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Category: साहित्य

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कविता : छब्बीस जनवरी हैं आई

मन पटल पर बनी सलोनी. सुंदर सी छाया। सुख  समृद्धि नव जागृति ले. छब्बीस जनवरी आया। दुखी न कोई. मस्त सभी. लिये तिरंगे रंगरलियों में। गूँजेगे वैभवी तराने. गाँवों गलियों

कविता : भारत देश हमारा हैं

भारत देश हमारा है हमको जान से प्यारा हैं जीवन इस पे वारा हैं गौरवशाली इतिहास यही है आपस मे प्रेम यही है सब धर्मों में भाईचारा एक सूत्र में

कविता :गणतंत्र के दिवस की बहुत बधाई देश को

सौंप भाव सारे इस दिवस विशेष को गणतंत्र के दिवस की बहुत बधाई देश को उत्साह पूरे जग का भरा है इसी महत्व में इस दिवस को संविधान आया था

गणतंत्र भारत की खोज में…

“तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वम् हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे” – बंकिमचंद्र चटर्जी वंदेमातरम गीत की

कविता : अपनी कहानी अपनों को सुनाते हैं

अपनी कहानी अपनों को सुनाते है आओं किसी दीन आँसू पोंछते हैं। ये वक्त ये पल मेरा क्या बिगड़ने लेगा गिरते हुए किसी असहाय को उठाते हैं। बेवजह हो बारिश

कविता : हाय रे निजाम कैसा तेरा काम

बंदूक के नोक पर रोके जा रहे आंदोलन से कर्मचारी’ लोकतंत्र की गरिमा तार-तार हुई! अफसरशाही के साथ हिटलर शाही सरकार हुई, नहीं मांग सकता कोई अपना अधिकार!! हाय रे

कविता : गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं

दिल में रखें स्नेह सदा ही , गीत प्रेम के गाएं हम आओ इस गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं हम कसमें ऐसी कि जिसमें हो सर्वोपरी भारत माता देशप्रेम,

डॉ मनोज कुमार को मिला : सीनियर साइंटिस्ट अवार्ड

विजय न्यूज़ ब्यूरो गाजियाबाद। आईएमएस यूनिवर्सिटी कैंपस में ‘पाँचवे एनुअल स्कॉलर्स सांइस मीट’ का आयोजन ‘सोसाइटी ऑफ़ बायोमेडिकल लेबोरेटरी साइंटिस्ट्स’, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में

गणतंत्र दिवस मनाएंगे

हम सुबह की नई किरण बन गणतंत्र दिवस मनाएंगे। गावं गांव और शहर शहर तिरंगा हम लहरायेंगे। संविधान के नए सुमन बन खुशियां खूब सजायेंगे। गाँधी, सुभाष और लोकमान्य के

कविता : हिंदुस्तान की शान तिरंगा

भाई मेरे बंधु मेरे साथी मेरे, हिंदुस्तान की शान है तिरंगा। भारत की पहचान है तिरंगा, हर जगह लहराओ तिरंगा। चांद सूरज पर लहरा दो, चारों दिशाओं में फहरा दो।

गणतंत्र दिवस और भारत के समक्ष चुनौतियां

“महाप्रलय की ध्वनियों में जो जनता सोती है, गणतंत्र दिवस आज उनको दे रही चुनौती है।” गणतंत्र दिवस हमारी प्राचीन संस्कृति का गरिमा का गौरव दिवस है। भारत आज लोकतंत्र

कविता : कभी हंसते रहे कभी रोते रहे

रोज नई मुश्किल सहते रहे कभी हंसते रहे कभी रोते रहे। जिंदगी जैसी भी मिली हमें यूंही बसर सफर करते रहे। अपनों ने बहुत सिखाया हमें परायों के हाथ पलते

कवि चंद्र शेखर आश्री के कविता संग्रह “मोम का पुतला का लोकार्पण समारोह

विजय न्यूज़ ब्यूरो नई दिल्ली। “उद्भव” साहित्यिक संस्था एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक मंच कवितायन के तत्वावधान में “उद्भव सांस्कृतिक सम्मान समारोह एवं कवि चंद्र शेखर

साहित्यकार सुषमा शैली साहित्य गौरव सम्मान से अलंकृत

विजय न्यूज़ ब्यूरो नई दिल्ली। राजधानी की साहित्य,कला एवं सामाजिक सरोकारों को समर्पित संस्था सोशल एंड मोटिवेशनल ट्रस्ट द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर साहित्य परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का

कविता : बचपन में लौटा दो

जाने कैसी मजबूरी में बीज भागदौड़ का बोया नहीं है पल भर की राहत चैन सूकून भी खोया हर कोई है व्यस्त हो गया अपनी जीवन शैली में पहले से

कविता : थोड़ा बदल जाइए

अपना काम निकालने को अपने चेहरे पर इतने मुखोटे न लगाइए। इतना अपनापन मत जताइए नया ज़ख़्म देके न जाइए। भरोसा दिखाइए पर इसमें जूठी कसमे मत खाइए। भटके हुए

कविता : गणतंत्र दिवस 

गणतंत्र का सत्तरवाँ साल उमंग उत्सव वेमिशाल जोश से भरे चेहरे खिले तिरंगा देख मौज मस्ती करते मिले। जनतंत्र का यह गणतंत्र दिवस रखता है खास महत्व समरसता को संजोकर

महिला काव्य मंच की गोष्ठी संम्पन

डॉ. शम्भू पंवार नई दिल्ली। महिला काव्य मंच गुरुग्राम इकाई (हरियाणा) की मासिक गोष्ठी गुरुग्राम के क्लब में महिला काव्य मंच की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती नीतू सिंह राय की अध्यक्षता

कविता : तैयारी कर ली है

मिट्टी की स्याही लेकर उंगलियो की कलम बनाकर, खुद के नए बूत को बनाने की फिर तैयारी कर ली है। हवाये कितनी भी विपरीत दिशाओ में अब चल ले, हमने

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