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सामयिक व्यंग्य: ‘ हरामखोर लड़की ‘ नहीं, ‘ बेईमान नॉटी गर्ल ‘ डिक्शनरी में वर्ड एड कर लीजिए जनाब…..

आप भी समझ रहे होंगे, यह कैसी शब्दावली है। ‘हरामखोर लड़की ‘ का मतलब ‘ बेईमान नॉटी’ गर्ल कब से होने लगा है। हमने तो सदा ‘हरामखोर’ यह शब्द गाली के प्रतीकात्मक स्वरूप में ही सुनने को मिला है। नालायक, कामचोर, आलसी, निक्कमा, नमकहराम, मुफ्तखोर,आदि आदि। मां का कहा काम नहीं करते तो मां का सीधा सम्बोधन यही होता है कि एक नम्बर का ‘हरामखोर’ है। होमवर्क नहीं कर के ले गए तो आशीर्वाद स्वरूप मास्टर जी भी हमारे लिए इसी गरिमामयी शब्द का उच्चारण करते थे। अमूमन रोजाना तीन- चार अन्य साथियों के साथ हम मुर्गे बन क्लासरूम को गौरवान्वित करते रहते थे। मास्टरजी बैंत के प्रयोग के साथ इसी शब्द का प्रयोग कर हमारे मान-सम्मान में बढ़ोतरी करते। बस व्याकरणिक रूप में एकवचन ‘हरामखोर’ की जगह बहुवचन में ‘हरामखोरों ‘ हो जाता था।
पिता जी ने बचपन में तो इसे हमारे लिए सार्वनामिक शब्द के रूप में अपनी शब्दावली में रजिस्टर्ड कर रखा था। कहां मर गया हरामखोर? आदि सम्बोधन बहुतायात में हमारे लिए प्रयोग किये गए थे। भूलवश पड़ोस वाली आंटी के घर का कचरा हमारे घर के आगे उड़कर चला गया तो वहां सम्बोधन उनके पूरे परिवार के लिए हो जाता है।पता नहीं, ‘हरामखोर’ क्या-क्या अड़ंगा खाते रहते हैं। सारी सड़ांध इधर ही आती रहती है। कार्यालय में बॉस भी इस शब्द का भाववाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग करते ही रहते हैं। परसों ही स्वामी जी को बोल रहे थे-काम तुम्हें करना नहीं। ‘हरामखोरी’ तो तुम्हारे खून में भरी पड़ी है। कुछ काम भी कर लिया करो। ऐसे अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। चलिए अब इस शब्द के मायाजाल से बाहर निकलते हैं। शिवसेना नेता संजय राउत जी ने मशहूर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौट के सम्मान में इस शब्द का प्रयोग क्या कर लिया मामला दिल्ली दरबार तक जा पहुंचा। दोनों तरफ से ‘तीरम पर तीरम’ की स्थिति बनी हुई है। तूं आके दिखा, तूं रोक के दिखा सरीखे डायलॉग जबरदस्त ट्रेंड कर रहे हैं। बात अब ज्यादा बढ़ी तो शब्द का अर्थ के साथ भावार्थ ही बदल गया है। उनका कहना है कि उन्होंने ‘हरामखोर’ शब्द का प्रयोग किसी अपशब्द या बुरे रूप में नहीं कहा है। हम इस शब्द का प्रयोग बेईमान के लिए प्रयोग करते है न। कंगना नॉटी गर्ल है, वो ऐसे बयान देती ही रहती है, ऐसे में हमारी भाषा में ‘हरामखोर’ (बेईमान) का प्रयोग किया। देखा जाए तो उनकी बात गलत भी नहैं है। ये मुंबई है, सपनों की नगरी। यहां कहा कुछ जाता है और उसका अर्थ कुछ और होता है। यहां ‘धो डाला’ का अर्थ कपड़े धोने से नहीं पिटाई करने से है। टोपी पहनाने का मतलब धोखाधड़ी है। कौवा मोबाइल तो घोड़ा बंदूक है।फट्टू डरपोक तो पांडु पुलिसवाला। येडा पागल है तो स्याणा होशियार। सुट्टा सिगरेट तो ठर्रा शराब। आइटम सुंदर लड़की तो सामान हथियार। लोचा समस्या है तो सॉल्युशन समाधान। समझौता सैटिंग है तो लफड़ा झगड़ा। कहने की बात ये है कि इनका अपना खुद का शब्दकोश है। ये जो बोलते हैं उसका अर्थ इन्हीं के अनुसार ही होता है।ऐसे में ‘हरामखोर’ शब्द का नया अर्थ आप भी अपने शब्दकोश में ऐड जरूर कर लें। बोले तो अपुन का स्टाइल किसी के समझ में आने का नहीं। ये दिखने का कुछ और, करने का कुछ और। ऐसे में कंगना जी, राउत साहब की बात का क्या बुरा मानना। माफ करो और आगे बढ़ो। हां, राउत साहब से निवेदन है कि आगे से वो जब भी कोई शब्द बोलें तो उसका अर्थ भी पहले ही बता दे ताकि उन्हीं की भाषा में कोई लफड़ा न हो।

(सुुशील कुमार ‘ नवीन ‘)

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