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Category: शाहिद नकवी

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आखिर गांधी परिवार क्यों नहीं रोक पाया सिंधिया को ?

राजनीति मे लगता है कि नैतिकता दल बदलते ही बदल जाती है और हालात किरदार को बदल देतें है।तभी तो विधान सभा चुनावों मे ये नारा,माफ करो महाराज,हमारा नेता शिवराज

मजहब की सीमाओं को तोड़ती ये मोहब्बत की होली

आज जब एक संकीर्ण सोच और कट्टर विचारों के जरिये देश की गंगा जमुनी तहजीब को चोट पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।अपना राष्ट्रवाद तुम्हारा राष्ट्रवाद पर बहस छिड़ी

बेलगाम भीड़तंत्र और देश की गंगा-जमुनी तहजीब

उत्तर-पूर्व दिल्ली के भजनपुरा स्थित चांद बाबा की जली हुयी मजार पर दोबारा हिंदू औरतों को सजदा करते देखकर यही लगता है कि सियासत और दंगाईयों की तमाम साज़िशों को

उत्तर से दक्षिण तक क्षेत्रीय दलों के टॉनिक

जीत के बाद दिल्लीवासियों को सपोर्ट के लिए आई लव यू कहने वाले केजरीवाल वैकल्पिक राजनीति का नारा दे कर मैदान मे उतरे थे।पांच साल के उनके काम ने दिल्ली

मोटापा, बीमारी नहीं बीमारियों का जनक

शाहिद नकवी मोटापा एक मेडिकल कंडीशन है,जिसमें शरीर पर वसा की परतें इतनी मात्रा में जम जाती हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाती हैं। आज दुनिया की

आकांक्षी भारत को महंगाई डायन का डर

जन्म से लेकर मृत्यु तक हर व्यक्ति की कुछ जरूरतें होती है जिसकी पूर्ति के लिए वह आजीवन मेहनत करता है। इनमे से कुछ आवश्यकताएं ऐसी भी होती है जिनकी

इलाहाबाद के रोशनबाग की आवाज, बोल के लब आजाद हैं तेरे

शाहिद नकवी प्रयागराज। दिल्ली के शाहीनबाग की तरह इलाहाबाद के रोशनबाग मे सीएए और एनआरसी के खिलाफ महिलाएं लगातार 23 वें दिन भी सत्याग्रह पर डटी हैं।’मंसूर अली पार्क मे

अब जनता की भी सुनिए सरकार

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट पेश करने वाली है। हर साल आने वाले बजट का नाम सुनते ही लोगों की आंखों में उम्मीद की किरण दिखने

अब जनता की उम्मादें पूरी करने की बारी

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट पेश करने वाली है। हर साल आने वाले बजट का नाम सुनते ही लोगों की आंखों में उम्मीद की किरण दिखने

मौनी पर मोक्ष के लिए संगम मे उमड़ा आस्था का सैलाब

तीर्थराज प्रयागराज को आस्था, विश्वास और संस्कृतियों का संगम भी कहा जाता है।हर साल संगम की रेती पर तम्बूओं का शानदार और विशाल शहर आबाद होता है।कुम्भ के बाद इस

देश के शाहीन बागों से मिथक तोड़ती मुस्लिम महिलाएं

महिलाएं आज देश मे राजनीति का व्याकरण लिख रही और समिकरण भी तय कर रही हैं।देश के शाहीनबागों ने इस मे मुस्लिम महिलाओं की भी भागेदारी तय कर दी है।प्रशासन

इलाहाबाद के रोशनबाग से भी महिलाओं की हुंकार

प्रयागराज का रोशनबाग अब देश का दूसरा शाहीनबाग बन गया है।यहां कोई अगुवा नही है फिर भी लगातार आवाज बुलंद हो रही है।ये आवाज और कोई नही पर्दानशीं औरतें बुलंद

अब भी ये सवाल खड़ा है कि देश मे बेटियां कैसे बचेगी

निर्भया को पिछले सात साल से इंसाफ का इंतजार है। तमाम कवायदों के बाद उम्मीद है कि अब 22 जनवरी को सुबह सात बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया

मांओं की सूनी गोद की दास्तां बयां करते मौत के ये आंकड़े

सवाल ये उठता है कि आखिर विश्व गुरू बनने की दहलीज पर खड़ा भारत यानी न्यू इंडिया भी कभी बिहार के मुजफ्फरपुर मे ,कभी यूपी के गोरखपुर मे,कभी राजकोट मे

भाजपा के भीतर और बाहर रंग बदलती सियासत

राजनीति के चौपड़ पर जब मोहरे पिटने लगते हैं तो सियासत रंग बदलने लगती है।कहीं कहीं बगावती स्वर भी सुनाई पड़ने लगते हैं।एक साल में पांच राज्यों में सत्ता गवांने

रोशन ख्वाबों और अधूरी उम्मीदों के साथ 2019 अलविदा

एक और साल बीत रहा है। साल 2019 कई अफसाने देकर कहीं गम तो कहीं खुशी के बहाने देकर, हमसे बिदा ले रहा हे। देश की आंखों ने जो ख़्वाब

झारखंड के नतीजे से क्या बदलेगी देश की सियासत

देश के किसी न किसी राज्य में लोकतंत्र का चुनावी उत्सव होता ही रहता है। लेकिन खनिज प्रदेश झारखंड के चुनाव को इस बार राष्ट्रीय फलक पर वह सुर्खी नहीं

हर सवाल जवाब तलाशती है भोपाल गैस त्रासदी

साल 1984 के दिसम्बर महीने की 2 और 3 तारिखों को बीते अब 35 वर्ष हो चुकें हैं। लेकिन उस स्याह और सर्द रात का खौफनाक मंजर आज भी लोगों

हर साल क्यों बढ़ती है प्याज के आंंसुओं की कीमत

पिछले कई साल से देखने मे आरहा है कि देश मे चुनाव नही हों तो भी प्याज रूलाता है।ये कभी उपभोक्ताओं को रूलाता है तो कभी इसको उगाने वाले किसानों

एक नये दौर और एक नये भारत की झलक

इतिहास मे ऐसे दिन बहुत कम आतें हैं जब एक अकेला दिन ऐसा इतिहास रच दे जिसका इंतजार सदियों से किया जा रहा हो।नवम्बर महीने की 9 तारीख ने भारतवासियों

दमघोंटू आबोहवा का जिम्मेदार कौन

दमघोंटू धुंध की चादर यानी जहरीली आबोहवा केवल दिल्ली और एनसीआर मे ही नही है,देश के दूसरे राज्यों के बड़े और मझोले शहरों मे भी खतरनाक स्तर पर है।लेकिन दिल्ली

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