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Category: सुरेश सौरभ

Total 8 Posts

मुर्दे का टोकन 

“अरे सर, यह तो मर गया।” “कैसे?’ ‘हार्ट प्रोब्लम थी।’ ‘ठीक है,कोरोना की फाइल में नाम डाल दो इसका।’ ‘यह तो गलत है सर!’ ‘अरे! यार तुम नहीं समझोगे। लाखों

रोटी (लघुकथा)

जुगनू की तरह टिमटिमा रहे दीपक की रोशनी में खाट पर खाना खाते रामू ने रोटी सेंक रही अपनी अम्मा से पूछा-अम्मा मेरा जन्म कब हुआ था। इतना सुनना था,

सिस्टम की सासें

वह अपने पति के गले से लग कर बड़े प्यार से बोली-हर सांस तुम्हारी है प्रियतम, उसका पति भी आत्मीयता से बोला-मेरी भी हर सांस तुम्हारी प्रिये! सुहागरात की, प्रथम

हास्य-व्यंग्य : नेहरू पैदा कर गये आक्सीजन की समस्या

अगर नेहरू जी आक्सीजन का प्लान्ट लगा गये होते, तो आज आक्सीजन के लिए जनता देश भर में त्राहि-त्राहि न कर रही होती। दरअसल आक्सीजन प्लान्ट लगाना तो गोडसे भी

विचारक (लघुकथा)

मेरे एक परिचय के अंकल जी पक्के बौद्धिस्ट और वामपंथी विचारक थे। मंच से उनके ओजस्वी भाषणों से मैं काफी प्रभावित था। समय-समय पर फोन से उनसे बात करके बहुत

सुरेश सौरभ की दो लघुकथाएं

किस्मत लॉकडाउन के चलते सारी दुकानें बंद चल रहीं थीं। उस थाने के पुलिस वालों को बहुत दिनों से जब मीट खाने को नहीं मिला, तब वह मीट खाने की

हास्य-व्यंग्य : चीन न जाने का सुख

आज से कुछ माह पूर्व मेरे एक मित्र मुझसे मिलने घर आए और कहा-अगर चीन जाना चाहो तो चले जाओ बड़ा अच्छा मौका है। वहां बहुत अच्छा वेतन मिलेगा। मेरे

हास्य-व्यंग्य : भूरा छूट गया

अचानक गांव में दिखाई पड़े संगीन अपराधी भूरा से मैंने पूछा-और भैया क्या हाल-चाल है। पैरोल पर कब छूट कर आए। वह बत्तीसी निकाल कर बोला- अरे! पैरोल पर नहीं

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