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Category: व्यंग्य

Total 155 Posts

सूर्य के प्रकाश की बिजली फिटिंग!

जिसने मेरे सूर्य के प्रकाश बिजली मिस्त्री को नहीं देखा, समझ लें उसने दुनिया में कुछ भी नहीं देखा। सूर्य का साक्षात प्रकाश ऐसी बिजली फिटिंग करता जैसे कोई नेता

पतुरिया

चारपाई पर बैठे ठाकुर देवेन्द्र सिंह ने कल्लू कोरी को पाँच हजार देते हुए अपनी मूछों पर हाथ फेरते हुए विनम्र भाव से कहा-देख, कल्लू फूलन तेरी ही नहीं मेरी

तारीफों के पुल बांधने का वक्त!

आज मन कर रहा है कि मैं तारीफों के पुल बांध दूं। बहुत दिन हो गए किसी की तारीफों के पुल नहीं बांधे! अब वक्त आ गया है तारीफों के

मास्क मोरी ठुड्ढी पर सोहे!

कोरोना के खात्मे लिए मैंने खोजबीन कर ली है। मैं जनता के हित के लिए यह रिसर्च रिपोर्ट पब्लिश कर रहा हूं। इस रिपोर्ट पर अमल करने पर कोरोना हंड्रेड

उड़ने दे सूचकांक का गुलाल!

मुझे जीडीपी उर्फ ‘जबरदस्त डरावन पड़ोसी’ अर्थात सकल घरेलू उत्पाद के रूप में पड़ोसियों की डरावनी शकल ही दिखाई देती है। ये मुझे किसी न किसी उत्पाद के खरीदार ही

व्यंग्य आलेख : हम तो तेरी मोहब्बत में ‘यू-र्टन’ हो गए

भगवान ने ठंड और गरीबों की जोड़ी काफी शोध के बाद बनाई है। गरीबी को लेकर रोना आम है। लेकिन उनकी हस्ती है कि मिटती नहीं है। गरीबी मिटाने को

सादर प्रकाशन हेतु व्यंग्य “पुलिसिया संस्कृति

सिपाही सुरेन्द्र सिंह को पुलिस महकमे में भर्ती हुए दस साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक ठीक से गाली देना तक नहीं आया। इसका परिणाम यह है

दीदी के अंगने में भाजपा का क्या काम है

कोलकाता की सड़कों पर भाजपा के लोग अकसर एक फिल्मी गीत गाते हुए मिलते हैं-एक बंगला बने न्यारा, रहे कुनबा जिसमें सारा, सोने का बंगला, चंदन का जंगला, अति सुंदर

विजयदशमी: दशानन का उभरा दर्द, ऐसे कौन जलाता है भाई…

शहर का एक बड़ा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल। रोजाना की तरह मरीजों की आवाजाही जारी थी। प्रसिद्ध ह्रदयरोग विशेषज्ञ डॉ.रामावतार रामभरोसे ओपीडी में रोजाना की तरह मरीजों को देखने में व्यस्त थे।

व्यंग : एजेंडा वही जो वोट दिलाए

वे पार्टी मुख्यालय में गए । उन्होंने गाड़ी को सीधे फव्वारे के नीचे स्नान करने के लिए खड़ा कर दिया । बाहर तेज गर्मी थी । अंदर एयर कंडीशनर में

सामयिक व्यंग्य: ‘ हरामखोर लड़की ‘ नहीं, ‘ बेईमान नॉटी गर्ल ‘ डिक्शनरी में वर्ड एड कर लीजिए जनाब…..

आप भी समझ रहे होंगे, यह कैसी शब्दावली है। ‘हरामखोर लड़की ‘ का मतलब ‘ बेईमान नॉटी’ गर्ल कब से होने लगा है। हमने तो सदा ‘हरामखोर’ यह शब्द गाली

व्यंग्य : सिंघम बनोगे या चीवींगम!

कुछ दिन पहले हैदराबाद में आई.पी.एस. प्रशिक्षण समाप्ति समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कहा कि पुलिस की वर्दी ऐसी है जिसे पहनते ही

व्यंग : हे ! कागदेव आपकी श्रेष्ठता को नमन’

हे ! कलयुग के पितृदेव। हम आपकी श्रेष्ठता को नमन करते हैं। हम समदर्शी सृष्टि का भी अभिनंदन करते हैं जिसने आपको पखवारे भर के लिए श्रेष्ठ माना है। लेकिन

खबरिया चैनल की जबरिया न्यूज़ें

न्यूज़ चैनल वाले भाई साहब को हम सब दर्शकों का घनघोर नमस्ते! एंकर भैनजी आप को साष्टांग प्रणाम! आप इन दिनों सुशांत केस को सुलझाने में रात-दिन लगे पड़े हैं।

21वीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार

तेलंगाना से डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ का चयन प्रलेक प्रकाशन समूह, मुम्बई, महाराष्ट्र ने 21वीं सदी के 101 श्रेष्ठ व्यंग्यकार विषयक मेगा योजना इस जुलाई में प्लान की थी, जिसमें देश और विदेश के

व्यंग्य रचना: घनघोर आजाद शुभकामनाएं!

मोबाइल में शुभकामनाएं कीड़ों की तरह बिलबिला रही है। जैसे ही मोबाइल खोलता हूं शुभकामनाएं मकोड़ों-चीटियों की तरह बाहर निकल-निकल कर बह रही है। ले लो आजादी की शुभकामनाएं! इस

व्यंग्य : शव की बेचैनी और आत्मा को सुकून

अब तो शव बहुत बुरी तरह से बिफर गया था।यह शव विक्रमार्क के कांधे पर लटका बेताल का शव नहीं था बल्कि कोरोना का सताया हुआ आदम जात था ।कितनी

(व्यंग्य) डी.ए. : तुम्हे एक विनम्र भावांजली

केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को जनवरी-2020 में मिलनवाला डी.ए. फ्रिज क्या किया कि जैसे एक को देख दूसरा रंग बदलने लगता है, उसी तर्ज पर बहुत सी राज्य सरकारों

व्यंग्य : झाम बाबा के चश्मा

जब से गोरखपुर वाले झाम बाबा र्थी ट्रिलियन डॉलर इकोनामी की बात इडियट बॉक्सवा में देखे हैं,उनको मुल्क ए हिंद के प्रत्येक गांव सिंगापुर और कुआलालंपुर सरीखे दिखने लगे हैं।जहां

व्यंग्य लेख : ताली-थाली बजवा के अबके छाती पे मुक्का मरवाएंगे

‘विधना तेरे लेख किसी के, समझ न आते हैं सबके कष्ट मिटाने वाले, और कष्ट उठाते हैं’। आप सोच रहे होंगे कि आज ये गम्भीर हास्य पुट की जगह अचानक

हास्य-व्यंग्य : झूठ की नींव पर सच की इमारत

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। शायद आपने भी पढ़ी होगी। वही जिसमें एक गड़रिया भेड़ों को चराता था। रह-रहकर गाँव वालों से मजाक करता था- शेर आया, शेर आया।

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