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Category: व्यंग्य

Total 139 Posts

व्यंग्य : शव की बेचैनी और आत्मा को सुकून

अब तो शव बहुत बुरी तरह से बिफर गया था।यह शव विक्रमार्क के कांधे पर लटका बेताल का शव नहीं था बल्कि कोरोना का सताया हुआ आदम जात था ।कितनी

(व्यंग्य) डी.ए. : तुम्हे एक विनम्र भावांजली

केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को जनवरी-2020 में मिलनवाला डी.ए. फ्रिज क्या किया कि जैसे एक को देख दूसरा रंग बदलने लगता है, उसी तर्ज पर बहुत सी राज्य सरकारों

व्यंग्य : झाम बाबा के चश्मा

जब से गोरखपुर वाले झाम बाबा र्थी ट्रिलियन डॉलर इकोनामी की बात इडियट बॉक्सवा में देखे हैं,उनको मुल्क ए हिंद के प्रत्येक गांव सिंगापुर और कुआलालंपुर सरीखे दिखने लगे हैं।जहां

व्यंग्य लेख : ताली-थाली बजवा के अबके छाती पे मुक्का मरवाएंगे

‘विधना तेरे लेख किसी के, समझ न आते हैं सबके कष्ट मिटाने वाले, और कष्ट उठाते हैं’। आप सोच रहे होंगे कि आज ये गम्भीर हास्य पुट की जगह अचानक

हास्य-व्यंग्य : झूठ की नींव पर सच की इमारत

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। शायद आपने भी पढ़ी होगी। वही जिसमें एक गड़रिया भेड़ों को चराता था। रह-रहकर गाँव वालों से मजाक करता था- शेर आया, शेर आया।

हास्य-व्यंग्य : चीन न जाने का सुख

आज से कुछ माह पूर्व मेरे एक मित्र मुझसे मिलने घर आए और कहा-अगर चीन जाना चाहो तो चले जाओ बड़ा अच्छा मौका है। वहां बहुत अच्छा वेतन मिलेगा। मेरे

व्यंग्य : सब्र करो, अपने भी अच्छे दिन आएंगे

सब्र करो, अपने भी अच्छे दिन आएंगे, औरों की तरह ये दिन भी गुजर जाएंगे शाम को राशन का सामान लेने के दौरान कल एक मित्र मिल गए। साथ काम

व्यंग्य : मछीकी और मास्क

लाॅक डाउन के चलते सूनी सड़कें, सूनी गलियां आजकल एक आम बात हो गई । कहाँ तो आवारा जानवरों को दिन-रात चलने-फिरने ,उठने-बैठने में बहुत ही परेशानी का सामना करना

व्यंग्य : ऐ चायना ! तूने ये क्या किया ?

इस लेखक को दुनिया की किसी भी चीज, दुनिया की किसी भी बात, दुनिया के किसी भी हथियार, दुनिया की किसी भी ताकत से इतना डर नहीं लगता है, जितना

व्यंग्य : जिंदगी का लॉकडाउन

हृदय को छू लेने वाली व्यंग्य रचना सुबह से दिमाग खराब था। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। लॉकडाउन के चलते न घर में रहे बनता था न

व्यंग्य : ऊहो अबकी पास कर गया

मैट्रिक इम्तिहान में पांच बार फेल होने के बाद जब इस वर्ष मंगरा इंटरमीडिएट की इम्तिहान दे रहा था तो उसके मन में धुकधुकी लगा हुआ था।इम्तिहान के पहले दिन

हास्य-व्यंग्य : भूरा छूट गया

अचानक गांव में दिखाई पड़े संगीन अपराधी भूरा से मैंने पूछा-और भैया क्या हाल-चाल है। पैरोल पर कब छूट कर आए। वह बत्तीसी निकाल कर बोला- अरे! पैरोल पर नहीं

1 अप्रैल – मूर्ख दिवस के अवसर पर व्यंग्य : मूर्ख की पहचान

एक दिन मुझे लगा कि मेरे चारों ओर मूर्खों की संख्या अधिक हो गयी है। मुझे इन मूर्खों का पता लगाने की इच्छा हुई। इसके लिए मैंने अपने एक घनिष्ठ

हास्य-व्यंग्य : कोरोना भगाओ यज्ञ का आयोजन

फिलहाल हम लोग कोरोना को भगाने के लिए अपनी कालोनी में आध्यात्मिक प्रयास बहुत तेज कर दिए हैं। पूजा-पाठ निरन्तर सबके घरों में दिन-रात हो रहा है। घर-घर से चंदा

व्यंग्य लेख  : श्री श्री श्री कोरोना महाराज!

यशवंत फिल्म का एक डायलॉग है- एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है। गनीमत मनाइए कि कम-से-कम यहाँ एक मच्छर तो है, जो हमें नंगी आँखों से दिखायी

हास्य-व्यंग्य : थाली-शंख बजाओ कोरोना भगाओ

चलो मित्रों ये बहुत अच्छा हुआ कि कोराना भगाने के लिए एक बहुत अच्छा टोटका मिल गया। पूरी दुनिया में जब कोरोना भगाने के लिए हाहाकार मचा हुआ है। हजारों

व्यंग्य : अहिंसावादी रामलुभाया जी और लेखक

जैसा कि आप सभी को यह मालूम ही होगा कि हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी ने अहिंसा को जीवन में बहुत बड़ा स्थान दिया था। अहिंसा, वास्तव में है

हास्य-व्यंग्य : बुजुर्ग हकीम ने ईजाद की कोरोना की दवा

एक कस्बाई प्राइवेट बस में अपने गन्तव्य पर जाने के लिए मैं बैठा हूं, बस यात्रियों से फुल है। अब चले, तब चले यही गझिन चिन्ताएं यात्रियों के चेहरों पर

व्यंग्य : लकीर पीटने का मजा ही कुछ और!

आज तक मैंने जितने भी कदम उठाए हुए वे सब अहिंसा वादी कदम थे। वह तो गांधीजी की किस्मत अच्छी थी कि उस जमाने में मेरा अवतार नहीं हुआ वरना

हास्य-व्यंग्य : चलो सेमिनार-सेमिनार खेलते हैं…

मेरे एक अच्छे मित्र हैं। ऊँचे पद पर काम करते हैं। उनकी पत्नी भी काफ़ी पढ़ी-लिखी हैं। शिक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। दोनों के प्रति मेरे हृदय में सम्मान

व्यंग्य : अपने विधायक रखना जरा संभाल के

समकालीन भारतीय राजनीति में दृश्य चकाचक नजर आ रहे हैं। कोई एक तरफ विधायकों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कोई किसी और के विधायकों पर डोरे डाल रहे

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