आलाकमान का माथा ठनका हुआ था। उन्होंने नोटिस जारी कर सभी कोबराओं को आपातकालीन बैठक में भाग लेने के लिए कहा। बिलों, पहाड़ों, टीलों और रेती

मछली जल की रानी है

तालाब का मतलब आप सब जानते ही होंगे। उसमें भी कुछ जीव रहते हैं। जैसी अपनी दुनिया है ठीक उनकी दुनिया है। अपनी दुनिया में लोग एक-दूसरे को पानी पिलाने

ऑफलाइनी शादी में ऑनलाइनी टिटिम्मे

जैसे-जैसे दुनिया प्रगति कर रही है, वैसे-वैसे मुसीबतें भी खड़ी कर रही है। एक समय हरी-भरी दुनिया रोगमुक्त थी। अब महामारियों का घर बन गया है। पहले जिन महामारियों की

वादे बदलते हैं, चूहे नहीं

एक बेरोजगार चूहे ने देखा वादों की बड़ी बोतल में रोजगार के ढेर सारे लड्डू हैं। यह आँखों का धोखा है या फिर ठगने की नई चाल, उसे समझ नही

ओ से ओखली, औ से औरत

जिंदगी एक नदी है और इसका छोर या किनारा कोई नहीं जानता। बहुत सी औरतें शायद ऐसी ही होती हैं। सिंदूर भरने वालों हाथों में कठपुतली बनकर रह जाती हैं।

व्यंग्य : सिंघम बनोगे या चीवींगम!

कुछ दिन पहले हैदराबाद में आई.पी.एस. प्रशिक्षण समाप्ति समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कहा कि पुलिस की वर्दी ऐसी है जिसे पहनते ही

जी.डी.पी. यानी गरीबी दिवालिया और पागलपन!

एक दिन भजनखबरी से उसका दोस्त टाइमपास टकला पूछ बैठा कि यह जीडीपी क्या होता है? भजनखबरी ने थोड़ी देर सोचने के बाद कहा – अरे यार! यह भी कोई

ओला-वोला छोड़ो राजधानी बुक करवा लो!

सुबह दस बज रहे थे। हरदिन की तरह अपनी में लगी थी। ललिया सड़क के किनारे अपनी कैब का इंतजार कर रही थी। तभी उसकी सहेली बिमला वहाँ आ पहुँची।

शिक्षा की सूरत बदलने वाला महान शिक्षाविद् जनार्दन रेड्डी

डॉ. काटेपल्ली जनार्दन रेड्डी एक प्रसिद्ध शिक्षक व राजनेता हैं। वर्ष 1960 में 10 मार्च को एक मध्यम परिवार में भारत के तेलंगाना राज्य के महबूबनगर जिले में इनका जन्म

21वीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार

तेलंगाना से डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ का चयन प्रलेक प्रकाशन समूह, मुम्बई, महाराष्ट्र ने 21वीं सदी के 101 श्रेष्ठ व्यंग्यकार विषयक मेगा योजना इस जुलाई में प्लान की थी, जिसमें देश और विदेश के

न्यूज़ चैनलों पर हो रही गरमागरम बहसों पर विशेष लेख

आओ भौ-भौ करते हैं भजनखबरी पिछले कुछ दिनों से घर पर ऐसा पड़ा है, जैसे कोई पेपरवेट हो। गनीमत पेपरवेट अपने नाम के मुताबिक काम तो करता है। यह साहब

मजबूत नहीं मजबूर हैं मजदूर

1 मई – मजदूर दिवस के अवसर पर खो बैठा एक दिन की मजदूरी, आज एक मजदूर मजबूरी में रोया था। जाने किसके लिए मई दिवस ये आता है, परिवार

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