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Category: डॉ नीलम महेंद्र

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सरकार और प्रशासन की नाकामी है दिल्ली दंगे

शाहीनबाग़ संयोग या प्रयोग हो सकता है लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान देश की राजधानी में होने वाले दंगे संयोग कतई नहीं हो सकते। अब तक इन

क्या मुस्लिम महिलाएँ और बच्चे अब विपक्ष का नया हथियार हैं?

सीएए को कानून बने एक माह से ऊपर हो चुका है लेकिन विपक्ष द्वारा इसका विरोध अनवरत जारी है। बल्कि गुजरते समय के साथ विपक्ष का यह विरोध “विरोध” की

व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होता है दान

जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं ‘ दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान, अर्थात देने का भाव, अर्पण करने की निष्काम भावना। भारत वो

आपने स्वार्थ के लिये जनता को मुर्ख न बनाएं

जब देश के पढ़े –लिखे बुद्धिजीवी लोग जिनमें कुछ डॉक्टर वकील, शिक्षक,प्रोफेसर, स्कूल कॉलेज के डायरेक्टर, पत्रकार, संपादक जैसे लोग सी ए ए और एन आर सी में अंतर समझे

जनमानस में जानकारी का आभाव बना विपक्ष का हथियार

नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद से ही देश के कुछ हिस्सों में इस कानून के विरोध के नाम पर जो हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं वो अब गंभीर चिंता

राजनैतिक स्वार्थों की भेंट चढ़ता असम

राज्यसभा से नागरीकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद से ही लगातार असम में इसका विरोध हो रहा है। इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि अब पाकिस्तान

क्या अब राजनीति की परिभाषा बदल गई ?

यह बात सही है कि राजनीति में अप्रत्याशित और असंभव कुछ नहीं होता, स्थाई दोस्ती या दुश्मनी जैसी कोई चीज़ नहीं होती हाँ लेकिन विचारधारा या फिर पार्टी लाइन जैसी

समाज महिलाओं की प्रतिभा को उचित सम्मान दे

समय निरंतर बदलता रहता है, उसके साथ समाज भी बदलता है और सभ्यता भी विकसित होती है।लेकिन समय की इस यात्रा में अगर उस समाज की सोच नहीं बदलती तो

प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

“आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जगता है और ना ही सोता है।” आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के

केवल जन आन्दोलन से प्लास्टिक मुक्ति अधूरी कोशिश होगी

वैसे तो विज्ञान के सहारे मनुष्य ने पाषाण युग से लेकर आज तक मानव जीवन सरल और सुगम करने के लिए एक बहुत लंबा सफर तय किया है। इस दौरान

कहीं आने वाली मंदी का कारण हम तो नहीं बनने वाले ?

इस समय भारत ही नहीं पूरे विश्व में आर्थिक मंदी की आहट की चर्चा है। भारत के विषय में अगर बात करें तो हाल ही में जारी कुछ आंकड़ों के

आखिर साध्वी से परहेज़ क्यों है ?

साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित करते ही देश में जैसे एक राजनैतिक भूचाल आता है जिसका कंपन कश्मीर तक महसूस किया जाता है। भाजपा के

जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे, उन पर अपनी पत्नी की हत्या का

चुनाव के समय मतदाता को जागरूक करने में लगे राजनैतिक दल

विजय न्यूज़ ब्यूरो देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को “जागरूक” करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में खास

कविता : नवरात्र में माँ फिर आईं हैं

नवरात्र में माँ फिर आईं हैं प्रकृति ने भी धरती सजाई है शाखों पर नए पत्ते शर्मा रहे हैं पेड़ों पर नए पुष्प इठला रहे है खेतों में नई फसलें

कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या

वैश्विक राजनीति में भारत की बदलती भूमिका

ये वो नया भारत है जो पुराने मिथक तोड़ रहा है, ये वो भारत है जो नई परिभाषाएं गढ़ रहा है, ये वो भारत है जो आत्मरक्षा में जवाब दे

दिन ब दिन टूटते रिश्ते

हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर जापान के नियमों के मुताबिक, उन्हें राजघराने

आश्रय स्थल में ही आसरा नहीं तो फिर आसरा कहाँ साहेब

ये कैसी तरक्की है यह कैसा विकास है जहाँ इंसानियत हो रही हर घड़ी शर्मसार है,? ये कैसा दौर है ये कैसा शहर है जहाँ बेटियों पर भी बुरी नजर

 नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियाँ

24 अप्रैल 2017 को जब “नक्सली हमले में देश के 25 जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे” यह वाक्य देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, तो

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