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शवों ने लगाया जोरदार कहकहा

बैलगाड़ी पड़ी है या आराम कर रही है! सोच रही है या वह कुछ विचार में चिंतित खड़ी है। कुल मिलाकर पता नहीं बैलगाड़ी क्या कुछ कर रही है! बैलगाड़ी गहन चिंतन की मुद्रा में है। विचार मग्न है। बड़े से फाइव स्टार हॉस्पिटल के बाहर किंकर्तव्यविमूढ़ सी बैलगाड़ी! अस्पताल में रोते हुए शव प्रवेश ले रहे हैं और हंसते हुए बाहर निकल रहे हैं। कोरोना काल में शवों की प्रभात हो गई है। अस्पताल से लूटे-पिटे-कटे शव फिर से लुटने पिटने कटने के लिए श्मशान-कब्रिस्तान चले जा रहे हैं। इधर बैलगाड़ी फिर से चिंतन करने लगी है। मैं क्यों आई? मेरी यात्रा का प्रयोजन क्या है? मेरी जिंदगी का असली लक्ष्य क्या है? मुझे जीवन में किस दिशा में चलना चाहिए? मेरे अपने जीवन का संविधान क्या है? जीवन का अर्थ खोज रही है बैलगाड़ी! मुझे कौनसा बैल जोत कर ले जाएगा? मेरे पहिए कौनसी सड़कों पर गड़गड़ाएंगे? जीवन और मृत्यु का रहस्य क्या है? बैलगाड़ी ने ध्यान समाधि लगा दी है। तभी यह ताजा शव हॉस्पिटल में प्रवेश लेता है। उसके साथ दलाल के भेष में यमराज खड़े हैं। एक कुत्ता बैलगाड़ी के नीचे आकर लंबे-लंबे सांस भरने लगता है। इसके पीछे ऑक्सीजन का सिलेंडर लटका है। बैलगाड़ी की विचार मग्न दशा में कुत्ता भी विचारवान हो गया है। सोच रहा है कुत्ता! जीवन और मृत्यु क्या सच में दो चीजें हैं? जीवन और मृत्यु एक ही बैलगाड़ी के दो चाक हैं। दोनों से ही चलना है। होने के दोनों सहारे हैं। एक लाता है और एक ले जाता है। हर क्षण मृत्यु है और हर क्षण मौत। जीवन की पूर्ण स्वीकृति में ही मृत्यु की स्वीकृति मिली हुई है। अचानक कुत्ते ने जोरदार भोंकते हुए कहा- जीवन का असली प्रयोजन कुछ नहीं है।

कुत्ते की भोंकनाहट में बैलगाड़ी की तंद्रा टूट गई। बैलगाड़ी भी जोर से चिल्लाने लगी- जीवन का कोई प्रयोजन नहीं है! कोई भी आए और मुझे खींच ले जाए। जिधर चाहें, उधर ले जाएं। मुझे भगाए या बैठा दे। मेरा क्या है! घिसटते जाना ही मेरी जिंदगी है। क्यों हाय तौबा मचा रहे हो रेमदेसीविर के लिए? क्यों मारामारी कर रहे हो ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए? तुम सब बैलगाड़ी हो! और बैलगाड़ी की न कोई नियति होती है न कोई जीवन का प्रयोजन! अस्पताल से हंसते हुए शव बाहर सड़क पर धूप सेंक रहे हैं। ऊपर आसमान में कई तरह के गिद्ध मंडरा रहे हैं। उन्होंने शुद्ध सरकारी ढंग से अपने पंख फैला लिए हैं। पंख फैला रहे हैं। और पंख फैलाते रहेंगे। गिद्धों का अपना एक सरकारी प्रयोजन है। हॉस्पिटल की छत पर कौए कांव-कांव करने लगे हैं। कौओं का एक पूरा परिवार अपनी चोंच तीखी करने लगा है। न्यूज़ चैनल हवा में लहराने लगे हैं। खबरें ऑन एयर तैर रही है। अभी-अभी इस फाइव स्टार हॉस्पिटल से खबर आई है कि अब शव हंसते-हंसते अपनी अंतिम यात्रा कर रहे हैं। यह बहुत राहत की बात है। शवों के हंसने से कोरोना पर काफी हद तक ब्रेक लग गया है। ‘कल सबको खा जाऊंगा’ (केएसकेजे) न्यूज़ चैनल से कैमरामैन सूरदत्त के साथ मैं देवी मौनमुखी सदादुखी! एक साइकिल सवार दूल्हे के मोबाइल में डीजे बजा- सो गया है आसमां, सो गई है मंजिलें…! गीत सुनकर बैलगाड़ी हंसते हुए नाचने लगी। सभी शवों ने एक जोरदार कहकहा लगाया। जीवन व्यर्थ है; यही जीवन का सच्चा अर्थ है।

रामविलास जांगिड़

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