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Category: प्रभुनाथ शुक्ल

Total 69 Posts

‘हम पेड़ों को काटते हैं, वे रोज लगाते हैं’

पर्यावरण और उसकी संरक्षा हमारे लिए बड़ी चुनौती है। पर्यावरण को लेकर पूरी दुनिया अति संवेदनशील है, लेकिन वास्तविक जीवन में उसका असर बेहद कम दिख रहा है। मानव प्रकृति

टाँग खींचना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है !

टाँगे हैं टाँगों का क्या, ऐसा नहीं है जनाब। टाँगों का अपना महत्व है। हमारे समाज में उससे भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका टाँग खींचने वालों और टाँग अड़ानेवालों की है।

लौटा दो विष्णु की जिंदगी के बीस साल…?

लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी की न्याय की उम्मीद क्या खत्म होती दिखती है। व्यक्ति के संविधानिक और कानूनी अधिकार क्या संरक्षित नहीं रह गए हैं। कानून और संविधान की

साबरमती में आयशा नहीं डूब मरी इंसानियत

हेलो, अस्सलाम वालेकुम। मेरा नाम है आयशा आरिफ खान। मैं जो कुछ भी करने जा रही हूं, अपनी मर्जी से करना चाहती हूं। किसी के जोर, दबाव में नहीं। ये

स्त्री और अस्तित्व

मुँह अँधेरे उठती है वह बुहारती है आँगन माजती है वर्तन बाबू को देती है दवाई और माँ की गाँछती है चोटी बच्चों का तैयार करती है स्कूल बैग और

‘अभिव्यक्ति’ को सलाखें नहीं ‘आजादी’ चाहिए ?

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जलवायु एक्टिविस्ट दिशा रवि को एक लाख के निजी मुचलके पर चर्चित ‘टूलकिट’ मामले में तिहाड़ जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।

भारत के खिलाफ ‘टूलकिट’ है विदेशी साजिश ?

किसान आंदोलन की आड़ में क्या भारत में हिंसा फैलाने की साजिश रची गईं। क्या कनाडा स्थित खालिस्तानी संगठन से जुड़े लोग पंजाब में पुन: अपना अस्तित्व कायम करना चाहते

व्यंग्य आलेख : हम तो तेरी मोहब्बत में ‘यू-र्टन’ हो गए

भगवान ने ठंड और गरीबों की जोड़ी काफी शोध के बाद बनाई है। गरीबी को लेकर रोना आम है। लेकिन उनकी हस्ती है कि मिटती नहीं है। गरीबी मिटाने को

सियासत के ब्रांडिंग चेहरों का सदाबहार मौसम

पादुका यानी जूता संस्कृति हमारे संस्कार में बेहद गहरी पैठ बना चुका है। यह अतिशयोक्ति नहीँ होगी कि मानव के अभ्युदय के साथ ही सम्भवतः पादुकाओं का आविर्भाव हुआ होगा।

  ‘बहुमूल्य जीवन को आत्महत्या से बचाएं’

मानवीय जीवन में आत्महत्या एक असामान्य व्यवहार है।  जिसमें प्राणी स्वयं की हत्या करता है। पहले व्यक्ति में बार-बार आत्महत्या के विचार आते हैं, उसके बाद वह आत्महत्या कैसे किया

व्यंग : हे ! कागदेव आपकी श्रेष्ठता को नमन’

हे ! कलयुग के पितृदेव। हम आपकी श्रेष्ठता को नमन करते हैं। हम समदर्शी सृष्टि का भी अभिनंदन करते हैं जिसने आपको पखवारे भर के लिए श्रेष्ठ माना है। लेकिन

‘बलम चलाओ गुलेल न लगाओ गुलाल’

(होली पर विशेष व्यंग आलेख) अबकी अपुन की होली का सेंसेक्स धड़ाम है। बेचारी पहले ही भंग पीकर औंधे पड़ी है। क्योंकि पूरी दुनिया में मंदी और बंदी छायी है।

मेरे ‘फागुन’ की अल्हड़ता कहां खो गई ?

माघ अलविदा हो चला है। मौसम का मिजाज फागुनी हो चला है। जवान ठंड अब बुढ़ी हो गई है। हल्की पछुवा की गलन सुबह – शाम जिस्म में चुभन और

अमेरिका भी हुआ हिंदी का मुरीद

भारत और अमेरिकी संबंधों में गुजरात का मोटेरा स्टेडियम नई इबादत लिखेगा। राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली यात्रा पर भारत आए दुनिया के सबसे शक्तिशाली शख्सियत डोनाल्ड ट्रम्प बेहद

कांग्रेस में खत्म होता आंतरिक लोकतंत्र

कांग्रेस में आतंरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। जिसकी वजह से पार्टी में टकराहट और कड़वाहट सतह पर उभर आती है। कांग्रेस के पास कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां

मुम्बई बोले तो बिंदास , चलेगी अख्खी रात !

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने मुम्बई को और जिंदादिल बनाने के लिए ‘नाइट लाइफ’ की शुरुवात की है यानी ‘आमची मुम्बई , आमची नाइट लाइफ’। मुम्बई वैसे भी दिन- रात

पुस्तक समीक्षा : बैंकिंग खामियों का कौटिल्य शास्त्र हैं ‘एनपीए एक लाइज बीमारी नहीं’

अर्थव्यस्था में बैंकिंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। दूसरे शब्दों में सीधे और सरल तरीके से कहा जाय तो बैंक हमारी अर्थव्यस्था की रीढ़ हैं। अर्थव्यवस्था की खराब सेहत के

दक्षिण – वाम के झगड़े में गाँधी- नेहरू और पटेल का विभाजन ?

संविधान के मूल में अभिव्यक्ति की आजादी को पूरी तवज्जों दी गई है। सवाल तब उठता है जब विचारों की आजादी हाथ में पत्थर उठा ले। बेगुनाह लोगों की माब

व्यंग : खुदाई में अपन का डिक्टेंशन

खुदाई हमारी संस्कार में रची बसी है। हमारे पुरखों की यह विरासत रही है। खुदाई की वजह से हमने ऐतिहासिक सभ्यताएं हासिल की हैं, जिनका महत्व हमारी इतिहास की मोटी-मोटी

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