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सीयूसीईटी देश के 54 विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा

NEW DELHI, INDIA – JUNE 30, 2010: Outside view of Jamia Millia Islamia University.(Photo by Pradeep Gaur/Mint via Getty Images)

अंकित कपूर/विजय न्यूज़ नेटवर्क.

नई दिल्ली. हाल के दिनों में भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के तहत अब देश के केंद्रीय राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में अंडर ग्रैजुएट इंटिग्रेटेड, पोस्ट ग्रैजुएट और शोध अध्ययनों में दाखिले के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा यानी केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूसीईटी) का आयोजन किया जा रहा है। इस शैक्षणिक वर्ष में आए एक बड़े बदलाव के तहत देश के 54 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा को सीयूसीईटी नाम दिया गया है।
अनुमान है कि सीयूसीईटी का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित कराया जाएगा। हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी शैक्षणिक सत्र 2021 के लिए 12वीं परीक्षा के अंकों और सीयूसीईटी के जरिये दाखिला प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया है।
हालांकि समझा जाता है कि सीयूसीईटी पूरी तरह से अलग प्रवेश परीक्षा नहीं है, बल्कि पिछले साल तक केंद्रीय विश्वविद्यालय दाखिले के लिए इसका आयोजन करते रहे हैं। इसमें बड़ा बदलाव यह होगा कि पहले सीयूसीईटी ऑफलाइन आयोजित किया जाता था, लेकिन अब यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) के रूप में आयोजित करने का प्रस्ताव है और इस बारे में संपूर्ण जानकारी जल्द ही सामने आ जाएगी।
नई शिक्षा प्रणाली (एनईपी) को लेकर कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से एक यह भी है कि मौजूदा 10 प्लस 2 प्रणाली को 5 प्लस 3प्लस 3 प्लस 4 में बदल दिया जाए। ग्रैजुएट के छात्रों के लिए चार साल तक के अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग डिग्री देने का भी प्रस्ताव है। यदि कोई छात्र एक साल में ही पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसे ग्रैजुएशन सर्टिफिकेट दिया जाए। इसी तरह दो साल तक ग्रैजुएट की पढ़ाई करने वाले छात्रों को ग्रैजुएशन डिप्लोमा दिया जाए। तीन साल का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों को डिग्री दी जाए। एनईपी में सीयूसीईटी आयोजित करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा के लिए एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा का प्रस्ताव दिया गया है। इससे छात्रों में अंक को महत्व देने वाली पद्धति खत्म हो जाएगी। हाल के कुछ वर्षों में हम देख चुके हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए बहुत ज्यादा अंकों का कट ऑफ जा रहा है और इसे लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों पर अच्छे अंक पाने का दबाव काफी बढ़ गया है कि किसी तरह डीयू के कॉलेजों में उन्हें दाखिला मिल जाए।
अब किसी संकाय में दाखिला पाने का दबाव नहीं रहेगा, बल्कि छात्र किसी विदेशी भाषा का चयन करने के साथ ही किसी भी संकाय में दाखिला ले सकते हैं और उनमें रचनात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे छात्रों को विभिन्न विषयों का ज्ञान रख सकेंगे। मसलन, कोई छात्र मैथ्स ऑनर्स के साथ ही इतिहास विषय की भी पढ़ाई कर सकेगा। नई शिक्षा प्रणाली में यह सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश है, जिसे बहुविषयक शिक्षा प्रणाली नाम दिया गया है।

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