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संप्रदायिकता कोरोना वायरस से लाख गुना खतरनाक

एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस के कहर से कराह रही है।उसका काट और इलाज खोजने में दुनिया भर के वैज्ञानिक दिन रात एक किए हुए हैं।लेकिन अभी तक सफलता हासिल नहीं हुई है।यह वायरस एक-एक कर दुनिया में तेजी से अपना पांव पसारता जा रहा है। लोग इस के डर से भयाक्रांत है। कोरोना वायरस के जन्मस्थली चीन में हर दिन कई लोगों को अपना जान गंवाना पड़ रहा है। वहां पढ़ाई और काम कर रहे दुनिया के अन्य देशों के लोग जितना जल्द हो सके चीन छोड़ने को बेताब है लेकिन उनका मूल वतन उन्हें जल्दी लाने को इच्छुक नहीं है कारण कोरना वायरस के फैलाव का डर।
कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए आज नहीं तो कल कोई टीका जरूर विकसित कर लिया जाएगा। जिससे इससे होने वाले नुकसान को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस वायरस से मिले दर्द को समय के साथ दुनिया भुला देगी।लेकिन दुनिया के अन्य देशों के साथ भारत में भी जिस तरह से संप्रदायिकता का वायरस आए दिन सिर उठाने लगा है इसका खामियाजा देश को जान माल के साथ साथ आपस में गहरी अविश्वास का पनपना है। जिसका कोई निराकरण नहीं होता ।क्योंकि इस संप्रदायिक वायरस से प्रभावित लोग और परिवार और उनके आने वाली पीढ़ियां इस कदर ग्रसित होती है कि वह मौका मिलते ही पलटवार करने का सपना देखते रहती है। इस वायरस के वाहक तत्व अपने छुपी हुई लालच को सिद्ध करने के लिए वैसे लोगों का चुनाव करते हैं जो दूसरे के गंदी मानसिकता को पहचानने में असमर्थ होते हैं।इसी कारण इस तरह के घृणित मानसिकता वाले लोग देश के सामाजिक एवं धार्मिक सौहार्द को खतरे में डालकर अपना उल्लू सीधा करने में कामयाब हो जाते हैं।

