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Category: प्रभुनाथ शुक्ल

Total 56 Posts

‘बलम चलाओ गुलेल न लगाओ गुलाल’

(होली पर विशेष व्यंग आलेख) अबकी अपुन की होली का सेंसेक्स धड़ाम है। बेचारी पहले ही भंग पीकर औंधे पड़ी है। क्योंकि पूरी दुनिया में मंदी और बंदी छायी है।

मेरे ‘फागुन’ की अल्हड़ता कहां खो गई ?

माघ अलविदा हो चला है। मौसम का मिजाज फागुनी हो चला है। जवान ठंड अब बुढ़ी हो गई है। हल्की पछुवा की गलन सुबह – शाम जिस्म में चुभन और

अमेरिका भी हुआ हिंदी का मुरीद

भारत और अमेरिकी संबंधों में गुजरात का मोटेरा स्टेडियम नई इबादत लिखेगा। राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली यात्रा पर भारत आए दुनिया के सबसे शक्तिशाली शख्सियत डोनाल्ड ट्रम्प बेहद

कांग्रेस में खत्म होता आंतरिक लोकतंत्र

कांग्रेस में आतंरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। जिसकी वजह से पार्टी में टकराहट और कड़वाहट सतह पर उभर आती है। कांग्रेस के पास कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां

मुम्बई बोले तो बिंदास , चलेगी अख्खी रात !

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने मुम्बई को और जिंदादिल बनाने के लिए ‘नाइट लाइफ’ की शुरुवात की है यानी ‘आमची मुम्बई , आमची नाइट लाइफ’। मुम्बई वैसे भी दिन- रात

पुस्तक समीक्षा : बैंकिंग खामियों का कौटिल्य शास्त्र हैं ‘एनपीए एक लाइज बीमारी नहीं’

अर्थव्यस्था में बैंकिंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। दूसरे शब्दों में सीधे और सरल तरीके से कहा जाय तो बैंक हमारी अर्थव्यस्था की रीढ़ हैं। अर्थव्यवस्था की खराब सेहत के

दक्षिण – वाम के झगड़े में गाँधी- नेहरू और पटेल का विभाजन ?

संविधान के मूल में अभिव्यक्ति की आजादी को पूरी तवज्जों दी गई है। सवाल तब उठता है जब विचारों की आजादी हाथ में पत्थर उठा ले। बेगुनाह लोगों की माब

व्यंग : खुदाई में अपन का डिक्टेंशन

खुदाई हमारी संस्कार में रची बसी है। हमारे पुरखों की यह विरासत रही है। खुदाई की वजह से हमने ऐतिहासिक सभ्यताएं हासिल की हैं, जिनका महत्व हमारी इतिहास की मोटी-मोटी

भाजपा की खींसकती ज़मीन, राज्यों में गंवाती सत्ता !

लोकतंत्र में जनता और उसके जनादेश का नजरिया कभी स्थाई नहीं होता। सरकारें अगर जनता के विश्वास पर खरी नहीं उतरती तो उन्हें अपनी सत्ता गंवानी पड़ती है। ऐसी स्थिति

नागरिकता बिल पर क्यों डरा है मुसलमान!

कैब पर भड़की हिंसा ने राजधानी दिल्ली के साथ दूसरे राज्यों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। यह कानून-व्यस्था के लिए बेहद चिंता का सवाल है। नागरिका बिल

नागरिता बिल पर सरकार की नैतिक जीत

नागरिता संशोधन बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बड़े बहुमत से पास हो गया। मुस्लिम अधिकारों की आड़ में बिल के खिलाफ महौल खड़ा करने वाला प्रतिपक्ष पूरी तरह

अल्पसंख्यकों पर चीन की दमनकारी नीति

पाकिस्तान दुनिया में मुस्लिम हिमायती होने का दंभ भरता है। लेकिन आंखमूंद पर चीन पर भरोसा करने वाला पाकिस्तान चीन में अल्पसंख्यक समुदाय पर होने वाले दमन पर मुंहबंद रखता

झुकेगी भाजपा या जीतेगी शिवसेना की जिद ?

महाराष्ट्र में मातोश्री क्या गठबंधन की राजनीति से इतर कोई नया फ़ार्मूला गढ़ेगी। भाजपा-शिवसेना की क्या तीन दशक पुरानी दोस्ती बिखर जाएगी। भाजपा-शिवसेना क्या तीसरे विकल्प की तरफ अपना कदम बढ़ाएंगे।

पश्चिम बंगाल में विलुप्त होती विचारों की राजनीति

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा और रक्तपात पुरातन संस्कृति रही है। इस तरह की हिंसायें क्यों होती हैं और कौन कराता है। हिंसा के पीछे मकशद क्या होता यह

पर्यावरण और विकास में संतुलन जरूरी

आदिवासी इलाकों के साथ दूसरे क्षेत्रों में जल, जंगल और जमींन बचाने का सरकारों का नजरिया कितना सकारात्मक है यह कहना मुश्किल है। विकास और पर्यावरण संरक्षण पर सरकारों की

काशी में अजन्मी बेटियों का तर्पण

महादेव की पुण्य नगरी काशी से पितृपक्ष में सकारात्मक खबर आयी है। सामाजिक संस्था आगमन ने दशाश्वमेध गंगा घाट पर सोमवार को यानी मातृनवमी के दिन उन अजन्मी बेटियों के

प्रभुनाथ शुक्ल की तीन कविताएं

कविता (एक) शीर्षक ” एल्बम” जिंदगी! जब थक और ठहर सी जाती है वेदनाएं जब लहर सी बन जाती हैं उम्मीदें जब बिखर सी जाती है और दर्द जब बेपनाह

पारिवारिक कहानी : ” बंटवारा”

जगेश बाबू का कभी अपना जलवा था। रौबिले और गठिले जिस्म पर सफेद कुर्ता-धोती मारवाड़ी पगड़ी खूब फबती। हाथ में छड़ी और मुंह में पान की गिलौरी दबाए ताव से

व्यंग्य : हे ! कागदेवः पितृपक्षे नमस्त्तुभ्यम्

हे! कागदेव। पंक्षी योनी के चार्तुय श्रेष्ठ। कलयुग के पितृदेव। हम आपकी श्रेष्ठता को नमन करते हैं। हम उस उदार और समदर्शी सृष्टि का भी अभिनंदन करते हैं जिसने आपको

पुस्तक समीक्षा : नारी संघर्ष का आइना है ” देहरी के अक्षांश पर”

कविता संग्रहः देहरी के अक्षांश पर विधि प्रकाशन, जयपुर मूल्य 120 रुपये लेखिकाः डा. मोनिका शर्मा स्त्री का संपूर्ण जीवन एक बिखरा हुआ पन्ना है जिसे एक किताब में नहीं

कश्मीरी नेताओं की नजरबंदी कितनी जायज ?

जम्मू-कश्मीर पर सरकार का निर्णय दृढ़ है फिलहाल उसमें कोई बदलाव होने वाला नहीं है। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यह स्थिति और साफ कर दिया