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Category: रामविलास जांगिड़

Total 58 Posts

व्यंग्य : लकीर पीटने का मजा ही कुछ और!

आज तक मैंने जितने भी कदम उठाए हुए वे सब अहिंसा वादी कदम थे। वह तो गांधीजी की किस्मत अच्छी थी कि उस जमाने में मेरा अवतार नहीं हुआ वरना

व्यंग्य : अपने विधायक रखना जरा संभाल के

समकालीन भारतीय राजनीति में दृश्य चकाचक नजर आ रहे हैं। कोई एक तरफ विधायकों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कोई किसी और के विधायकों पर डोरे डाल रहे

व्यंग्य : कर्नाटक मॉडल- कुर्सी प्राप्ति का फसली फार्मूला

आपके हमारे वोट देने मात्र से किसी की सरकार बन जाएगी तो यह वोटर देवता जी आपका सिर्फ भ्रम है। चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें लेकर कोई चुनावी दल आगे

व्यंग्य : नमस्ते जी कोरोना तुझे नहीं समझते जी!

एक बात तो साफ है कि कोरोना वायरस से अब डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह कोरोना हम भारतीयों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा, क्योंकि यह विदेशी वायरस

फांसी का फंदा अब स्वयं फांसी पर !

आसमान में काले बादल मंडरा रहे थे। वहां पर गिद्धों की एक टोली इस पर पूरी नजर लगाई हुई दिखी। सिस्टम की नाकामी की धूल के गुबार उठ रहे थे।

व्यंग्य : प्री होली बैंच मार्क कार्यक्रम!

प्यारे दोस्तो! सामने होली का त्यौहार दिखाई पड़ रहा है। इस मौके पर हमें अच्छी खासी तैयारी करनी पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि यह त्योहारों की

व्यंग्य : बेगम ने पाल रखे हैं दो-दो करारे जिन्न

जिन्न गायब हो सकते हैं। उड़ सकते हैं, किसी भी जीव, जंतु, महल, किला, इंसान या वस्तु का रूप धारण कर सकते है। जिन्न किसी भी स्थान तक मात्र अपनी

इमरान के आगे बीन बजाए बेचारी भैंस !

पाकिस्तान ने खोला भैंस बेचने का कारोबार! भैंस बेचारी स्वयं इमरान के आगे बीन बजा रही है पर इमरान कब समझ पाए हैं जी! वहां अब गधे पालने से गरीबी

‘साइबर यातना’ के प्रति बहुत सजग रहना होगा

डिजिटल दुनिया के इस दौर में हर काम ऑनलाइन होता है। सरकारें लोगों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहित करती हैं। बस, मेट्रो में सफर करें या हवाई जहाज से

भीड़ तैयार खड़ी है मुंडाने के लिए !

कबीर दास जी ने कहा कि बार-बार मूंडने से कोई भी व्यक्ति बैकुंठ नहीं जा सकता। अगर ऐसा होता तो भेड़ हर-बार बैकुंठ क्यों नहीं चली जाती? उसे तो हर

शिक्षा जगत में नई ऊर्जा- शिक्षा का परिधान ‘नो बैग डे’

शिक्षा किसी समाज में सदैव चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया है। शिक्षा का महत्व व्यक्ति के प्रत्येक पहलू को विकसित करके बालक का चारित्रिक निर्माण करना है। इसके द्वारा व्यक्ति की

(व्यंग्य ) : बीमा बालाओं की मार्केट बाजी !

“नमस्कार जी! आप जांगिड़ जी बोल रहे हैं!” “जी फिलहाल तो बोल रहा हूँ। मैंने बोलकर बोल ही दिया आखिर।” तब आवाज घनघनाई -“मैं कसाईबसाई बीमा कंपनी से बोल रही

व्यंग्य : भैंस माँगे कांँकड़े, सरकार माँगे आँकड़े

जब-जब सरकार को देखता हूँ तब-तब मुझे सरकार के बजाए भैंस दिखाई देती है। भैंस को देख लो या सरकार को देख लो। सरकार और भैंस समान है क्योंकि भैंस

व्यंग्य : यारों ये शूल चुभाओ कोई बेवकूफ आया है!

कर्ज लेकर महंगी शादी करना बहुत भारी समझदारी है। चमकदार बड़े-बड़े टेंट और 1 दिन के लिए बारात में ढेरों गाड़ियां लहराना गजब का साहस है! डीजे, ढोल, बैंड, ताशा

व्यंग्य : चमचा हर पल राखिए चमचा जीवन फूल

सड़क से लेकर सत्ता के गलियारे तक। चढ़ती दोपहर से लेकर अमावस के अंधियारे तक। सर्वत्र चमचों का ही राज चलता है। चमचों से ही सारा काज फलता है। बिन

व्यंग्य : ठंड में पकौड़े और पुण्य का अवसर

कई दिनों से मेरी भुजाएं फड़फड़ा रही है कि मैं कोई एक ढंग का पुण्य कर ही दूं। एक स्वामी जी पुण्य के फायदे गिना रहे थे। वे फाइव स्टार

व्यंग्य : अधिनियम के दायरे में पूंछ हिलाना ही फायदेमंद

गली में दो गुटों के बीच कई कुत्तों का कुश्ती फाइनल मैच चल रहा था। उनके मैच के बीच से गुजर कर हमें घर आना था। हम दोनों कुत्ता गुटों

व्यंग्य : जिसे चिरिंडा खरीदना हो वह मेरे करीब आ जाए

ढर्र डब: डब: ढर्र! ढर्र डब: डब: ढर्र! हां तो मेरे सारे मेहरबान! कदरदान! पानदान! पीकदान! तुम सबका मेरे इस मजमे में स्वागत है। मिस चोपड़ी! अब नचाए मसान की

ऐसे कीजिए पति के उपयोग!

सुबह 4:00 बजे मेरी सगी पत्नी मेरी रजाई खींच देती है। पत्नी श्री हाथों को रजाई में दुबकाए प्रातः कालीन सभा की शुरुआत भजनों से करती है। उनके भजन लय

व्यंग्य : भिखारी अधिकारी के रूप में इंटर्नशिप सर्टिफिकेट!

ऑल इंडिया भिखारी इंस्टिट्यूट के मुताबिक देश में भिखारियों का स्वर्णिम भविष्य है। लेकिन इसमें प्रवेश की प्रक्रिया में भारी कठिनाई है। प्रवेश के लिए कम से कम पोस्ट ग्रेजुएट

व्यंग्य : जरूरी है राष्ट्रीय गाली कोष का निर्माण

देश में भयंकर लोकतांत्रिक व्यवस्था है और कहीं न कहीं किसी न किसी स्थान पर रोज ही चुनाव होते रहते हैं। देश में हर कहीं आदर्श आचरण संहिता का पालन