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Category: साहित्य

Total 779 Posts

लघुकथा – अम्बे माँ का जगराता

 हमेशा की तरह हाथ में कपड़ो से भरा हुआ पुराना बैग लिए राजू के पड़ोस की सरोज अम्मा उसके पास से जा रही थी।सरोज रोज के मुकाबले आज बहुत ही

विजयदशमी: दशानन का उभरा दर्द, ऐसे कौन जलाता है भाई…

शहर का एक बड़ा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल। रोजाना की तरह मरीजों की आवाजाही जारी थी। प्रसिद्ध ह्रदयरोग विशेषज्ञ डॉ.रामावतार रामभरोसे ओपीडी में रोजाना की तरह मरीजों को देखने में व्यस्त थे।

विचारक (लघुकथा)

मेरे एक परिचय के अंकल जी पक्के बौद्धिस्ट और वामपंथी विचारक थे। मंच से उनके ओजस्वी भाषणों से मैं काफी प्रभावित था। समय-समय पर फोन से उनसे बात करके बहुत

व्यंग : एजेंडा वही जो वोट दिलाए

वे पार्टी मुख्यालय में गए । उन्होंने गाड़ी को सीधे फव्वारे के नीचे स्नान करने के लिए खड़ा कर दिया । बाहर तेज गर्मी थी । अंदर एयर कंडीशनर में

सामयिक व्यंग्य: ‘ हरामखोर लड़की ‘ नहीं, ‘ बेईमान नॉटी गर्ल ‘ डिक्शनरी में वर्ड एड कर लीजिए जनाब…..

आप भी समझ रहे होंगे, यह कैसी शब्दावली है। ‘हरामखोर लड़की ‘ का मतलब ‘ बेईमान नॉटी’ गर्ल कब से होने लगा है। हमने तो सदा ‘हरामखोर’ यह शब्द गाली

व्यंग्य : सिंघम बनोगे या चीवींगम!

कुछ दिन पहले हैदराबाद में आई.पी.एस. प्रशिक्षण समाप्ति समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कहा कि पुलिस की वर्दी ऐसी है जिसे पहनते ही

कविता – इंतजार क्यों

जाने वाला चला गया, अब उसका इंतजार क्यों। उड़ गए पिंजरे से जो परिंदे, उनसे अब भी इतना प्यार क्यों।। रोशनी की चाहत की तूने, लेकिन घनघोर अंधेरा छा गया।

व्यंग : हे ! कागदेव आपकी श्रेष्ठता को नमन’

हे ! कलयुग के पितृदेव। हम आपकी श्रेष्ठता को नमन करते हैं। हम समदर्शी सृष्टि का भी अभिनंदन करते हैं जिसने आपको पखवारे भर के लिए श्रेष्ठ माना है। लेकिन

एक शाम अमृता प्रीतम के नाम, अल्फाजों के अफसाने , पुरस्कार

इक दिन इश्क आगे निकल जायेगा-: अंशुपाल अमृता डॉ शम्भू पंवार/ विजय न्यूज़ नेटवर्क। नई दिल्ली। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित सुप्रसिद्ध लेखिका, साहित्यकार व महान कवयित्री अमृता प्रीतम

मेरी अभिव्यक्ति

मानव जीवन संघर्षों की कहानी है, जिसमें प्रकृति की अहम भूमिका होती है। यह कोरोना काल मानव के कृत्यों के फलस्वरूप प्रकृति का प्रकोप है। प्रत्येक काल की अपनी विशेषता

खबरिया चैनल की जबरिया न्यूज़ें

न्यूज़ चैनल वाले भाई साहब को हम सब दर्शकों का घनघोर नमस्ते! एंकर भैनजी आप को साष्टांग प्रणाम! आप इन दिनों सुशांत केस को सुलझाने में रात-दिन लगे पड़े हैं।

बाल कविता: गणपति विसर्जन

प्यारे दादू , प्यारे दादू , जरा मुझको ये समझाओ। क्यों करते है , गणपति पूजा मुझको ये बतलाओ। क्यों विसर्जन करते गणपति,मुझको ये बतलाओ। ये क्या रहस्य है दादू

कविता : विनम्र श्रद्धांजलि

साथ चलता रहा सर्वदा बनाता गया वह कारवाँ देश सेवा को तत्पर छोड़ गया अपना निशाँ। बुझ गयी है लौ अब सदा-सदा के लिए तड़प उठा है भारतवर्ष भारत रत्न

बाल कविता – गणपति विसर्जन

प्यारे दादू , प्यारे दादू , जरा मुझको ये समझाओ। क्यों करते है , गणपति पूजा मुझको ये बतलाओ। क्यों विसर्जन करते गणपति,मुझको ये बतलाओ। ये क्या रहस्य है दादू

21वीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार

तेलंगाना से डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ का चयन प्रलेक प्रकाशन समूह, मुम्बई, महाराष्ट्र ने 21वीं सदी के 101 श्रेष्ठ व्यंग्यकार विषयक मेगा योजना इस जुलाई में प्लान की थी, जिसमें देश और विदेश के

कविता: हमारे आर्दश की पुण्यतिथि

समर्पण का उत्कृष्ठ उदाहरण जिसने देश को सिखाया था हर पल देश तरक्कीे के लिए ही उन्होने सेवा मार्ग दिखाया था।। जिसके कायल थे उनके विरोधी आचरण और वाणीयों में

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