हमेशा देखा गया है इस तरह के संप्रदायिकता के वाहक पढ़े लिखे शातिर लोग होते हैं पर इसका शिकार कम पढ़े लिखे और कम उम्र के और समझदार लोग होते हैं।बहुत कम ना के बराबर देखा गया है इस तरह की घटनाओं में किसी रसूखदार लोग प्रभावित होते हैं।शातिर लोग मासूम लोगों को नफरत की आग में झोंककर खुद पीछे से उसमें आग में घी डालने का कार्य करते रहते हैं जान माल भी मासूम लोगों को गंवाना पड़ता है और बाद में कानून का डंडा भी उन्हें ही सहना पड़ता है।शातिर लोग बच ही निकलते बल्कि इसका उपयोग अपने सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक लाभ के रूप में करने में कामयाब हो जाते हैं।काम रोजगार के इंतजार कर रहे लोगों के दिमाग में इस कदर जहर फैला दिया जाता है कि वे अपने माता-पिता और समाज के दिए गए संस्कार को भूलकर एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।
संप्रदायिकता रूपी वायरस से जितना जल्द हो सके सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि हमारे वतन की फिजा में इसका जहर इतना ना घोल दे की फिर उससे पार पाना नामुमकिन हो जाए। उत्तर प्रदेश दिल्ली कुछ अन्य जगह में जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से देशद्रोही तत्वों द्वारा संप्रदायिकता रुपी वायरस को फैलाने का कार्य किया जा रहा है वह गंभीर चिंता का विषय है।इस वायरस के फैलने में कुछ वैसे लोग भी शामिल है जो अपनी भविष्य की राजनीति को निर्धारित करने के लिए इसको हथियार के रूप में अजमा रहे हैं। देश में एक आम धारणा बनते जा रहा है की जिस नेता पर जितने आरोप होंगे वह नेता उतना आगे बढ़ेगा क्योंकि वह कानून के समक्ष साबित कर देता है मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप विपक्षियों के साजिश है।मेरा मानना है केंद्र सरकार और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को एक ऐसा कानून बनाना चाहिए जो सांप्रदायिकता फैलाने के जिम्मेवार हो अगर वह सरकार के किसी पद पर बैठा हो तो उसे आजीवन किसी पद धारण करने से अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए साथ ही उसे दंड कम से कम आजीवन कारावास की सजा के रूप में दिया जाना चाहिए। अगर इस वायरस का वाहक कोई संगठन समूह या दल हो तो उस पर हमेशा हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। ताकि आने वाले समय में भारत को फिर कोई गोधरा दंगा 1984 का दिल्ली दंगा मुजफ्फरनगर दंगा वर्तमान उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा के अभिशाप से दो चार नहीं होना पड़े।
यह स्पष्ट है इस तरह के कृत्य बिना व्यापक कार्ययोजना बनाए नहीं किए जा सकते हैं।इसलिए इस तरह की घटनाओं का संयुक्त संसदीय समिति या सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान किसी न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच होनी चाहिए।इस तरह के घटनाओं के रोकने में असफल अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त कार्रवाई किया जाना चाहिए।ताकि भविष्य में कोई अधिकारी और कर्मी अपने कर्तव्य में लापरवाही नहीं बरत सके। सरकार की भी जिम्मेवारी निर्धारित किया जाना चाहिए की वह समय रहते इस तरह के असामाजिक देशद्रोही तत्वों से सख्ती से निपटें और अगर वह निपटने में असफल हो तो उस पर भी न्यायिक जांच बैठाया जाना चाहिए।
सार्वजनिक जगहों पर भड़काऊ बयान देने वाले लोगों को तुरंत गिरफ्तार करते हुए कम से कम एक माह तक नजर बंद कर दिया जाना चाहिए।वह चाहे आम लोग हो या महत्वपूर्ण पद पर बैठे जिम्मेवार लोग।अगर उन पर लगा आरोप सही साबित हो जाए तो आजीवन कारावास की सजा निर्धारित हो।
सार्वजनिक जगहों पर अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर किए जाने वाले धरना प्रदर्शन जुलूस के लिए एक समय सीमा निर्धारित किया जाना चाहिए ताकि इससे अन्य लोगों को असुविधा ना हो।लंबे समय तक अपने धरना प्रदर्शन को जारी रहे तो उसके लिए कोई सुरक्षित स्थान निर्धारित कर दिया जाना चाहिए।जहां वे अपने मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर सकें। संवैधानिक अधिकारों के पीछे किसी को देश के फिजा में जहर घोलने का अधिकार नहीं है ।अगर कोई ऐसा करता है तो उसे भारतीय कानून के अंतर्गत सजा दी जानी चाहिए।इस तरह के कृत्य अगर सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा किया जाए तो वैसे लोगों पर दोहरी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि देश में कानून के प्रति श्रद्धा और विश्वास एक समान बना रह सके।ऐसा ना हो कि सत्ता के मद में चूर होकर कुछ लोग खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते रहे और उन पर करवाई करने से पहले सुरक्षा अधिकारियों के हाथ-पांव फूलता रहे।कानून का डर जितना आम लोगों में हो उतना ही सत्ताधारी लोगों में भी होना चाहिए।
देश में बनने वाले वैसे कानून जिससे देश के बहुत बड़े हिस्से पर प्रभाव पड़ने वाला हो को लागू करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय के अनुमति लेना जरूरी कर दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस पर कोई वाद विवाद का जगह नहीं बच सके।
जिस तरह से चुनाव के समय चुनाव आयोग निर्णय निर्णय के लिए स्वतंत्र होता है उसी तरह से संप्रदायिक माहौल उत्पन्न होने पर सांप्रदायिक घटनाएं होने की संभावना मात्र पर जिलाधिकारी और जिला पुलिस पदाधिकारी को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए ताकि किसी के आदेश के इंतजार में विखंडन वादी ताकते अपने उद्देश्य में सफल हो जाए और किसी मासूम की जान चली जाए या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हो जाए।तत्काल घटित दिल्ली की घटना को देखा जा सकता है जैसे ही पुलिस प्रशासन को माहौल से निपटने की छूट दी गई 24 घंटा के अंदर पूरा माहौल प्रशासन के कंट्रोल में आ गया और फिर आगे कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई। जब तक पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव बंधे थे तब तक ही विखंडन वादी ताकते टांडव करते रहे। ना जाने की मजबूरियों और परिस्थितियों में निर्णय लेने में चूक हुई। अगर समय रहते निर्णय लिया गया होता तो आज देश 35 लोगों के मौत के कलंक से कलंकित नहीं होता।देश में इस तरह की व्यवस्था कर दी जाए तो मुझे पूरी उम्मीद है न तो राजनीतिक लोगों को इसका फायदा मिलेगा नाही विखंडन वादी ताकतों को जो अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी राजनीतिक दल के सह पर इस तरह के कार्य करते हैं उनको। क्योंकि ऐसा माना जाता है संप्रदायिक घटनाएं अपने आप नहीं होते बल्कि इसके पीछे कोई ना कोई संगठित तत्व काम जरूर कार्य करता है और यह उन्हीं के द्वारा करवाया जाता है।
विखंडन वादी तत्वों को अपने संप्रदायिक वायरस को फैलाने में कुछ गैर जिम्मेवार समाचार प्रसारक टीवी चैनल व्हाट्सएप ग्रुप सोशल मीडिया ग्रुप्स एवं कुछ अन्य मीडिया के साधन भी सहयोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करते हैं।ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए एक स्वतंत्र नियामक बनाए जाने की जरूरत है ताकि अगर उस नियामक को लगे कि इस तरह के समाचार और परिचर्चा टीवी डिबेट देश के माहौल को खराब कर सकता है तो उस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए तुरंत रोक लगा सके।इस नियामक का अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के कार्यरत किसी न्यायाधीश को बनाया जाना चाहिए।इस तरह के टीवी प्रसारण कार्यक्रम अखबार सोशल मीडिया ग्रुप आदि के बारे में जानकारी देने के लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाए जहां आम लोगअपनी शिकायत दर्ज करा सकें। तदोपरांत उन शिकायतों की जांच कर शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई हो।
कोरोना वायरस को मारने से पहले संप्रदायिकता के वायरस को जमींदोज करने की जरूरत है इसके लिए एक लंबी अवधि की व्यापक कार्य योजना बनाकर काम किया जाना चाहिए। ताकि देश किसी गांव कस्बा मुहल्ला या शहर को फिर संप्रदायिकता के वायरस अक्रांत होना पड़े।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
सामाजिक और राजनीतिक चिंतक
देवदत्तपुर दाउदनगर औरंगाबाद बिहार
व्हाट्सएप नंबर 95 07 34 1433

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