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Category: साहित्य

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अन्तस् की ऑन लाइन काव्य गोष्ठी

उठो बेटियों मत घबराओं : डॉ कीर्ति काले डॉ शम्भू पंवार। विजय न्यूज़ नेटवर्क नई दिल्ली। राजधानी की प्रमुख साहित्यिक,सांस्कृतिक व सामाजिक संस्था “अन्तस्” ने कोरोना वायरस की महामारी के

कविता : सपने हमें जागते है

सपने हमें जागते है नींद में वो सोने नहीं देते हमारे सपने भी हमें जगाते हैं। हमारे खुशी पे तोहमत लगाते हैं अंधेरे में भी जुगनू मुस्कुराते हैं। बहुत कम

कविता : उनका बतियाना….रात… भर…

उनका बतियाना….रात… भर… सुना है तुम सबने कभी चांद सितारों को बतियाते? गौर से सुनना.. बात करते हैं वो बात करते हैं वो… किरणों की, चहूं ओर फैलकर उदासियों को

कविता : गरीब और देश बंदी का संकट

गरीब और देश बंदी का संकट जिन लोगों ने शहरों का, अपने खून पसीने, और कड़ी मेहनत से, एक-एक कोना सजाया। उन्हीं सृजनहारों पर जब, घिरा संकट देश बंदी का,

कविता : करें प्यार जीवों से

करें प्यार जीवों से आ गयी है मानव जीवन में त्रासदी। कोरोना ने भयकंर तबाही मचा दी।। चीनियों ने खूब खाया निरीह जानवरों को। जलचर, थलचर और सभी नभचरों को।

कविता : फिजां में ये फैली नमी बहुत

फिजां में ये फैली नमी बहुत फिजां में ये फैली नमी बहुत अपने लोग बुखार में पल रहे हैं। तूफान में दिए जल रहे हैं पर लोग हवा में पल

कविता : कोरोना

कोरोना विदेशी पूँजीपतिप्रिय यानगामी कोरोना वायरस | परदेश से आया अभिनेता पूँजीपति धनाड्य आये लेकर भारत में | रो गरीब रहा है | दोषी शिक्षित गँवार हैं अब मढ़ना मत

कविता : कोरोना का कहर

कोरोना का कहर कोरोना का कहर भोग रहा संसार लोक-डाउन ने किया घर कारागार बैठे-बैठे पैर ऐंठे मन भी चंचल होय कमरेे की दीवार पूछ रही कुछ मोय हैं दरबाजे-मौन

कविता : कोरोना टीचिंग

कोरोना टीचिंग … आंसू आ गए क्या पूछने, लेकिन …। सवाल लगते हैं तार्किक है कि अगर सही कारण कोरोना ठीक से व्यतीत नहीं हुआ यह हाथ धोने है सदियों

कविता : जलो तो चिराग की जानिब

जलो तो चिराग की जानिब दूसरों के लिए भी प्रकाश बनो जलो तो चिराग की जानिब। एक पल जियो एक सदी की जानिब सफर को जियो जिंदगी की जानिब। रास्ते

कविता : गरीब मजदूर

गरीब मजदूर प्रत्येक घृणित कार्यों को, करने के लिए जो मजबूर, जिसे कर सके कोई न और, वह दुनिया के गरीब मजदूर। सुबह होते जो घर छोड़ दें, बिलखते बच्चों

कविता : चैत्र नवरात्र

चैत्र नवरात्र सुख समृद्धि जग की खातिर लेकर आई अम्बे मां चैत्र मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां चंद्र मुकुट माथे पर सागर चरण रहे पखार

कविता : समय के साथ चलना हैं

समय के साथ चलना हैं फिसल जाते हैं रास्ते पर गिर कर फिर सँभलना हैं। आंखों में तुम्हे जो देखे बस सपनो में रखना हैं। तिमिर पसरा चारो ओर दिया

लघुकथा : हाय कोरोना 

“आप लोग कौन हैं। आप सब पैदल-पैदल कहां जा रहें हैं।” “हम सब दिहाड़ी मजदूर हैं। कोरोना के कारण सरकार ने सारी फैक्ट्रियां बंद करा दीं हैं। मालिकों ने हमें

कविता : मां दक्षिणेश्वरी काली कल्याण करो

मां दक्षिणेश्वरी काली कल्याण करो जागो जागो माँ रणचंडी जन जन का कल्याण करो। उठो उठो मां दक्षिणेश्वरी काली बच्चों का हाथ पकड़ अब उनको प्यार करो। कांप रही थर

कविता : प्यार का मज़ा

प्यार का मज़ा समझा तुम्हारी आँखों में मेरा प्यारा दिल क्या तुमने देखा मेरा दिल तुम्हारी आँखों में? प्रयास करें अपने दिल में देखना मेरी आँखों में यह जादू नहीं