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कोरोना महामारी में हुआ लाखों हिन्दुओं का धर्मांतरण ऑनलाईन संवाद में हुआ खुलासा

बीकानेर। हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिन्दे ने जानकारी देते हुए बताया कि समिति द्वारा ऑनलाइन विशेष संवाद ‘चर्चा हिन्दू राष्ट्र की’ का आयोजन किया गया जिसका विषय था ‘कोरोना महामारी में भी लाखों हिन्दुओं का धर्मांतरण-क्यों और कैसे?’ जिसे फेसबुक और ‘यू-ट्यूब’ के माध्यम से 14777 लोगों ने देखा। संवाद में इंदौर के श्री अखण्डानन्द आदिवासी गुरुकुल आश्रम के महामण्डलेश्वर आचार्य स्वामी श्री प्रणवानन्द सरस्वती महाराजजी ने कहा कि धर्मांतरण करनेवाले मान रहे हैं कि ‘यह काल हिन्दुओं को धर्मांतरित करने का बडा अवसर है’ और वैसा प्रयास भी वे कर रहे हैं। प्राकृतिक आपदा, युद्ध, नक्सलवाद आदि के समय हिन्दुओं का धर्मांतरण होता ही रहे, ऐसी इच्छा धर्मांतरण करने वाले ईसाई मिशनरियों की है। हिन्दुओं के देवताओं के सन्दर्भ में घृणा निर्माण कर और ‘ईसाई पंथ के अनुसार आचरण करने पर, येशू का नाम जपने पर कोरोना कुछ नहीं कर सकता’, ऐसा बताकर ईसाई मिशनरी धर्मांतरण कर रहे हैं। यह मानवता पर एक कलंक है। हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता चेतन जनार्दन ने कहा कि, ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’ इस संस्था के विशेष कार्यकारी अधिकारी डेविड रिव्हस् ने हाल ही में बताया कि ‘हमारी संस्था की ओर से कोरोना के काल में भारत के एक लाख हिन्दुओं का धर्मांतरण किया गया और चर्च द्वारा 50 हजार गांव दत्तक लिए गए।’
आंध्र प्रदेश के ‘हिन्दू देवालय परीक्षण समिति’ के कृष्णा जिला समन्वयक के. उमाशंकर ने कहा, ‘चर्च और मस्जिद को प्राप्त धनराशि का उपयोग उनके पंथ के प्रचार-प्रसार में किया जाता है; लेकिन हिन्दुओं के मंदिरों पर नियंत्रण प्राप्त कर मंदिर की धनराशि का उपयोग सरकारी कामों के लिए किया जाता है। भारत के और 2-3 टुकडे होने से रोकना हो, तो देश में ‘धर्मांतरण बंदी’ कानून लाना होगा। संवाद को सम्बोधित करते हुए मुम्बई के वैद्यकीय विशेषज्ञ डॉ. अमित थडानी ने कहा कि, चिकित्सालयों में विभिन्न प्रकार से लालच देकर हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जाता है। यह अनेक लोगों को ज्ञात है लेकिन कोई चर्चा नहीं करता, जब इस पर खुली चर्चा होगी, तब जागृति आने में समय नहीं लगेगा।

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