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Category: आलेख

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साहित्य शिरोमणि डॉ.निक्की शर्मा को यूरोप से मिली डॉक्टरेट की मानद उपाधि

नई दिल्ली। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेकों सम्मानों से अलंकृत साहित्य जगत की अनमोल शख्सियत साहित्य शिरोमणि डॉ.निक्की शर्मा को यूरोप की संस्था यूरोपीय रोमन अध्ययन और अनुसंधान संस्थान

गरीब पर्यटन के आकर्षण- झरोखे

झरोखे का नाम लेते ही सबसे पहले मिट्टी-कुट्टी से बनी झोपड़ियों का ध्यान आता है। झरोखों का निर्माण सबसे पहले वर्ष 2035 में बीपीएल वोटरों ने किया। बरसात के दिनों

132वीं जयंती पर शिक्षा एवं पत्रकारिता के पुरोधा साहित्यकार स्वर्गीय श्री माखनलाल चतुर्वेदी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए

राष्ट्रीय गौरव की जीवंत प्रतिमूर्ति थे माखनलाल चतुर्वेदी: दयानंद वत्स नई दिल्ली. अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के तत्वावधान में आज संघ के रोहिणी सेक्टर-36 स्थित राष्ट्रीय मुख्यालय

दीन-दुखियों एवं आदिवासियों की महान लेखिका-महाश्वेता देवी जयंती  पर विशेष

पानी की तरह श्वेत जो हर रंगो में समाहित हो जाता है उसी के अनुरुप ता-उम्र दीन दुखियों के लिए तत्पर खासकर आदिवासी एंव पिछड़ों के लिए देवी के रुप

वैश्विक फलक पर हिंदी का बढ़ता दबदबा

आज विश्व हिंदी दिवस है। आज ही के दिन 1975 में नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन हुआ। विश्व हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र में

हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जी का कद काफी ऊंचा है

महान उपन्यासकार और कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती हर साल हम लोग 31 जुलाई को मनाते हैं । दोस्तों प्रेमचंद की कहानियां समाज की सच्चाई का सामना करती है और

जनता कर्फ्यू एक अभिनव शब्द या प्रयोग

करोना जैसे वायरस से उत्पन्न संकट की घड़ी में “जनता कर्फ्यू” एक अभिनव व अदभुत प्रयोग सिद्ध होता नजर आया।देश के प्रधान मंत्री द्वारा 22मार्च को एक दिन स्वयं द्वारा

पानी कुछ कहना चाहता है…

22 मार्च – विश्व जल दिवस के अवसर पर वैचारिकी मैं पानी हूँ। हर जिंदगी की कहानी हूँ। किसी का अफसाना तो किसी का तराना हूँ। आपके शरीर में 70

ऐ गौरैया जाने तुम कहां चली गई…?

सर्दी हो या गर्मी, बारिश हो या तूफान, रामलुभाया जी जो कि हमारे लंगोटिया हैं, उनकी एक आदत बहुत अच्छी है, वे रोजाना पक्षियों को दाना चुग्गा जरूर डालते हैं।

रामकृष्ण परमहंस : परमहंसी साधना एवं सिद्धि के अलौकिक संत

भारत की रत्नगर्भा वसुंधरा माटी में कई संत और महान व्यक्ति हुए हंै जिन्हें उनके कर्म, ज्ञान और महानता के लिए आज भी याद किया जाता है। जिन्होंने अपने व्यक्तित्व

साहित्यिक पत्रकारिता की मशाल

पत्रकारिता ने भारत को आजादी दिलाने के अलावा हिंदी को भाषा का संस्कार दिया है। आजादी के आंदोलन के दौरान अखबारों में साहित्य को महत्व दिया जाता था। बड़े-बड़े साहित्यकारों

बापू, एक बार फिर आ जाओ!

30 जनवरी – शहीदी दिवस पर विशेष पीके फिल्म का एक दृश्य है। अभिनेता आमिर खान गाजर खरीदने के लिए दुकानदार को गांधी जी के चित्र वाली कई तरह की

गणतंत्र भारत की खोज में…

“तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वम् हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे” – बंकिमचंद्र चटर्जी वंदेमातरम गीत की

गणतंत्र दिवस और भारत के समक्ष चुनौतियां

“महाप्रलय की ध्वनियों में जो जनता सोती है, गणतंत्र दिवस आज उनको दे रही चुनौती है।” गणतंत्र दिवस हमारी प्राचीन संस्कृति का गरिमा का गौरव दिवस है। भारत आज लोकतंत्र

टैक्स डाॅक्टर रामनिवास लखोटिया : आदर्श जीवन की विलक्षण दास्तान

जन्म लेना नियति है किंतु कैसा जीवन जीना यह हमारे पुरुषार्थ के अधीन है। खदान से निकले पाषाण के समान जीवन को पुरुषार्थ के द्वारा तरास कर प्रतिमा का रूप

क्रांतिकारी संत – स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद – एक ऐसा नाम, एक ऐसा व्यक्तित्व कि जिस पर सदैव सनातन धर्म और मां भारती को गर्व रहेगा । जी हां । पूरे ब्रह्मांड में स्वामी जी

‘कितने पाकिस्तान’ क़ब्रिस्तान और श्मशानों के बीच जीवन का संघर्ष है: कमलेश्वर

6 जनवरी जयंती विशेष प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार कमलेश्वर की आज जयंती है। वे अपनी लेखनी में एक ऐसी लोक अदालत का निर्माण करते हैं जिसमें हर उस मृत व्यक्ति पर

रोचक रहा है सामाजिक चिंतक महेश आजाद का सफर

विशेष सन्दर्भ आलेख– जन्मदिन पर विशेष हमारे दैनिक जीवन में अक्सर ऐसे लोगों से वास्ता पड़ता है जो बोलते कुछ हैं और उनका आचरण कुछ और होता है। लेकिन कुछ

प्रकृति के सुकुमार कविः सुमित्रानंदन पंत

28 दिसंबर : प्रथम हिंदी ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि आज का दुख, कल का आह्लाद, और कल का सुख, आज विषाद; समस्या स्वप्न गूढ़ संसार, पूर्ति जिसकी

प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार पद्मभूषण यशपाल की पुण्यतिथि

26 दिसंबर – प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार पद्मभूषण यशपाल की पुण्यतिथि लोग मरते हैं, कलम नहीं मरा करती” – यशपाल यशपाल (जन्मः 3 दिसंबर 1903 – फिरोजपुर, पंजाब तथा मृत्युः 26

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