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Category: होली

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होली एक विशेष पर्व

रंगो का पर्व होली विशेषांक में विशेष है। यह हुडदंगों के साथ तथा गाकर बजाकर चिढाकर खेलते है। वही होरियार है अर्थात (होरि यार) यारो संग होरी । शरद की

शेखावाटी में फीकी पड़ती होली की रंगत

राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपने आप में अनेकों विविधताओं समाये हुए हैं। यहां के लोगों का रहन-सहन, खानपान, त्योहार मनाने का तरीका अलग है। त्योहारों के अवसर पर यह क्षेत्र

होली आई

होली आई , होली आई, अपने साथ मानवता लाई ना कोई रंगों का भेदभाव…….. खुशियों की बौछार है लायी, रंग बिरंगे गुलाल बिखेरती , रंगों का त्यौहार है आयी ……..

होली

सामाजिक सद्भाव और प्रेम का पर्व है- होली। यद्यपि होली को पौराणिक संदर्भों के अनुसार भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका के संदर्भ में व्याख्यायित किया गया है किन्तु वास्तव

श्री गुरु कृपा श्याम मंदिर में फागोत्सव उल्लास से मनाया

डॉ.शंभू पवार/विजय न्यूज़ नेटवर्क. चिड़ावा। पिलानी रोड़ पर स्थित श्री गुरु कृपा श्याम मंदिर में फाल्गुन एकादशी पर फागोत्सव बड़े उत्साह और उमंग से मनाया गया। इस अवसर पर फतेहपुर

होली के गीले रंग आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं

होली के दौरान हमारे शरीर के जिन अंगों को नुकसान पहुंच सकता है उनमें हमारी आंखें सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं। गीले रंग पानी में आसानी से घुल जाते हैं

दोस्ती का रंग

दोस्ती का रंग हमसे पूछिए ज़रा सा हमसे दिल लगाकर ज़रा सा मुस्कुरा कर देखिए। दोस्ती होती नहीं है मोहब्बत से कम ज़रा हमारे साथ चल कर, ज़रा सा हमारे

शेखावाटी की होली में समाहित है स्नेह की मिठास

रंगों का त्योहार होली और वह भी राजस्थान में शेखावाटी अंचल में यह सुनकर ही हर कोई उत्साह व उमंग से सरोबार हो जाता है। होली के रंग-बिरंगे रंगों में

होली गीत

होरी खेलन आयो, सखी री देखो श्याम हठीलो मानत न वो विनती मोरी, करत रहत मो संग बरजोरी मोको बहुत सतायो, सखी री देखो श्याम हठीलो सात रंगन से भर

जीवन के रंग में उजास के रंग भर दो: डॉ. भावना शर्मा

डॉ. शम्भू पंवार नई दिल्ली. रंगो का त्योहार आ रहा है और आज आकस्मिक रूप से मिलना हुआ डॉ भावना शर्मा से जो झुंझुनूं नंदीशाला में अपनी सहेलियों के साथ

