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Category: काव्य-संसार

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मनुज हारा नहीं अभी तक

समय कुटिल साधना होगा जीवन को बांधना होगा युद्ध मृत्यु से हो चाहे कठोर अनित्य से हो चाहे मनुज हारा नहीं अभी तक संघर्ष अभित्य से हो चाहे उसे अवश्य

हिंदू नववर्ष पर सम्मान समारोह एवं काव्य संगोष्ठी का आयोजन संपन्न

गाज़ियाबाद। प्रतिष्ठित चैनल एवं पत्रिका ट्रू मीडिया के तत्वावधान में हिंदू नववर्ष नव संवत्सर 2078 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर 10 अप्रैल 2021 को सम्मान समारोह एवं काव्य संगोष्ठी

शहर के बीचो-बीच शमशान क्यों है

जीना दूभर मरना आसान क्यों है हैरत में हैं सब फिर भी ख़ामोश क्यों रात तो रात दिन भी वीरान क्यों है रोज मिलता था कल तक जो बार-बार वो

होली आई

होली आई , होली आई, अपने साथ मानवता लाई ना कोई रंगों का भेदभाव…….. खुशियों की बौछार है लायी, रंग बिरंगे गुलाल बिखेरती , रंगों का त्यौहार है आयी ……..

होली

सामाजिक सद्भाव और प्रेम का पर्व है- होली। यद्यपि होली को पौराणिक संदर्भों के अनुसार भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका के संदर्भ में व्याख्यायित किया गया है किन्तु वास्तव

दोस्ती का रंग

दोस्ती का रंग हमसे पूछिए ज़रा सा हमसे दिल लगाकर ज़रा सा मुस्कुरा कर देखिए। दोस्ती होती नहीं है मोहब्बत से कम ज़रा हमारे साथ चल कर, ज़रा सा हमारे

114वीं जयंती पर सुप्रसिद्ध कवयित्री पद्म विभूषण स्वर्गीय महादेवी वर्मा क़ो श्रद्धा सुमन अर्पित

नई दिल्ली. अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ दिल्ली के तत्वावधान में आज संघ के मुख्यालय बरवाला में संघ के राष्ट्रीय महामंत्री दयानंद वत्स की अध्यक्षता में पद्म विभूषण

होली गीत

होरी खेलन आयो, सखी री देखो श्याम हठीलो मानत न वो विनती मोरी, करत रहत मो संग बरजोरी मोको बहुत सतायो, सखी री देखो श्याम हठीलो सात रंगन से भर

तुम पूछते हो मैं कौन हूं….

मैं अर्पण हूं,समर्पण हूं, श्रद्धा हूं,विश्वास हूं। जीवन का आधार, प्रीत का पारावार, प्रेम की पराकाष्ठा, वात्सल्य की बहार हूं। तुम पूछते हो मैं कौन हूं?   मैं ही मंदिर,

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