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परिचर्चा : हैदराबाद पुलिस कार्यवाही को सराहा

न्यायायिक व्यवस्था कड़ाई से और त्वरित लागू हो

विजय न्यूज़ ब्यूरो

‘डॉ शम्भू पंवार’

हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेडी हत्या कांड के चारों आरोपियों का पुलिस द्वारा एनकाउंटर किये जाने पर, देश भर में काफी प्रतिक्रिया हुई ,सोशल मीडिया पर लोगों ने हैदराबाद पुलिस को हीरो बना दिया। पुलिस की कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया। जबकि कुछ लोग इसको न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत मान रहे थे। 2012 में निर्भया कांड के समय भी जनमानस का आक्रोष सड़कों पर आ गया था, लेकिन 7 साल बाद भी अभी तक आरोपियों को फांसी नहीं हुई है ।इससे स्पष्ट है कि देश की न्यायिक प्रक्रिया की चाल बहुत धीमी है।न्यायायिक प्रक्रिया के लचीलेपन से जनमानस में काफी आक्रोश है। देश मे बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर कैसे अंकुश लगे?,कानून का अपराधियो में कैसे खौफ हो?, क्या कानून को और कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है?इस सन्द्रभ में राय जानने के लिए शिक्षविद, सामाजिक, साहित्यिक, लेखन क्षेत्र में कार्यरत प्रबुद्ध महिलाओ से ‘डॉ शम्भू पंवार’ ने परिचर्चा की, प्रस्तुत उनके विचार।

राष्ट्रीय ख्यातिनाम कवयित्री एवं समाजसेविका शोभा सचान साहिबाबाद का कहना है कि:-

शोभा सचान

सदियां गवाह हैं, औरतों को द्वितीय श्रेणी की तरह देखने वाला समाज उन्हे देवी की तरह पूजने का ढोंग भी करता है । ( नारी का भी अस्तित्व होता है ) ऐसा मानना अविकसित समाज के लिए आज भी कष्ट कारी है। डा. प्रियंका रेड्डी के साथ हुई घटना ना सिर्फ हमारे समाज की कुंठित सोच का आइना है, बल्कि हमारी कानून व्यवस्था की ध्वस्त हालत का प्रतीक है । सिस्टम की नाकामी से, ,बेटियां खौफ के साये मे हैं, और जनता को एनकाउंटर प्रशंसनीय लग रहा है, तो देश के आने वाले कल मे अंधेरा ही अधेरा है । रही बात कार्य पालिका के सुधार की तो इसके लिए हम सबको दोहरी रणनीति अपनानी होंगी। आकस्मिक रणनीति के तहत स्पेशल पुलिस ट्रेनिंग, कठोर कानून, दोषियों के लिए शीघ्र से शीघ्र फांसी का प्राविधान होना चाहिए । दुष्कर्म के मामलों मे त्वरित न्याय के लिए, अलग से विशेष न्यायालय और अधिकारी नियुक्त किए जाने चाहिए दीर्घावधि रणनीति के तहत शिक्षा द्वारा जागरूकता एवं लैंगिक समानता को बढ़ावा देना जरूरी होगा ।

शिक्षविद डॉ मीनू पांडे, भोपाल की नजर में

डॉ मीनू पांडे

हैदराबाद के केस में जो त्वरित कार्रवाई पुलिस ने की है उसका तहेदिल से स्वागत करती हूँ। पर यदि दोषियों को सजा न्यायालय से मिलता तो मन को सुकून मिलता। क्योंकि पुलिस ने तो ये कार्रवाई अपनी रक्षा के लिए की। बदला लेने के लिए नहीं। और यदि किसी भी घटना के दोषियों को सजा देने का यही उचित तरीका है तो फिर तो न्यायपालिका की आवश्यकता ही नहीं रहेगी देश में। और इस तरह की कार्रवाई में यदि निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाया गया तो। इसीलिए समस्या का समाधान यह है कि फास्ट ट्रेक कोर्ट में समस्या का त्वरित समाधान किया जाए। और उसके बाद अपील की इजाजत दोषियों को न दी जाए। बलात्कार और हत्या के मामले में दोषियों के अंग भंग किए जाऐं एवं उसके दो माह पश्चात बीच चौराहे पर उसे फांसी दी जाए।ताकि अन्य अपराधियों में खौफ पैदा हो। बेटियों की सुरक्षा के लिए उन्हें हथियार का लायसेंस मिले एवं चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाय।

