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Category: साहित्य

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व्यंग्य : शव की बेचैनी और आत्मा को सुकून

अब तो शव बहुत बुरी तरह से बिफर गया था।यह शव विक्रमार्क के कांधे पर लटका बेताल का शव नहीं था बल्कि कोरोना का सताया हुआ आदम जात था ।कितनी

साहित्य सारथी सम्मान 2020 से सम्मानित हुए कांगड़ा के युवा कवि राजीव डोगरा ‘विमल’

विजय न्यूज़ नेटवर्क जयपुर (राजस्थान) । द्वारा आयोजित साप्ताहिक प्रतियोगिता अप्रैल द्वितीय 2020 में प्रतिभागिता लेकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर कांगड़ा के युवा कवि लेखक और भाषा अध्यापक राजीव डोगरा

कविता : आंसू देकर चले गए तुम

 आंसू देकर चले गए तुम (इरफान खान जी की स्मृति को समर्पित) विलख रहे हैं आज सभी हम ना जाने क्यूं चले गए तुम अभिनय की दुनिया भी सूनी हलचल

कविता : बगीचा की देन

बगीचा की देन बाग-बगीचा, अनुपम उपहार। इनके बदौलत, दुनिया-संसार। पेड़-पौधा लगाएं, जहां धरा खाली। बागीचा से जग में, रहती है हरियाली। जहां सघन है, बगीचा आवरण। वहां पर मिलता, स्वच्छ

कविता : देश की पहचान बेटियां

देश की पहचान बेटियां बेटियां भी होती हैं हमारे समाज का हिस्सा, इन्हें भी खुले आसमान में खुलकर जीने दो! बन सकती है यह भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति देश की,

कविता : कोरोना की दीक्षा है …

कोरोना की दीक्षा है … तू तेरे निर्मित इस जग में क्यूँ मुँह छिपाया फिरता है तन केंचुली के अंबार चँढ़ा क्यूँ खुद से ही खुद डरता है तू तो

लघुकथा : कोरोना का ख़ौफ़

पिछले कुछ दिनों से हर जगह कोरोना के बारे में लगातार खबरे चल रही है।अनिल इन बातों से काफी परेशान है।हर समय मन मे एक व्याकुलता बनी हुई है।अनिल एक

(व्यंग्य) डी.ए. : तुम्हे एक विनम्र भावांजली

केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को जनवरी-2020 में मिलनवाला डी.ए. फ्रिज क्या किया कि जैसे एक को देख दूसरा रंग बदलने लगता है, उसी तर्ज पर बहुत सी राज्य सरकारों

कविता : हम मूर्ख हैं, ये सबको बताने की जरूरत क्या है

 हम मूर्ख हैं, ये सबको बताने की जरूरत क्या है जब देश जलता हो तो दिया जलाने की जरूरत क्या है। हम मूर्ख हैं ……..ये सबको बताने की जरूरत क्या

सेंटर फॉर पर्सनल डेवलपमेंट संस्था की काव्य गोष्ठी सम्पन्न

विजय न्यूज़ नेटवर्क। डॉ शम्भू पंवार नई दिल्ली। ‘सेंटर फॉर पर्सनल डेवलपमेंट’ संस्था के तत्वावधान में डिजिटल काव्य गोष्ठी ‘रसतरंगिणी’ का आयोजन किया गया। गोष्ठी काआरंभ संस्था की संरक्षिका व

कविता : सांस के साथ धरती

 सांस के साथ धरती पेड़ सांस आपके साथ आप सांस लेते हैं पेड़ के साथ पृथ्वी है इतना ठीक है आप दोनों सांस के लिए ग्लोबल वार्मिंग … पृथ्वी ने

व्यंग्य : झाम बाबा के चश्मा

जब से गोरखपुर वाले झाम बाबा र्थी ट्रिलियन डॉलर इकोनामी की बात इडियट बॉक्सवा में देखे हैं,उनको मुल्क ए हिंद के प्रत्येक गांव सिंगापुर और कुआलालंपुर सरीखे दिखने लगे हैं।जहां

व्यंग्य लेख : ताली-थाली बजवा के अबके छाती पे मुक्का मरवाएंगे

‘विधना तेरे लेख किसी के, समझ न आते हैं सबके कष्ट मिटाने वाले, और कष्ट उठाते हैं’। आप सोच रहे होंगे कि आज ये गम्भीर हास्य पुट की जगह अचानक

सुरेश सौरभ की दो लघुकथाएं

किस्मत लॉकडाउन के चलते सारी दुकानें बंद चल रहीं थीं। उस थाने के पुलिस वालों को बहुत दिनों से जब मीट खाने को नहीं मिला, तब वह मीट खाने की

उत्सव की रात

… बात उन दिनों की है। जब मैं (काल्पनिक सम्बोधन) 12 वीं कक्षा में था। इस उम्र में पढ़ाई के साथ इश्क की किताबें पढ़ने लगना आम बात है। हर

तीन मुक्तक

तीन मुक्तक इच्छाशक्तियों का भाव मन में खास इतना हो हारेंगे कभी न हम, सदा आभास इतना हो चाहे दूर जितना हो, चाहे हो कठिन जितना हम मंजिल को पाएंगे

बिमला काव्य मंच की ऑन लाइन काव्य गोष्ठी सम्पन्न

डॉ शम्भू पंवार। विजय न्यूज़ नेटवर्क नई दिल्ली। लॉक डाउन के चलते इनदिनों ऑन लाइन कवि गोष्ठियों का दौर जोर शोर से चल रहा है।बिमला काव्य मंच की “महफ़िल मित्ररा

कविता : सच बतलाओ कब आओगे

सच बतलाओ कब आओगे प्रतीक्षारत तकती हैं आंखें जिस पथ से तुम आओगे कितना अब तड़पाओगे तुम सच बतलाओ कब आओगे..।। कितनी ऋतुएं बीत गई हैं उम्मीदों का दामन थामे

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