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Category: काव्य-संसार

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डॉ ज्योति कपूर की तीन कविताएं

1. एक और बारिश………. लो फिर शुरु हुआ दिल टूटने का सिलसिला आसमाँ रोने लगा शायद जलता हुआ जिगर कुछ ठंडा हो ले कुछ देर तेरी याद से फ़ारिक हो

होश नहीं, सिर किधर है पांव किधर है|

होश नहीं, सिर किधर,पांव किधर है अपनों के दर्द का ऐसा असर है|   दिल चाहे या ना, तुम्हें जाना ही पड़ेगा, ठहरी दहलीज पर, उम्मीदें सफर है|   राहे

चंदन भी अकुला गया, देख जड़ों में नाग !!

आँखों का पानी मरा, भरा मनों में पाप ! प्रेम भाव गायब हुए, अपनापा अभिशाप !! ★★★★ दरपन रूठे से लगे, सूने हैं घर द्वार ! तकरारें दीवार से, आँगन

आंखों ही आंखों में मुस्कुरा देना तुम।

हर एहसास दिल में न दबा देना तुम, होठों से जरा तिरछा मुस्कुरा देना तुमl ये तो दिल की लगी है, न घबराना, आंखों ही आंखों में मुस्कुरा देना तुम।

नफरतों से हमारी रगो में उबाल क्यों नहीं

नफरतों से हमारी रगो में उबाल क्यों नहीं, बढ़ती हरकतों पर हमारे बीच सवाल क्यों नहीं।। इन कौमी हमले पर जरा सोचिये जनाब, शर्मनाक हिंसा पर दुनिया में बवाल क्यों

शारदे काव्य संगम में हुआ भव्य कवि सम्मेलन

मध्यप्रदेश. विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में रविवार 6 जून 21 को शारदे काव्य संगम सतना के पटल पर जूम एप पर एक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें

जब भी कयामत होती है

यूँ जब भी कयामत होती है, मुझ पर ही कयामत होती है। जख्म खुले मत रखना,मेरे दोस्त यहां नमक की बरसात होती है। कायरता, नपुंशकता नही तो क्या, नोच कर

गुलशन उजड़ गया

बैठ पेड़ की छाया में, मस्त मगन हम रहते थे। कितना सुन्दर दृश्य था, जब प्रकृति से बातें करते थे।। खेलते रहते पेड़ों के नीचे, झूलते उनकी टहनियों में। मन

पहले

युद्ध से पहले शांति का प्रस्ताव होना चाहिए। मरने से पहले जीवन का एहसास होना चाहिए। नफरत से पहले मोहब्बत का इजहार होना चाहिए। छोड़ने से पहले मिलने का गुनाह

वृक्षारोपण ही भविष्य निधि

सौ वृक्ष का लक्ष्य हमें जीवन में पालन करना होगा । वृक्ष लगाकर जन्मोत्सव पर हर दिन पालन करना होगा। उन्मुक्त वायु जीवनदायिनी का विस्तार हमें करना होगा। वृक्ष लगाकर

छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती

छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती, छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती, अफवाहों की दीवार पक्की नहीं होती। घर है तो दीवारें लाज़मी होगी ही, दिलों में दीवार अच्छी नहीं

जिंदगी ने जब पहला इम्तिहान लिया

तन्हाइयो ने तब से हमें पहचान लिया तंज कसता रहा जमाना मेरी बेज़ारी पर, उसी पल मैंने आनेवाले कल को जान लिया । तन की फकीरी रास आ गयी अब,

कवि कोरोनादास की वेबीनार

सड़कें सूनी हो गई, सूने तीरथ हाट। नेता-नेता चाल चलत, जनता कुचरे टाट।  सड़कें सूनी हो गई है। सारे तीरथ और बाजार-हाट सभी बंद हो गए हैं। कोरोना अवस्था में

प्रिय आज एक बात कहती हूँ

प्रिय आज एक बात कहती हूँ संबंधों को तुमने हर हाल में संजोया है प्यार से मेरे आंचल को भिगोया है सुखी रहे संसार अपना हर पल ध्यान रखा है

हिन्द देश परिवार के तत्वावधान में पटना इकाई उदघाटन समारोह संपन्न

आज हिन्ददेश परिवार के तत्वावधान में पटना ईकाई का ऑनलाइन उदघाटन समारोह बडे निराले अंदाज के साथ सम्पन्न हुआ ।देश विदेश के कलमवीरो ने अपनी काव्य प्रस्तुती के साथ इस

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