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Category: निर्मल रानी

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बंगाल चुनाव और ‘महिला सशक्तीकरण’ के दावे ?

वैसे तो देश के असम ,केरल,पुदुचेरी,तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल जैसे पांच राज्यों में ताज़ातरीन विधान सभा चुनाव संपन्न हुए। परन्तु पूरे देश में सबसे अधिक चर्चित चुनाव पश्चिम बंगाल के चुनाव ही रहे।

गांवों को चमकाने की क़वायद या लूट खसोट की ?

बिहार के सन्दर्भ में पिछले दिनों समाचार पत्रों में एक ख़बर इस शीर्षक के साथ प्रकाशित हुई कि ‘अब बिहार के गांव भी बनेंगे वी आई पी’। बिहार के पंचायती

तो क्या सरकार निठल्ले और दलाल किसानों से वार्ता करती रही है ?

 विश्व इतिहास का सबसे बड़ा व सबसे लंबा चलने वाले  किसान आंदोलन का दिनों दिन विस्तार होता जा रहा है। सत्ता,सत्ता समर्थक नेताओं व सत्ता के भोंपू बन चुके मीडिया

स्वच्छता अभियान :बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का…

2014 में प्रधानमंत्री पद पर विराजमान होने के बाद नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत बड़े जोश व उत्साह से की थी। महात्मागांधी के चित्रों व

समाज को कहां ले जाएगी ऐसी हिंसक सोच ? 

भारतीय समाज में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हिंसक गतिविधियां अत्यंत चिंता का विषय हैं। इन पर नियंत्रण पाने के लिए समाज के ही ज़िम्मेदार लोगों विशेषकर हमारे मार्गदर्शकों का

ज़मीर फ़रोश पत्रकारिता पर एक और प्रहार

स्वयं को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताने वाला मीडिया विशेषकर टेलीवीज़न मीडिया जहाँ गत कुछ वर्षों से सत्ता के समक्ष ‘शाष्टांग दंडवत’ की मुद्रा में आकर भारतीय इतिहास के सबसे शर्मनाक

सत्ता का विभाजनकारी एजेण्डा अर्थात आग से खेलने का प्रयास

केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध अब आंदोलन के साथ साथ सत्ता व किसानों के बीच हिंसक टकराव की ओर बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों मुज़फ़्फ़रनगर के

मोदी उवाच -ऐसी वाणी  बोलिए 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिवस राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए अपने ‘अमूल्य’ विचार व्यक्त किये। आशा की जा रही थी कि लगभग ढाई महीने से

यौन शोषण के नित्य नए तर्क व परिभाषायें

 भारतीय महिलायें दिन प्रतिदिन अपने कौशल व साहस का परिचय कराती रहती हैं। कभी अंतरिक्ष में भारतीय ध्वज लहराकर,कभी विश्व के सबसे लंबे व ख़तरनाक वायुमार्ग पर विमान उड़ाकर, कभी

चंडीगढ़ में भव्य नवनिर्मित ‘दरबार भवन’ लोकार्पित

  भारतवर्ष को धर्म प्रधान तथा विभिन्न धार्मिक रीति रिवाजों का अनुसरण करने वाले देश के रूप में भी चिन्हित किया जाता है। यहाँ विभिन्न धर्मों के एक से बढ़कर एक

भारतीय इतिहास का अनूठा किसान आंदोलन

भारतीय किसानों द्वारा नए कृषि अध्यादेशों को केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए जाने की मांग को लेकर चलाया जाने वाला आंदोलन कंपकपाती ठण्ड व शीत ऋतु की बारिश झेलता हुआ

झूठ सलीक़े से बोलोगे तो सच्चे कहलाओगे

केंद्र सरकार द्वारा जब से नये कृषि क़ानून बनाए गए हैं तभी से देश के अधिकांश किसान संगठन इन क़ानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं।  26-27-28 नवंबर को किसानों

जेब अगर हो ख़ाली, तो कैसा छठ कैसी दीवाली ?

 देश का सबसे बड़ा व सबसे पवित्र त्यौहार दीपावली आगामी 14 नवंबर को मनाया जा रहा है। दीपावली की गिनती उस सर्वप्रमुख त्यौहार में होती है जो देश की अर्थव्यवस्था

अब राजनैतिक दल भी हुए ‘विदेशी’ व  ‘घुसपैठिये’ ?

राजनैतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो हमेशा से ही करते रहे हैं। अपने को जनहितैषी बताना तथा मतदातों को यह समझाना कि जनता व देश का हित केवल

अवरुद्ध हैं नाली-नाले,डूबते मकान हैं,क्या यही 21वीं सदी का हिंदुस्तान है ? 

वर्तमान सरकारों द्वारा किये जाने वाले दावों और ढिंढोरों पर यदि विश्वास करें तो एक बार तो ऐसा लगेगा गोया देश को स्वतंत्रता ही अभी चंद वर्षों पूर्व ही मिली

‘कोरोना की भेंट’ चढ़ गया विश्व के सबसे ऊँचे रावण का पुतला 

 कोरोना महामारी, शताब्दी की  सबसे बड़ी एवं प्रलयकारी समस्या के रूप में पूरे विश्व में उथल पुथल मचाए हुए है।आर्थिक,राजनैतिक,सामाजिक,धार्मिक,साहित्यिक, खेल कूद,मनोरंजन आदि कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसे

महंगा तेल ,ये कैसा खेल ?

देश के इतिहास में तेल को लेकर कई कीर्तिमान नए स्थापित हुए हैं। एक तो यह कि डीज़ल की क़ीमत कभी भी पेट्रोल से अधिक नहीं हुई परन्तु पिछले दिनों

बिहार :क्या दो क़दम आगे तीन क़दम पीछे की राह पर ?

आधारभूत सुविधाओं के नाम पर देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाने वाला राज्य, बिहार पिछले एक दशक से स्वयं को ‘बीमारू’ राज्यों की सूची से बाहर निकालने की

मानवता के दुश्मन हैं ‘लॉकडाउन’ की धज्जियां उड़ाने वाले

इतिहास में पहली बार कोरोना वायरस के चलते विश्व के सामने सबसे बड़ा संकट छाया हुआ है। जब तक इस लाईलाज महामारी का कोई सटीक ईलाज नहीं निकल आता तब

कोविड-19 की भयावहता और ग़लतफ़हमियों पाले लोग

कोरोना वायरस अर्थात कोविड-19 से होने वाली भारी विश्वव्यापी जनहानि के अतिरिक्त इसकी की भयावहता से जुड़े कई ऐसे समाचार आने शुरू हो चुके हैं जिनसे इस संदेह को बल

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