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Category: निर्मल रानी

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अब राजनैतिक दल भी हुए ‘विदेशी’ व  ‘घुसपैठिये’ ?

राजनैतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो हमेशा से ही करते रहे हैं। अपने को जनहितैषी बताना तथा मतदातों को यह समझाना कि जनता व देश का हित केवल

अवरुद्ध हैं नाली-नाले,डूबते मकान हैं,क्या यही 21वीं सदी का हिंदुस्तान है ? 

वर्तमान सरकारों द्वारा किये जाने वाले दावों और ढिंढोरों पर यदि विश्वास करें तो एक बार तो ऐसा लगेगा गोया देश को स्वतंत्रता ही अभी चंद वर्षों पूर्व ही मिली

‘कोरोना की भेंट’ चढ़ गया विश्व के सबसे ऊँचे रावण का पुतला 

 कोरोना महामारी, शताब्दी की  सबसे बड़ी एवं प्रलयकारी समस्या के रूप में पूरे विश्व में उथल पुथल मचाए हुए है।आर्थिक,राजनैतिक,सामाजिक,धार्मिक,साहित्यिक, खेल कूद,मनोरंजन आदि कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसे

महंगा तेल ,ये कैसा खेल ?

देश के इतिहास में तेल को लेकर कई कीर्तिमान नए स्थापित हुए हैं। एक तो यह कि डीज़ल की क़ीमत कभी भी पेट्रोल से अधिक नहीं हुई परन्तु पिछले दिनों

बिहार :क्या दो क़दम आगे तीन क़दम पीछे की राह पर ?

आधारभूत सुविधाओं के नाम पर देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाने वाला राज्य, बिहार पिछले एक दशक से स्वयं को ‘बीमारू’ राज्यों की सूची से बाहर निकालने की

मानवता के दुश्मन हैं ‘लॉकडाउन’ की धज्जियां उड़ाने वाले

इतिहास में पहली बार कोरोना वायरस के चलते विश्व के सामने सबसे बड़ा संकट छाया हुआ है। जब तक इस लाईलाज महामारी का कोई सटीक ईलाज नहीं निकल आता तब

कोविड-19 की भयावहता और ग़लतफ़हमियों पाले लोग

कोरोना वायरस अर्थात कोविड-19 से होने वाली भारी विश्वव्यापी जनहानि के अतिरिक्त इसकी की भयावहता से जुड़े कई ऐसे समाचार आने शुरू हो चुके हैं जिनसे इस संदेह को बल

फांसी पर मानवाधिकार संगठनों के विलाप का औचित्य ?

जब भी हमारे देश भारतवर्ष में अथवा मृत्यु दंड देने वाले किसी भी देश में किसी व्यक्तिअपराधी को मृत्यु दंड दिए जाने की ख़बर सुनाई देती है उसी ख़बर के

क्रूरता से हारती मानवता ?

भारतीय इतिहास वैसे तो शौर्य और करुणा के अनेकानेक इतहासों से पटा पड़ा है। ऐसी सैकड़ों गाथाएं हैं जो हमें यह बताती हैं की किस तरह सत्य की राह पर

वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं, रुतबा ज़रूरी

कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गत लगभग एक वर्ष तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ से चले आ रहे मतभेदों व विवादों को बहाना बनाते हुए आख़िरकार कांग्रेस पार्टी

जिनपे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे

राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों बड़े पैमाने पर हुई साम्प्रदायिक हिंसा की गूँज पिछले दिनों देश की लोकसभा व राज्य सभा में भी सुनाई दी। विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा

इस घर को आग लग गयी घर के चिराग़ से?

देश की राजधानी दिल्ली आख़िरकार अशांत हो ही गयी। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाक़े हिंसा की भेंट चढ़ गए। इस साम्प्रदायिक हिंसा में अब तक भारत माता के ही 13 सपूत

राजनीति की नई इबारत लिखने की ओर बिहार

महात्मा बुध से लेकर महात्मा गाँधी जैसे महापुरुषों की कर्मस्थली रहा देश का प्राचीन समय का सबसे समृद्ध राज्य बिहार गत 15 वर्षों में हुए अनेक मूलभूत विकास कार्यों के

मिलावटखोरी के इस दौर में खाएं क्या न पिये क्या ?

हमारा देश विशेषकर राजनैतिक,आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में इस समय संकट व अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहा है इस का उल्लेख अनेक आलोचकों व संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा

अपने नौनिहाल को योग्य बनाइये धर्मोन्मादी नहीं

इन दिनों पूरे देश में एक अजीब क़िस्म का उन्माद छाया हुआ दिखाई दे रहा है। जिन युवाओं पर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने का ज़िम्मा है देश के वही

‘मार्ग दर्शकों ‘ की बदजुबानी की इन्तेहा ?

कभी विश्व को मार्ग दर्शन देने जैसा स्वर्णिम अतीत रखने वाले हमारे देश में इन दिनों कथित ‘मार्ग दर्शकों ‘ द्वारा ही देश व भारतीय समाज को विभाजित करने के

चंडीगढ़ को पहचान देता ‘सूफ़ी आस्तान-ए-रामदरबार’

1947 में हुए भारत-पाक विभाजन के पश्चात् पंजाब के पश्चिमी हिस्से के पाकिस्तान में चले जाने तथा पश्चिमी पंजाब से पूर्वी पंजाब अर्थात भारत की तरफ़ आने वाले हिंदू व

देश की दयनीय स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की प्राथमिकताएं

अभी देश गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई उस त्रासदी को भूला नहीं है जबकि वर्ष 2017 में इसी अस्पताल में इंसेफ़ेलाइटिस की बीमारी की वजह से अगस्त

’75 पार’ के बाद ’65 पार’ का नारा भी हुआ धराशायी

देश के सभी राज्यों में भगवा परचम लहराने की लालसा पाले भारतीय जनता पार्टी को पिछले दिनों उस समय एक और बड़ा झटका लगा जब भाजपा शासित एक और राज्य,

जनाक्रोश के मध्य राजनेताओं के विवादित बोल

भारतीय संसद में पिछले दिनों जब से नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया गया और उसके बाद इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित करवाकर इसे क़ानून का रूप

संकीर्णता नहीं उदारवाद है भारत की पहचान

नागरिकता संशोधन विधेयक आख़िरकार लोकसभा के बाद राज्य सभा में भी पारित हो गया। इस विधेयक के समर्थन तथा विरोध में संसद के दोनों सदनों में ज़ोरदार बहस हुई। राज्यसभा

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