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हर रोज ठगे जा रहे हैं भारत में उपभोक्ताः दयानंद वत्स

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर सरे आम राष्ट्रीय चैनलों पर चल रही है ऑन लाइन ठगी की दुकानें, हर रोज ठगे जा रहे हैं भारत में उपभोक्ताः दयानंद वत्स

विजय न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के तत्वावधान में आज संघ के राष्ट्रीय महासचिव दयानंद वत्स की अध्यक्षता में संघ के मुख्यालय बरवाला में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस, उपभोक्ता जागरूकता दिवस के रुप में मनाया गया। इस अवसर.पर अपने संबोधन में श्री दयानंद वत्स ने कहा कि आजादी के 72 साल बाद भी समूचे भारत में हर क्षण उपभोक्ताओं को ठगा जा रहा है। दूध, दुग्ध पदार्थों, तेलों, दवाईयों तक में मिलावट खुले आम जारी है। पूरे पैसे खर्च करने के बावजूद उपभोक्ताओं को इस बात की गारंटी देने वाली कोई नियामक नियंत्रण ऐजेंसी नही है कि जो वस्तु वे खरीद रहे हैं वह मिलावटी नहीं है। बडे खाधान्न सामग्री बनाने वाले उत्पादन कर्ता, बडे वितरक और रिटेल वितरकों तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों एवं पुनर्वास बस्तियों में फैले करोड़ों दुकानदारों का इतना संगठित तंत्र विकसित हो गया है कि वे क्षेत्र विशेष के अनुसार अपने उत्पादों को ग्रेडिंग के अनुसार बाजारों में खपा रहे हैं। पैकेजिंग, मूल्य, वजन सब समान होता है परन्तु पैकेट के अंदर की वस्तु की गुणवत्ता और ग्रेडिंग उस क्षेत्र विशेष की श्रेणी अनुसार हो रहा है। नई दिल्ली के वीआईपी पॉश एरिया में सप्लाई किए जाने वाला सामान सर्वोत्तम ए श्रेणी का तो जहांगीरपुरी में डी ग्रेड और गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में ई यानि सबसे घटिया श्रेणी का सामान की पैकेजिंग भेजी जाती है। कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले अधिक कमीशन के लालच में दुकानदार रह कुकृत्य कर मानवता के विरुद्ध जघन्यतम अपराध कर रहे हैं। जब कोई उपभोक्ता शिकायत करता है तो तत्काल नया पैकेट बदल देते हैं ताकि उपभोक्ता का विश्वास जीता जा सके। एक्सपायरी डेट के सामानों को पुरानी पैकिंग से निकाल कर नई पैकिंग में नयी डेट के साथ खपाया जा रहा है। उपभोक्ता इस गडबडझाले क़ समझ ही नहीं पाता है.ओर.ठगा जाता है। श्री वत्स ने कहा कि मेरे गांव बरवाला और पडोस के प्रहलादपुर बांगर गांव में सप्लाई होने वाले पैकेटबंद अमुल दूध की गुणवत्ता और.स्वाद में अंतर स्पष्ट दिखता है जैसे हम डिटरजेंट मिक्स दूध ही पी रहे हैं जो किसी दिन सफेद तो कभी पीलापन लिए रहता है।अमुल के कस्टमर केयर पर शिकायतों की कोई सुनवाई तक नहीं है। कंपनियों ने जो कस्टमर केयर नंबर दिए हैं वे खानापूर्ति के लिए ही हैं। जब शिक्षित लोग भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो अशिक्षित लोगों का शोषण होना तय है। ऑन लाइन तो करोड़ों उपभोक्ताओं को आसानी से ठगा जा रहा है। जोडों का दर्द, शूगर डायबिटीज, कामशक्ति वर्धन, तिल मस्सों को हटाने से लेकर हर मर्ज की दवा सरेआम राष्ट्रीय चैनलों पर आनलाइन बेचे जा रहे है और लोग इन शातिरों के चंगुल में फंस रहे हैं। यही हाल समाचार पत्रों में छपे भ्रामक विज्ञापनों का है।

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