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Category: ललित गर्ग

Total 124 Posts

ओ-टू मिशन: शांति एवं स्वास्थ्य की संजीवनी

आज पूरी मानवजाति एक बड़ी एवं भयावह कोरोना वायरस महामारी के कहर से जूझ रही है और दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी चिंताओं से रू-ब-रू है। लोगों को पर्यावरण की अहमियत,

कोरोना को परास्त करने हेतु कठोर होना होगा

कोरोना संक्रमण के तीन लाख से अधिक प्रतिदिन पीड़ितों की भयावहता भारतीयों को न केवल डरा रही है, बल्कि पीड़ित भी कर रही है। कोरोना के शिकार लोगों की तादाद

कोरोना महामारी में बदले जीवन के अर्थ को समझे

भारतीय चिंतन में उन लोगों को ही राक्षस, असुर या दैत्य कहा गया है जो समाज में तरह-तरह से अशांति फैलाते हैं। असल में इस तरह की दानवी सोच वाले

प्रसन्न जीवन की बुनियाद पर सरकारी नीतियां बने

हाल ही में पंजाब विश्वविद्यालय की ओर से देश के 34 शहरों में खुशी का स्तर नापने  के लिये एक महत्वपूर्ण सर्वे कराया गया, अब तक इस तरह के सर्वे

चैतन्य महाप्रभु की कृष्णलीलाएं अद्भुत हैं

चैतन्य महाप्रभु जयन्ती-28 मार्च 2021 पर विशेष चैतन्य महाप्रभु भारतीय संत परम्परा के वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं,

दत्तात्रेय होसबोले को संघ की पहरेदारी का दायित्व

आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए भारतीयता को मजबूती देने की फिजाएं बन रही है। न केवल भारतीयता बल्कि हिन्दुत्व को भी नया आयाम एवं नयी ऊर्जा मिल रही है।

होली खुशियों को मिल-बांटने का अपूर्व अवसर

होली- 28 मार्च, 2021 पर विशेष होली प्रेम, आपसी सद्भाव और मस्ती के रंगों में सराबोर हो जाने का अनूठा त्यौहार है। कोरोना महामारी के कारण इस त्यौहार के रंग

भारत में खुशहाली की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस- 20 मार्च, 2021 हर दिन खुश रहने, प्रसन्नता जाहिर करने एवं जीवन में खुशियों का स्वागत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस 20 मार्च को मनाया जाता

कोरोना का खतरा-नये उपाय एवं सजगता जरूरी

कोरोना का खतरा फिर डरा रहा है, कोरोना पीड़ितों की संख्या फिर बढ़ने लगी है, इन बढ़ती कोरोना पीड़ितों की संख्या से केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चिन्तित होने से

नये भारत के जन्म का सुखद संकेत

आजादी की पचहरवीं वर्षगांठ मनाने की ओर अग्रसर होते हुए नया भारत बनाने, भारत को नये सन्दर्भों के साथ संगठित करने, राष्ट्रीय एकता को बल देने की चर्चाएं सुनाई दे

ममता की चोटों के बहाने लोकतंत्र को घायल न करें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घायल हुईं, चुनावी महासंग्राम में यह घटना और इस घटना पर जिस तरह का माहौल बना, वह पूरा प्रकरण चिंताजनक है, लोकतंत्र की मर्यादाओं

आरक्षण पर अदालती मंथन से जुड़ी उम्मीदें

सरकारी नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में है। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और इस सुनवाई

सृजन एवं समभाव के स्वामी हैं शिव

महाशिवरात्रि-11 मार्च, 2021 पर विशेष सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है महाशिवरात्रि। इस

मां सीता के बिना अधूरे हैं प्रभु श्रीराम

पौराणिक काल में ऐसी कई महिलाएं हुई हैं जिन्हें हम आदर्श और उत्तम चरित्र की महिलाएं मानते हैं, जो भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। लेकिन उनमें से सर्वोत्तम हैं

नये भारत के लिये नया इंसान कौन बनायेगा?

”अणुव्रत-मिशन“ की 72 वर्षों की एक ‘युग यात्रा’ नैतिक प्रतिष्ठा का एक अभियान है। परिवर्तन जीवन का शाश्वत नियम है, प्रगति एवं विकास का यह सशक्त माध्यम है। जीवन का

अणुव्रत सूर्योदय है नये भारत का

अणुव्रत आंदोलन स्थापना दिवस-1 मार्च, 2021 पर विशेष नये युग के निर्माण और जन चेतना में नैतिक क्रांति के अभिनव एवं अनूठे मिशन के रूप में अणुव्रत आन्दोलन न केवल

बंगाल में सक्षम नेतृत्व की सार्थक तलाश जरूरी

आज पश्चिम बंगाल के चुनाव का मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा एवं चिन्ता की प्राथमिकता लिये हुए है। संभवतः आजादी के बाद यह पहला चुनाव हैं जो इतना चर्चित, आक्रामक होकर राष्ट्रीय

किसान आन्दोलन पर देशद्रोह एवं अशांति के धब्बे?

सर्वोच्च न्यायालय ने जन-प्रदर्शनों, आन्दोलनों, बन्द, रास्ता जाम, रेल रोकों जैसी स्थितियों के बारे में जो ताजा फैसला किया है, उस पर लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से गंभीर चिन्तन होना

सिकुड़ती प्रकृति, वन्यजीव एवं पक्षियों की दुनिया

मनुष्य इस दुनिया का एक हिस्सा है या उसका स्वामी? वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है क्योंकि मनुष्य के कार्य-व्यवहार से ऐसा मालूम होने लगा

तृणमूल कांग्रेस की उल्टी गिनती शुरु

पूरे राष्ट्र की दृष्टि पश्चिम बंगाल पर केन्द्रित है। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के आग्र्रह, दुराग्रह एवं पूर्वाग्रह के कारण उसका संकट बढ़ता ही जा रहा है। उसकी

शुद्ध साधुता की सफेदी में सिमटा विलक्षण व्यक्तित्व

इक्कीसवीं सदी तो महिलाओं के वर्चस्व की सदी मानी जाती है। उन्होंने विभिन्न दिशाओं में सृजन की ऋचाएं लिखी हैं, नया इतिहास रचा है। अपनी योग्यता और क्षमता से स्वयं

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