होली की शास्त्रानुसार रचना एवं होली मनाने की उचित पद्धति

28 मार्च को मनाये जाने वाले होलिकादहन त्यौहार के बार में शास्त्र अनुसार जानकारी! होली की एक पुरुष जितनी ऊंचाई होना क्यों आवश्यक है ?  होली के कारण साधारणतः मध्य वायुमंडल एवं भूमि के पृष्ठभाग के निकट का वायुमंडल शुद्ध होने की मात्रा अधिक होती है ।होली की ऊंचाई एक पुरुष जितनी बनाने से होली द्वारा प्रक्षेपित तेज की तरंगों के कारण ऊर्ध्वदिशा का वायूमंडल शुद्ध बनता है । तत्पश्चात् यह ऊर्जा जडता धारण करती है एवं मध्य वायुमंडल तथा भूमि के पृष्ठभाग के निकट के वायुमंडल में घनीभूत होने लगती है । इसी कारण से होली की ऊंचाई साधारणतः पांच-छः फुट होनी चाहिए । इससे शंकुस्वरूप रिक्ति में तेज की तरंगें घनीभूत होती हैं एवं मध्यमंडल में उससे आवश्यक ऊर्जा निर्मित होती है ।   होली के मध्य में खडा करने के लिए विशिष्ट पेडों का ही उपयोग क्यों किया जाता है ?  होली की रचना करते समय मध्यस्थान पर गन्ना, अरंड तथा सुपारी के पेड का तना खडा करने का आधारभूत शास्त्र गन्ना : गन्ना भी प्रवाही रजोगुणी तरंगों का प्रक्षेपण करने में अग्रसर होता है । इसकी स समीपता के कारण होली में विद्यमान शक्तिरूपी तेजतरंगें प्रक्षेपित होने में सहायता मिलती है । गन्ने का तना होली में घनीभूत हुए अग्नि रूपी तेजतत्त्व को प्रवाही बनाता है एवं वायुमंडल में इस तत्त्व का फुवारे समान प्रक्षेपण करता है । यह रजोगुण युक्त तरंगों का फुवारा परिसर में विद्यमान रज-तमात्मक तरंगों को नष्ट करता है । इस कारण वायुमंडल की शुद्धि होने में सहायता मिलती है । अरंड : अरंड से निकलने वाले धुए के कारण अनिष्ट शक्तियों द्वारा वातावरण में प्रक्षेपित की गई दुर्गंधयुक्त वायु नष्ट होती है । सुपारी : मूलतः रजोगुण धारण करना यह सुपारी की विशेषता है । इस रजोगुण की सहायता से होली में विद्यमान तेजतत्त्व की कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है । होली की रचना में गाय के गोबर से बने उपलों के उपयोग का महत्त्व गाय में 33 करोड देवताओं का वास होता है । इसका अर्थ है, ब्रह्मांड में विद्यमान सभी देवताओं के तत्त्वतरंगों को आकृष्ट करने की अत्यधिक क्षमता गाय में होती है । इसीलिए उसे गौमाता कहते हैं । यही कारण है कि गौमाता से प्राप्त सभी वस्तुएं भी उतनी ही सात्त्विक एवं पवित्र होती हैं । गोबर से बनाए उपलों में से 5 प्रतिशत सात्त्विकता का प्रक्षेपण होता है, तो अन्य उपलों से प्रक्षेपित होने वाली सात्त्विकता का प्रमाण केवल 2 प्रतिशत ही रहता है । अन्य उपलों में अनिष्ट शक्तियों की शक्ति आकृष्ट होने की संभावना भी होती है । इससे व्यक्ति की ओर कष्टदायक शक्ति प्रक्षेपित हो सकती है । कई स्थानों पर लोग होलिका पूजन षोडशोपचारों के साथ करते हैं । यदि यह संभव न हो, तो न्यूनतम पंचोपचार पूजन तो अवश्य करना चाहिए ।

होली पर्व – बुरा मानें या न मानें?

होली के दिन यदि कोई आपके ऊपर रंग डाले, तो क्या बुरा मानने वाली बात है? बिल्कुल नहीं। अगर कोई खुशी में झूमे-नाचे, तो क्या बुरा मानने वाली बातहै? बिल्कुल

Holi 2021: होलाष्टक कब से आरंभ होगा? जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

होली का पर्व पंचांग के अनुसार 28 मार्च को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा. धार्मिक दृष्टि मार्च का महीना बहुत ही विशेष है. इसी

मन को ईश्वरीय रंग में रंग कर मनाए दिव्य होली

होली के दिन कोई आपके ऊपर रंग डाले, तो क्‍या बुरा मानने वाली बात है? बिल्कुल नहीं। अगर कोई पिचकारी से रंगों की बौछार करे, तो क्‍या बुरा मानने वाली

होली पर धुलेंडी (धूलिवंदन) मनाने का शास्त्रीय आधार

होली ब्रह्मांड का एक तेजोत्सव है । होली के दिन ब्रह्मांड में विविध तेजोमय तरंगों का भ्रमण बढता है । इसके कारण अनेक रंग आवश्यकता के अनुसार साकार होते हैं

सामाजिक भाईचारे का त्योहार है होली

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाला रंगों से भरा हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी

कविता : मुबारक हो तुम्हें ..

मुबारक हो तुम्हें .. फाल्गुन की पहली फुहार , मुबारक हो तुम्हें… ये फाल्गुन की बीती यादें , मुबारक हो तुम्हें … इश्क , फिजा ,ये नज्म की बहार ,

क्यों किया जाता है होलिका दहन? ये है पौराणिक कहानी

परंपराएं जीवन शैली को समृद्ध करती हैं और मनुष्य के जीवन को सक्षम बनाती हैं. भारत का श्रृंगार करतीं ये परंपराएं ही भारत को महान बनाती हैं. होलिका दहन में

होली पर नीरज त्यागी की दो कविताएं

होली पर नीरज त्यागी की दो कविताएं 1. अपनेपन की पिचकारी अपनेपन के रंगों से मन की पिचकारी भर दो। अबके होली में तुम सबको एक रंग में भर दो।।

व्यंग्य : रंगों की रंगदारी !

यादों में अब भी गूंजता है – रंगीला रे, तेरे रंग में, यूं रंगा है मेरा मन.. सच ! रंग रंगीले होते हैं। जहां रंगों का फीका पड़ जाना शुभ

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