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Category: काव्य-संसार

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शायरी : निर्भया के दुष्कर्मियों पर…

वो लटक जायेंगे तब पता चलेगा सबको अभी कानून की गलियों में भटके हुए हैं वो *********** वे सब लटक जायें तब ही मानना ‘निर्भया’ बचाने की गलियां बहुत है

कविता : ऑफिस के क्लर्क

ऑफिस के क्लर्क डालते लाइफ में फर्क करते ग्राहकों का बेड़ा गर्क काम ऐसा करते है हमको दांत भींचने को हमेशा करते है तैयार एक कमरे से दूसरे कमरें में

कविता : यहां न अब कोई

रिश्तों में वो खट्टा मीठा स्वाद यहां न अब कोई लोगों में अपनेपन की बुनियाद यहां न अब कोई नये जमाने में सबलोग भले जुडे़ हों दुनिया से पर अपनों

कविता : उड़ी उड़ी रे पतंग

मस्ती भरी उमंगों से अंगड़ाई ले अड़ी पतंग। गुजारिश कर चली चली रे रंगीन सपनों की लहरी के रंग। नहीं किसी के गम ओ सितम उड़ती जिंदगी जाने बन पतंग।

कविता : युवाओ को संदेश

युवाओं तुम्हें जगना होगा विवेकानंद के सपनों के पथ पर चलना होगा। चारों ओर शोर फैला सडको पर सैलाव उमडा कौन सच्चा कौन झूठा सवालो ने घेरा डाला सब को

कविता : कैसे कह देते हो तुम

प्यारी हूं न्यारी हूं पूरे घर की राज दुलारी हूं मान सम्मान सब मुझको देते आसमां में छा जाऊं कल्पना वह मुझसे हर पल बुनते बुरी नजर से मुझे बचाते

कविता : नये वर्ष की मधुर बधाई

टूटी छप्पर छानी वाले गांव को छाले पर छाले ढोते उस पांव को नये वर्ष की मधुर बधाई नमक रोटियों वाली आधी थाली को बिखरे सपनों वाली आंख सवाली को

कविता : नववर्ष उज्जवल भविष्य

नववर्ष उज्जवल भविष्य ले आ रहा नववर्ष उल्लास उमंगे. लाने आ रहा. स्वणिम सुख स्वप्न संजोए जाने आ रहा। रंगीन कल्पनाओं के दीप. जाने आ रहा. आँखों में मंद पड़ा

कविता : नया वर्ष नया दिन

नए साल का पहला दिन। यह एक नए दिन के लिए चमकने का समय है। अपना अतीत भुला दें, तुम्हारा दुख, तुम्हारा दर्द। नए विचारों का इंतजार है। यह आपकी

कविता : एक नया वर्ष

पुराने दिल के दर्द को दूर करें। हमारी गलतियों से सीखें। एक और साल आखिरकार खत्म हो गया है। एक नई सुबह जागती है। पुराने साल को खत्म होने दो।

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