प्रसिद्ध लेखक सुवर्णा परतानी हैदराबाद का मानना है कि

सुवर्णा परतानी

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के पीछे एक कुंठित मानसिकता झलकती है,औरत की अस्मिता को छिनकर उसे असहाय ,अबला बनाने की और सिर्फ़ एक भोग्या समझने की निकृष्ट सोच को रोकने के लिए हैदराबाद की पुलिस ने जो किया वो निश्चित ही सराहनीय कदम है ।
महिलों के लिए ग़लत मानसिकता रखने और उसे दरिंदगी के अंजाम पहुँचाने वालों के किए कड़ी चेतावनी है । बहरहाल पुलिस का कदम सराहनीय है।वर्षों तक हैवानों को मेहमानों की तरह रखने और उन्हें संवेधानिक मजबूरी के तहत क़ानूनी मदद उपलब्ध कराने की बाध्यता के बीच यह सिस्टम झूलता रहता। निर्भया के आरोपी अभी भी मेहमान बने हुए है।अगर पुलिस ये कदम ना उठाती तो शायद इस मामले में भी कुछ ऐसा ही होता । हैदराबाद पुलिस ने सही मायने में “दिशा” को इंसाफ़ दिलाया है।

साहित्यकार सुषमा शैली दिल्ली के अनुसार

सुषमा शैली

हैदराबाद पुलिस की कार्यवाही को सही को वर्तमान परिस्थितियों में उचित बताते हुवे कहा कि,2012 में निर्भया के आरोपियों को अभी तक फांसी नही दी गई। सात सात साल तक इन्हें जेल में पाला जाता है इसे प्रावधान को सही करना होगा। आरोप सिद्ध होते ही सबसे कठोर मृत्यु दंड देना चाहिए। दुष्कर्म पीड़ित को त्वरित न्याय मिलना चाहिए।इसके लिए अलग से न्यायालय बनाया जाए एवं आरोपियों को ज़मानत का याचिका लगाने का कानून में प्रावधान नही रखना चाहिए। न्याय की परंपरा का सम्मान इतना करना चाहिए कि “सौ दोषी छूट जाएं पर एक निर्दोष को दंड न मिले”।मेरी दृष्टि में जो शील भंग करता है वो मानव है ही नहीं अमानव है, फिर इन पर मानवाधिकार का विधान कैसा !

व्यायाख्याता बेला सोलंकी उदयपुर का कहना है

बेला सोलंकी

डॉ प्रियंका रेड्डी की हत्या और दुष्कर्म की घटना ने पूरे भारत को झकझोर के रख दिया, दुष्कर्म करने वाले अपराधियों का हैदराबाद पुलिस द्वारा किये एनकाउंटर को सही बताते हुवे कहा कि हमारे भारत की न्याय प्रक्रिया है वह बहुत धीमी है जिसके कारण बहुत सारे अपराधी धीरे-धीरे अपने अपराधों से मुक्त हो जाते हैं और स्वतंत्र रूप से भारत में उन्मुक्त होकर जो लोग घूमते हैं। जो लोग यह कहते हैं हैदराबाद पुलिस ने यह गलत किया है । मैं उनसे कहना चाहूंगी कि वह संसद में आवाज उठाये और हमारे भारत की जो न्याय प्रणाली है उसमें परिवर्तन करें। संविधान में कुछ कानून बने हुए उनमे परिवर्तन करें और कड़ाई से लागू करे।अन्य देशों में बलात्कारियों को कठोर दंड दिया जाता है। उसी तरह भारत की न्याय प्रणाली भी बनाई जाए ताकि दुष्कर्म करने वाले और हत्या करने वाले लोगों को कठोर से कठोर दंड मिले और त्वरित मिले ताकि अपराधियो में डर कायम हो। और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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