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Category: कथा-सागर

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लघुकथा – अम्बे माँ का जगराता

 हमेशा की तरह हाथ में कपड़ो से भरा हुआ पुराना बैग लिए राजू के पड़ोस की सरोज अम्मा उसके पास से जा रही थी।सरोज रोज के मुकाबले आज बहुत ही

विचारक (लघुकथा)

मेरे एक परिचय के अंकल जी पक्के बौद्धिस्ट और वामपंथी विचारक थे। मंच से उनके ओजस्वी भाषणों से मैं काफी प्रभावित था। समय-समय पर फोन से उनसे बात करके बहुत

मेरी अभिव्यक्ति

मानव जीवन संघर्षों की कहानी है, जिसमें प्रकृति की अहम भूमिका होती है। यह कोरोना काल मानव के कृत्यों के फलस्वरूप प्रकृति का प्रकोप है। प्रत्येक काल की अपनी विशेषता

बाल कविता – गणपति विसर्जन

प्यारे दादू , प्यारे दादू , जरा मुझको ये समझाओ। क्यों करते है , गणपति पूजा मुझको ये बतलाओ। क्यों विसर्जन करते गणपति,मुझको ये बतलाओ। ये क्या रहस्य है दादू

दूरदर्शन ‘’डीडी किसान’’ चैनल पर देश के सफल किसानों की कहानियां को दर्शाती डाक्यूमेंट्री सीरीज है “हौसला”

राजू बोहरा /विजय न्यूज़ नेटवर्क। भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है क्योकि किसानो ने ही कृषि के माध्यम से भारत को आगे

कहानी: आखिर सानू स्कूल कब से जायेगी, कब खुलेगा उसका स्कूल…..

सानू अलसुबह चौंक कर नींद से जागी और बिस्तर पर बैठकर रोने लगी। सिसकियाँ गूंजने लगी। रोने का उसका यह क्रम चलता देख उसकी माँ ने उसे पुचकारते हुए पूछा-

लघुकथा : कोरोना का ख़ौफ़

पिछले कुछ दिनों से हर जगह कोरोना के बारे में लगातार खबरे चल रही है।अनिल इन बातों से काफी परेशान है।हर समय मन मे एक व्याकुलता बनी हुई है।अनिल एक

सुरेश सौरभ की दो लघुकथाएं

किस्मत लॉकडाउन के चलते सारी दुकानें बंद चल रहीं थीं। उस थाने के पुलिस वालों को बहुत दिनों से जब मीट खाने को नहीं मिला, तब वह मीट खाने की

लघुकथा : चपन का सपना

मिस्टर सुरेश सौरभ अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे।इसी बीच उन्हें एक वित्त रहित इंटर कॉलेज में पढ़ाने की जिम्मेदारी मिल गई। जिससे घर-परिवार

लघुकथा : गरीब की बुझी बाती

शाम ढल चुकी थी। उसके झोपड़ी में घुप्प अंधेरा था। तभी किसी ने बाहर से आवाज लगाई-सुंदी ओ सुंदी! काहे घर में अंधेरा किए है, कुछ बारती क्यों नहीं। प्रति

लघुकथा : सहयोग

मंगर और गजोधर दो जिगरी दोस्त थे।दोनों का जन्म बिहार के औरंगाबाद जिले के एक सुदूरवर्ती गांव खेमनीचक के बहुत ही गरीब परिवारों में हुआ था। गांव में कोई पाठशाला

लघुकथा : हाय कोरोना 

“आप लोग कौन हैं। आप सब पैदल-पैदल कहां जा रहें हैं।” “हम सब दिहाड़ी मजदूर हैं। कोरोना के कारण सरकार ने सारी फैक्ट्रियां बंद करा दीं हैं। मालिकों ने हमें

लघुकथा : कोरोना का रोना

देश में कोरोना वायरस को लेकर काफी हलचल और दहशत थी। स्कूल कालेज व तमाम संस्थाओं को सरकार ने बंद करा दिया था। अब भीड़-भाड़ वाली जगहों से पुलिस वाले

लघुकथा : स्वाबलंबी जीवन पथ

सोहन और सरिता की शादी हुई दोनों बहुत खुश थे और अपने जीवन को लेकर गंभीर भी।सरिता का मैके सोहन की अपेक्षा आर्थिक रूप से सुदृढ़ थी।जबकि सोहन एक साधारण

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