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Category: काव्य-संसार

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डॉक्टर डे

डॉक्टर डे आओ सबको सैर कराए डॉक्टरों का मान- सम्मान बढ़ाएं कोई अमीर न, कोई गरीब देखें, न कोई जात, और न कोई पात माने सबको निस्वार्थ भाव से सेवा

कविता : आंसू देकर चले गए तुम

 आंसू देकर चले गए तुम (इरफान खान जी की स्मृति को समर्पित) विलख रहे हैं आज सभी हम ना जाने क्यूं चले गए तुम अभिनय की दुनिया भी सूनी हलचल

कविता : बगीचा की देन

बगीचा की देन बाग-बगीचा, अनुपम उपहार। इनके बदौलत, दुनिया-संसार। पेड़-पौधा लगाएं, जहां धरा खाली। बागीचा से जग में, रहती है हरियाली। जहां सघन है, बगीचा आवरण। वहां पर मिलता, स्वच्छ

कविता : देश की पहचान बेटियां

देश की पहचान बेटियां बेटियां भी होती हैं हमारे समाज का हिस्सा, इन्हें भी खुले आसमान में खुलकर जीने दो! बन सकती है यह भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति देश की,

कविता : कोरोना की दीक्षा है …

कोरोना की दीक्षा है … तू तेरे निर्मित इस जग में क्यूँ मुँह छिपाया फिरता है तन केंचुली के अंबार चँढ़ा क्यूँ खुद से ही खुद डरता है तू तो

कविता : हम मूर्ख हैं, ये सबको बताने की जरूरत क्या है

 हम मूर्ख हैं, ये सबको बताने की जरूरत क्या है जब देश जलता हो तो दिया जलाने की जरूरत क्या है। हम मूर्ख हैं ……..ये सबको बताने की जरूरत क्या

कविता : सांस के साथ धरती

 सांस के साथ धरती पेड़ सांस आपके साथ आप सांस लेते हैं पेड़ के साथ पृथ्वी है इतना ठीक है आप दोनों सांस के लिए ग्लोबल वार्मिंग … पृथ्वी ने

तीन मुक्तक

तीन मुक्तक इच्छाशक्तियों का भाव मन में खास इतना हो हारेंगे कभी न हम, सदा आभास इतना हो चाहे दूर जितना हो, चाहे हो कठिन जितना हम मंजिल को पाएंगे

कविता : सच बतलाओ कब आओगे

सच बतलाओ कब आओगे प्रतीक्षारत तकती हैं आंखें जिस पथ से तुम आओगे कितना अब तड़पाओगे तुम सच बतलाओ कब आओगे..।। कितनी ऋतुएं बीत गई हैं उम्मीदों का दामन थामे

कविता : शुभ बैसाखी आई

 शुभ बैसाखी आई वैशाखी है पर्व खुशी का, जग में खुशियां बांटें। शुभकामना संदेश नवल सूरज जग सम्मुख बांचे। हर्षित अम्बर, पवन, वसुधा गर्वित पावक जलधि-जल, नूतन पथ पर बढ़ा

कविता : हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है

 हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है इंसानियत का रिश्ता निभाने का वक़्त है हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है..।। मजबूर जो बेबस हैं कोरोना की मार

कविता : याद तुम्हें कर रो लेता हूँ

 याद तुम्हें कर रो लेता हूँ वही पुरानी पाती पढ़कर अब भी खुद को समझाता हूँ जो तुमने लिखकर भेजा था वही देख फिर मुस्काता हूँ..।। चिट्ठी में पुष्पों की

कविता : इंतजार

 इंतजार इंतजार क्या है? इंतजार से पूछो इंतजार क्या है? इंतजार क्या है मुझसे पूछो ? उसके आने से पहले भी उसका इंतजार था,  उसके आने पर भी उसका ही

कविता : मृत्यु का अट्टहास

मृत्यु का अट्टहास वक़्त संहार का हैं पापियों का विनाश हैं, क्यों दुआ करु की सब रुक जाए, किये हैं जो दुष्कर्म मानव भी तो उनका फल पाए। जी रहे

कविता : सहमा हुआ हूँ मैं

 सहमा हुआ हूँ मैं परीक्षा प्रेम की इतनी सहज होती नहीं शायद सही परिणाम की आशा की कोशिश में लगा हूँ मैं..।। कभी उत्तीर्ण हो जाऊं यही है कामना मन

कविता : चांदनी रात

 चांदनी रात जब चांदनी रात हो, दिलबर साथ-साथ हो। घूम रहें हों आप दोनों, बांहों में डाले बांह को। फिर भला ऐसी कहां, बनी दूजा कोई रात हो। चांदनी बिखर

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