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Category: महिला दिवस

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त्याग-समर्पण स्नेह धैर्य व दायित्व की प्रतिमूर्ति “माँ” महिला का सबसे शक्तिशाली स्वरूप

“अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस” जो समाज में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान और उपलब्धियों पर ध्यान आकर्षित करके केन्द्रित करने के लिये विश्व भर में 8 मार्च को हर वर्ष मनाया जाता

कविता : शक्ति स्वरूप नारी

शक्ति स्वरूप नारी न क्रुंदन करती ना ही चित्कार करती कभी न किसी को वो तिरस्कार करती। रूप बदलकर आती, सभी अवस्थाओ में वो तो सिर्फ हृदय से, हमें प्यार

महिलाओं को देना होगा सम्मान

विश्व महिला दिवस 8 मार्च पर विशेष हर वर्ष 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता

नारी के बिना अधूरी है दुनिया

हमारी भारतीय संस्कृति ने सदैव ही नारी जाति का स्थान पूज्यनीय एवं वन्दनीय रहा है, नारी का रूप चाहे मां के रूप में हो, बहन के रुप में हो, बेटी

कविता : बेबस नारी

बेबस नारी हर पल घबराती है डर को अपने में दबाये जूठी हंसीं दिखती है। बेबस नारी का हँसना बहुतों को नही सुहाता है मन ही मन में बेचारी बस

कविता : नारी

नारी दुर्गा, काली ,चामुण्डा,लक्ष्मी,चण्डी, सरस्वती, ऋदि – सिद्धि है नारी| तु स्वयं में समाती उन हर रूपों को, जितने सुने है देवी के रूप अवतारी| नर के वर्चस्व वाले क्षेत्रों

कविता : नए युग की नारी

नए युग की नारी अपनी उड़ान तुम्हें स्वयं भरना है मुँह किसी का ना यूं ही तकना है साहस, हौसले से आगे बढ़ना है हर गलत आदत को नकार देना

बिन नारी सब सून…

8 मार्च – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष लेख “अभी रौशन हुआ जाता है रास्ता वो देखो एक औरत आ रही है” शकील जमाली की इन पंक्तियों में महिला की

महिला दिवस पर मुकेश बिस्सा की दो कविताएं

महिला दिवस पर मुकेश बिस्सा की दो कविताएं कविता नंबर एक  : स्त्री है वो जलती है वो हर पल आज भी जलते हैँ उसके अरमाँ हर पल धुआँ होती

महिला समानता और सामाजिक योगदान

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। भले ही सन 1910 से यह दिवस मनाया जा रहा है, अगर आंकड़ों पर गौर करें तो दिल दहल जायेगा। हकीकत

कविता : नारी शक्ति

नारी शक्ति हे नारी! जग हित के लिए, है आज यही आह्वान मेरा, जागो, उठकर जीवन से अपने, दूर करो ये अंधेरा! ये नव प्रभात की नई सुनहरी, किरणें तुम्हें

संसार के लिए पूजनीय है महिलाएं

“नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो, टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो।” अपनी ममता और आंसुओ से देश का बचपन सँवारने वाली औरत , मां , बेटी

कविता : स्त्री जैसा कौन है यहां

स्त्री जैसा कौन है यहां स्त्री पुरुष इस जहां के, दो सबसे खूबसूरत फूल। प्रकृति प्रदत अनमोल जीवन को, आगे बढ़ा रहे एक दूजे से मिल। स्त्री खूबसूरत वसुंधरा के

सशक्त महिला सशक्त समाज

महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या व्यापार का अथवा देश को चलाने की बात हो

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