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Category: रामविलास जांगिड़

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व्यंग : एजेंडा वही जो वोट दिलाए

वे पार्टी मुख्यालय में गए । उन्होंने गाड़ी को सीधे फव्वारे के नीचे स्नान करने के लिए खड़ा कर दिया । बाहर तेज गर्मी थी । अंदर एयर कंडीशनर में

एमए इन उपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन

पिछले कुछ सालों से मेरे लिए कोई काम नहीं है। अब मेरा एक ही काम है अपने परिचितों से आँखें चुराना। देखते ही कन्नी काट कर इधर-उधर छुप जाना। कारण

खबरिया चैनल की जबरिया न्यूज़ें

न्यूज़ चैनल वाले भाई साहब को हम सब दर्शकों का घनघोर नमस्ते! एंकर भैनजी आप को साष्टांग प्रणाम! आप इन दिनों सुशांत केस को सुलझाने में रात-दिन लगे पड़े हैं।

आत्मनिर्भर बंदर!

बंदरों के मामले में जितना मैं आत्मनिर्भर था उतना ही मेरा दोस्त चंद्रप्रकाश! शुरू से ही हम दोनों बंदरों के बहुत शौकीन थे। लोगों को बंदर परेशानी के रूप में

किचन कैबिनेट में कॉकरोच

अमेरिका की किचन कैबिनेट में कॉकरोच आने पर अमेरिका के राष्ट्रपति ने वर्ल्ड प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। किचन में कॉकरोच आ जाने पर भारी नाराजगी जताई। इसका कारण रूस को बताया

व्यंग्य रचना: घनघोर आजाद शुभकामनाएं!

मोबाइल में शुभकामनाएं कीड़ों की तरह बिलबिला रही है। जैसे ही मोबाइल खोलता हूं शुभकामनाएं मकोड़ों-चीटियों की तरह बाहर निकल-निकल कर बह रही है। ले लो आजादी की शुभकामनाएं! इस

व्यंग्य : लकीर पीटने का मजा ही कुछ और!

आज तक मैंने जितने भी कदम उठाए हुए वे सब अहिंसा वादी कदम थे। वह तो गांधीजी की किस्मत अच्छी थी कि उस जमाने में मेरा अवतार नहीं हुआ वरना

व्यंग्य : अपने विधायक रखना जरा संभाल के

समकालीन भारतीय राजनीति में दृश्य चकाचक नजर आ रहे हैं। कोई एक तरफ विधायकों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कोई किसी और के विधायकों पर डोरे डाल रहे

व्यंग्य : कर्नाटक मॉडल- कुर्सी प्राप्ति का फसली फार्मूला

आपके हमारे वोट देने मात्र से किसी की सरकार बन जाएगी तो यह वोटर देवता जी आपका सिर्फ भ्रम है। चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें लेकर कोई चुनावी दल आगे

व्यंग्य : नमस्ते जी कोरोना तुझे नहीं समझते जी!

एक बात तो साफ है कि कोरोना वायरस से अब डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह कोरोना हम भारतीयों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा, क्योंकि यह विदेशी वायरस

फांसी का फंदा अब स्वयं फांसी पर !

आसमान में काले बादल मंडरा रहे थे। वहां पर गिद्धों की एक टोली इस पर पूरी नजर लगाई हुई दिखी। सिस्टम की नाकामी की धूल के गुबार उठ रहे थे।

व्यंग्य : प्री होली बैंच मार्क कार्यक्रम!

प्यारे दोस्तो! सामने होली का त्यौहार दिखाई पड़ रहा है। इस मौके पर हमें अच्छी खासी तैयारी करनी पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि यह त्योहारों की

व्यंग्य : बेगम ने पाल रखे हैं दो-दो करारे जिन्न

जिन्न गायब हो सकते हैं। उड़ सकते हैं, किसी भी जीव, जंतु, महल, किला, इंसान या वस्तु का रूप धारण कर सकते है। जिन्न किसी भी स्थान तक मात्र अपनी

इमरान के आगे बीन बजाए बेचारी भैंस !

पाकिस्तान ने खोला भैंस बेचने का कारोबार! भैंस बेचारी स्वयं इमरान के आगे बीन बजा रही है पर इमरान कब समझ पाए हैं जी! वहां अब गधे पालने से गरीबी

‘साइबर यातना’ के प्रति बहुत सजग रहना होगा

डिजिटल दुनिया के इस दौर में हर काम ऑनलाइन होता है। सरकारें लोगों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहित करती हैं। बस, मेट्रो में सफर करें या हवाई जहाज से

भीड़ तैयार खड़ी है मुंडाने के लिए !

कबीर दास जी ने कहा कि बार-बार मूंडने से कोई भी व्यक्ति बैकुंठ नहीं जा सकता। अगर ऐसा होता तो भेड़ हर-बार बैकुंठ क्यों नहीं चली जाती? उसे तो हर

शिक्षा जगत में नई ऊर्जा- शिक्षा का परिधान ‘नो बैग डे’

शिक्षा किसी समाज में सदैव चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया है। शिक्षा का महत्व व्यक्ति के प्रत्येक पहलू को विकसित करके बालक का चारित्रिक निर्माण करना है। इसके द्वारा व्यक्ति की

(व्यंग्य ) : बीमा बालाओं की मार्केट बाजी !

“नमस्कार जी! आप जांगिड़ जी बोल रहे हैं!” “जी फिलहाल तो बोल रहा हूँ। मैंने बोलकर बोल ही दिया आखिर।” तब आवाज घनघनाई -“मैं कसाईबसाई बीमा कंपनी से बोल रही

व्यंग्य : भैंस माँगे कांँकड़े, सरकार माँगे आँकड़े

जब-जब सरकार को देखता हूँ तब-तब मुझे सरकार के बजाए भैंस दिखाई देती है। भैंस को देख लो या सरकार को देख लो। सरकार और भैंस समान है क्योंकि भैंस

व्यंग्य : यारों ये शूल चुभाओ कोई बेवकूफ आया है!

कर्ज लेकर महंगी शादी करना बहुत भारी समझदारी है। चमकदार बड़े-बड़े टेंट और 1 दिन के लिए बारात में ढेरों गाड़ियां लहराना गजब का साहस है! डीजे, ढोल, बैंड, ताशा

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