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ब्रेकिंग न्यूज़

Category: डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त

Total 43 Posts

व्यंग्य : उंगली उठाने से पहले…

मोहन को लगता है कि पिछले कुछ दिनों से उसकी पत्नी ठीक से सुन नहीं पा रही है। वह इसके बारे में अपनी पत्नी से बात करना चाहता है। किंतु

विलुप्तता का खंजर

गानेवाली चिड़िया की कहानी हम सभी जानते हैं। कहानी का सार यह है कि एक राजा जो गानेवाली चिड़िया की आवाज़ से वंचित होने पर मौत की कगार पर पहुँच

 व्यंग्य लेख : कोरोना नहीं कुछ करो न !

चीन! नाम तो सुना ही होगा। एक ऐसा देश जिसका नाम सुनकर सारी दुनिया से हम जाती है। यह देश सस्ती चीजों और कभी-कभी सस्ती मानसिकता के लिए भी जाना

मार्मिक व्यंग्य : मक्खी की दिल्ली यात्रा

एक नर मक्खी थी। दूसरी मक्खियों की तुलना में इसकी जिंदगी बड़ी तंगदिल थी। कभी आराम करने का समय ही नहीं मिला। एक दिन हैदराबाद से नई दिल्ली जानेवाली तेलंगाणा

विश्वास + त्याग = प्रेम

वैलेंटाइन डे पर विशेष   ये इश्क नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है जिसमें डूब के जाना है जिगर मुरादाबादी ने इश्क को आग का दरिया

क्योंकि बोझ नहीं बनना चाहता…

एक सिपाही था। वह अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात था। आए दिन दुश्मन देश से गोलीबारी के कारण माहौल गर्म हो चला था। किंतु इधर कुछ

व्यंग्य : नोट के बदले वोट नहीं…

‘चुनाव’ नाम का एक शहर था। वहां के सभी लोग सहमे हुए थे। कुछ दिन पहले तक वे मिलजुलकर रहते थे। लेकिन अचानक नेताओं की बढ़ती आवाजाही से वे खतरे

कवि प्रदीप के जन्म दिवस पर विशेष : भारत माता के मंदिर का दीप ‘प्रदीप’

थी खून से लथ-पथ काया, फिर भी बन्दूक उठाके दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गये होश गँवा के जब अन्त-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं

कैंसर दिवस पर विशेष : ‘जो डर गया समझो मर गया

वह कैंसर की महामारी से ग्रस्त थी। दो बार हमला हुआ। वह शुरू में पीड़ित थी लेकिन उसे कोई खतरा नहीं था। फिर भी डरी हुई थी। मजाल जो कोई

‘फॉरवर्ड’ करने की फूहड़ संस्कृति

समय के बदलते तकनीकी तेवर से सोशल मीडिया पर कोई भी चीज चंद सेकेंडों में वायरल हो जाती है। वायरल सामग्री अच्छी हो तो कोई बात नहीं। यदि वायरल सामग्री

व्यंग्य लेख : मुँह बनी बंदूक और बोली बनी गोली

आजकल सरे आम बंदूक चलाना फैशन हो गया है। या यूँ कहिए कि स्टेटस हो गया है। हमारे यहाँ तो शादियों में पटाखों की जगह बंदूक ने लिया है। और

बापू, एक बार फिर आ जाओ!

30 जनवरी – शहीदी दिवस पर विशेष पीके फिल्म का एक दृश्य है। अभिनेता आमिर खान गाजर खरीदने के लिए दुकानदार को गांधी जी के चित्र वाली कई तरह की

व्यंग्य : “हमारा देश बदल रहा है…”

कभी-कभी जब मैं देशभक्ति के रस से सराबोर हो जाता हूँ तब कुछ टीका-टिप्पणी युक्त कविता लिख देता हूँ। ऐसी ही मैंने एक कविता कल लिखी थी जिसकी पहली और

गणतंत्र भारत की खोज में…

“तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वम् हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे” – बंकिमचंद्र चटर्जी वंदेमातरम गीत की

आवश्यकता और लालच के बीच त्रिशंकु मनुष्य

माँ एक नवजात शिशु को जन्म देती है। तत्पश्चात, धरती उस शिशु को शेष जीवन के लिए अपनी गोद में जगह देती है। उसके फलने-फूलने के हरसंभव प्रयास करती है।

व्यंग्य : वोटरभाई, जरा देख के…

एक बहुत बड़ा व्यापारी हर दिन की तरह टहलने के लिए निकला था। टहलते-टहलते एक दुर्घटना हुई और उसी में उसकी मौत हो गई। चित्रगुप्त के आदेशानुसार नरकलोक के सिपाही

मौत से डर नहीं लगता साहब… ‘शिक्षा’ से लगता है

वहां किताबें तितर-बितर थी। पढ़ने वाली किताबें फटी पड़ी थी। पुस्तकालय में सन्नाटा नहीं कोहराम मचा था। कलम की जगह सरियों ने, कंप्यूटर की जगह मोबाइलों ने षड्यंत्र का जिम्मा

हिंदी विकल्प नहीं हमारी आवश्यकता है

संदर्भः विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) आज विश्व हिंदी दिवस है। जहाँ-तहाँ हिंदी बोलने,  पढ़ने,  सुनने,  बांचने,  गाने के सुर अलापे जाएंगे। या यूँ कहिए कि आज हिंदी ‘भाषा’ के

कहीं जोश में होश न खो बैठें आज की युवा पीढ़ी

संदर्भः देश भर में चल रहे आंदोलनों की समीक्षा पिछले कुछ दिनों से युवा पीढ़ी को लेकर हमारे मित्रों के बीच एक लंबी बहस चल रही थी। हम सबकी यह

‘कितने पाकिस्तान’ क़ब्रिस्तान और श्मशानों के बीच जीवन का संघर्ष है: कमलेश्वर

6 जनवरी जयंती विशेष प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार कमलेश्वर की आज जयंती है। वे अपनी लेखनी में एक ऐसी लोक अदालत का निर्माण करते हैं जिसमें हर उस मृत व्यक्ति पर

व्यंग्य : सोशल मीडिया विश्वविद्यालय बनाम आजकल के विश्वविद्यालय

आज के समय का सबसे तेज़ी से दिन दुनी रात चौगुनी विकास करने वाला कोई विश्वविद्यालय है, तो वह है– सोशल मीडिया विश्वविद्यालय। हाँ जनाब, यह दुनिया का सबसे बड़ा

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