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Category: काव्य-संसार

Total 515 Posts

इसको पीते ही मेरे ख्वाब चमक जाते हैं

इसको पीते ही मेरे ख्वाब चमक जाते हैं, तेरे हाथों से बने जाम महक जाते हैं।। . मेरे जेहन में चुपके से आते हो, मेरे ख्यालात भी बहक जाते हैं

संस्कृति की अमूल्य धरोहर : योग”

योग है प्राचीन परम्परा की अमूल्य धरोहर। इसके करने से तन-मन होता प्रफुल्लित और मनोहर॥ योग दिवस की पहल में है भारत की निर्णायक भूमिका। विश्वस्तर पर इसकी स्वीकृति में

योग भंडारा है सुखों का

योग छुटकारा है दुखों का योग भंडारा है सुखों का योग मिलाता आत्मा को परमात्मा से परिचय कराता जीवन का श्रेष्ठता से योग बढ़ोतरी का नाम है तन-मन की शुद्धता

कैसे जख्म दिखाएँ ज़माने को

कैसे जख्म दिखाएँ ज़माने को, हमेशा जहर दिया दीवाने को।। नादाँ न समझ पाया जमाने को, दिल दिया,हमदर्द समझ ज़माने को। फरेब नहीं दिखाया ज़माने को, मासूम,बूझ न पाया ज़माने

विक्रांत तो कभी प्रशांत पिता

सदियों से हमारा समाज पितृ सत्तात्मक समाज रहा है। क्योंकि परिवार के भरण-पोषण का पूरा दायित्व पिता यानी पुरुष की जिम्मेदारी रहा है। यूंतो स्त्री पुरुष दोनों साइकिल के दो

चनप्रीत सिंह की 21 कविताओं का संग्रह ‘एक अकेला पेड़’ का विमोचन मुंबई में हुआ

मुंबई। अभिनेता, कवि और लेखक चनप्रीत सिंह की 21 कविताओं का संग्रह ‘एक अकेला पेड़’ का विमोचन शुक्रवार 18 जून 2021 को यारी रोड, अँधेरी (वेस्ट),मुंबई में किया गया। इस

महाराणा महान

मेवाड़ी माटी की शान, शूरवीरता है पहचान । हिंदवा सूरज जिसका नाम, वह है महाराणा महान ।। कुंभलगढ़ में जन्म लिया, माँ जयवंता की कोख से । उदयसिंह का गौरव

कहीं गायब हो रही खुश्बू ए चमन

कहीं गायब हो रही खुश्बू ए चमन, क्यूं वो बहारों के साथ महकते नहीं । दफ्न हो रही है तमन्नाये मोहब्बत, क्यू फूलों की शोहबत में रहते नहीं। मर जायेगा

डॉ ज्योति कपूर की तीन कविताएं

1. एक और बारिश………. लो फिर शुरु हुआ दिल टूटने का सिलसिला आसमाँ रोने लगा शायद जलता हुआ जिगर कुछ ठंडा हो ले कुछ देर तेरी याद से फ़ारिक हो

होश नहीं, सिर किधर है पांव किधर है|

होश नहीं, सिर किधर,पांव किधर है अपनों के दर्द का ऐसा असर है|   दिल चाहे या ना, तुम्हें जाना ही पड़ेगा, ठहरी दहलीज पर, उम्मीदें सफर है|   राहे

चंदन भी अकुला गया, देख जड़ों में नाग !!

आँखों का पानी मरा, भरा मनों में पाप ! प्रेम भाव गायब हुए, अपनापा अभिशाप !! ★★★★ दरपन रूठे से लगे, सूने हैं घर द्वार ! तकरारें दीवार से, आँगन

आंखों ही आंखों में मुस्कुरा देना तुम।

हर एहसास दिल में न दबा देना तुम, होठों से जरा तिरछा मुस्कुरा देना तुमl ये तो दिल की लगी है, न घबराना, आंखों ही आंखों में मुस्कुरा देना तुम।

नफरतों से हमारी रगो में उबाल क्यों नहीं

नफरतों से हमारी रगो में उबाल क्यों नहीं, बढ़ती हरकतों पर हमारे बीच सवाल क्यों नहीं।। इन कौमी हमले पर जरा सोचिये जनाब, शर्मनाक हिंसा पर दुनिया में बवाल क्यों

शारदे काव्य संगम में हुआ भव्य कवि सम्मेलन

मध्यप्रदेश. विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में रविवार 6 जून 21 को शारदे काव्य संगम सतना के पटल पर जूम एप पर एक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें

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