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Category: व्यंग्य

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हास्य-व्यंग्य : कोरोना भगाओ यज्ञ का आयोजन

फिलहाल हम लोग कोरोना को भगाने के लिए अपनी कालोनी में आध्यात्मिक प्रयास बहुत तेज कर दिए हैं। पूजा-पाठ निरन्तर सबके घरों में दिन-रात हो रहा है। घर-घर से चंदा

व्यंग्य लेख  : श्री श्री श्री कोरोना महाराज!

यशवंत फिल्म का एक डायलॉग है- एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है। गनीमत मनाइए कि कम-से-कम यहाँ एक मच्छर तो है, जो हमें नंगी आँखों से दिखायी

हास्य-व्यंग्य : थाली-शंख बजाओ कोरोना भगाओ

चलो मित्रों ये बहुत अच्छा हुआ कि कोराना भगाने के लिए एक बहुत अच्छा टोटका मिल गया। पूरी दुनिया में जब कोरोना भगाने के लिए हाहाकार मचा हुआ है। हजारों

व्यंग्य : अहिंसावादी रामलुभाया जी और लेखक

जैसा कि आप सभी को यह मालूम ही होगा कि हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी ने अहिंसा को जीवन में बहुत बड़ा स्थान दिया था। अहिंसा, वास्तव में है

हास्य-व्यंग्य : बुजुर्ग हकीम ने ईजाद की कोरोना की दवा

एक कस्बाई प्राइवेट बस में अपने गन्तव्य पर जाने के लिए मैं बैठा हूं, बस यात्रियों से फुल है। अब चले, तब चले यही गझिन चिन्ताएं यात्रियों के चेहरों पर

व्यंग्य : लकीर पीटने का मजा ही कुछ और!

आज तक मैंने जितने भी कदम उठाए हुए वे सब अहिंसा वादी कदम थे। वह तो गांधीजी की किस्मत अच्छी थी कि उस जमाने में मेरा अवतार नहीं हुआ वरना

हास्य-व्यंग्य : चलो सेमिनार-सेमिनार खेलते हैं…

मेरे एक अच्छे मित्र हैं। ऊँचे पद पर काम करते हैं। उनकी पत्नी भी काफ़ी पढ़ी-लिखी हैं। शिक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। दोनों के प्रति मेरे हृदय में सम्मान

व्यंग्य : अपने विधायक रखना जरा संभाल के

समकालीन भारतीय राजनीति में दृश्य चकाचक नजर आ रहे हैं। कोई एक तरफ विधायकों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कोई किसी और के विधायकों पर डोरे डाल रहे

व्यंग्य : अथ श्री ‘जूँ’ पुराण कथा

वर्तमान देश की स्थिति पर कटाक्ष करने वाला हास्य-व्यंग्य जूँ पुराण आरंभ करने से पहले दुनिया के समस्त जुँओं को मैं प्रणाम करता हूँ। मुझे नहीं लगता कि लेख समाप्त

व्यंग्य : कर्नाटक मॉडल- कुर्सी प्राप्ति का फसली फार्मूला

आपके हमारे वोट देने मात्र से किसी की सरकार बन जाएगी तो यह वोटर देवता जी आपका सिर्फ भ्रम है। चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें लेकर कोई चुनावी दल आगे

व्यंग्य : रंगों की रंगदारी !

यादों में अब भी गूंजता है – रंगीला रे, तेरे रंग में, यूं रंगा है मेरा मन.. सच ! रंग रंगीले होते हैं। जहां रंगों का फीका पड़ जाना शुभ

‘बलम चलाओ गुलेल न लगाओ गुलाल’

(होली पर विशेष व्यंग आलेख) अबकी अपुन की होली का सेंसेक्स धड़ाम है। बेचारी पहले ही भंग पीकर औंधे पड़ी है। क्योंकि पूरी दुनिया में मंदी और बंदी छायी है।

व्यंग्य : नमस्ते जी कोरोना तुझे नहीं समझते जी!

एक बात तो साफ है कि कोरोना वायरस से अब डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह कोरोना हम भारतीयों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा, क्योंकि यह विदेशी वायरस

व्यंग्य : पढ़े-लिखे इंसान नहीं शैतान कहो

दिल्ली में भड़की हिंसा पर व्यंग्य लेख  खून…खून…खून…खून! जहाँ देखो वहाँ खून ही खून। पूर्वी दिल्ली के मौजपुर और जाफराबाद सुर्खियों में थे। दंगे हिंदू-मुस्लिम के नाम पर हो रहे

फांसी का फंदा अब स्वयं फांसी पर !

आसमान में काले बादल मंडरा रहे थे। वहां पर गिद्धों की एक टोली इस पर पूरी नजर लगाई हुई दिखी। सिस्टम की नाकामी की धूल के गुबार उठ रहे थे।

व्यंग्य : किराये की कोख का सौदा

रामरतन बाबू बड़े ध्यान से टी.वी. पर समाचार देख रहे थे। समाचार में ऐसा कौनसा अलाउद्दीन का खजाना मिल गया कि वे तुरंत अपनी धर्मपत्नी को जोर-जोर से आवाज देने

व्यंग्य : प्री होली बैंच मार्क कार्यक्रम!

प्यारे दोस्तो! सामने होली का त्यौहार दिखाई पड़ रहा है। इस मौके पर हमें अच्छी खासी तैयारी करनी पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि यह त्योहारों की

व्यंग्य : बेगम ने पाल रखे हैं दो-दो करारे जिन्न

जिन्न गायब हो सकते हैं। उड़ सकते हैं, किसी भी जीव, जंतु, महल, किला, इंसान या वस्तु का रूप धारण कर सकते है। जिन्न किसी भी स्थान तक मात्र अपनी

व्यंग्य लेख : एक करोड़ की जीभ !

एक बेरोजगार युवक सुबह-सुबह अपने निर्वाचन क्षेत्र के सांसद के घर जा पहुँचा। जैसे ही वह पहुँचा आव देखा न ताव अपशब्दों की झड़ी लगा दी। द्वाररक्षक उसे भगाने की

व्यंग्य : उंगली उठाने से पहले…

मोहन को लगता है कि पिछले कुछ दिनों से उसकी पत्नी ठीक से सुन नहीं पा रही है। वह इसके बारे में अपनी पत्नी से बात करना चाहता है। किंतु

व्यंग : गुजराती अमिरी का दीवार

बुझावन पांडे अउरी मंगरू काका भोर में ही मोदी ब्रांड कुर्ता पजामा पहनकर ट्रंप के झलक पाने को सड़क किनारे उसी दीवार से अडकर जमे थे जो गुजरात के अमीरी