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पीरियड्स में ‘एंडोमेट्रिओसिस‘ को हल्के में न लें

  • पीरियड में इंडोमीट्रिओसिस से होता है असहनीय दर्द
  • मार्च में इंडोमीट्रिओसिस जागरूकता माह मनाया जाता है

इंडोमीट्रिओसिस के चलते महावारी के दौरान महिलाएं असहनीय पीड़ा को सहती हैं। ये समस्या तेज गति से बढ़ रही है। पूरे मार्च महिने में इंडोमीट्रिओसिस जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। ये समस्या क्यों बढ़ रही है, बचाव और ईलाज क्या हैं को लेकर डाॅ0 रमेश ठाकुर की सुविख्यात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता दुबे, डीन आफॅ आर्यन हाॅस्पिटल एंड मेडिकल सेंटर, मुंबई से विस्तृत बातचीत।

विजय न्यूज नेटवर्क। डाॅ रमेश ठाकुर
महिलाओं में इंडोमीट्रिओसिस समस्या आम हो गई है। पीरियडस् में होने वाला भंयकर दर्द इसी कारण होता है। शहरी महिलाओं के मुकाबले ग्रामीण महिलाओं में यह समस्या ज्यादातर पाई जाती है, क्योंकि पीरियड में वह गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं। ‘पैडमैन‘ जैसे फिल्मों में इसका ज्रिक भी किया गया था। फिल्म के जरिए ग्रामीण महिलाओं में काफी जागरूकता भी आई। पर, रूटिन रूप से इस अतिमुद्दे पर जानकारियां का अभाव सामाजिक व सरकारी स्तर दोनों पर है। पीरियडस् में पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसीस) का होना आम होता है लेकिन इसके अलावा इंडोमीट्रिओसिस भी हो सकता है इस बात से महिलाएं अधिकांश बेखबर होती हैं, जिसमें महावारी के दौरान और बाद में पेट में असहनीय दर्द का सामना करती हंै। बचपन से महिलाओं को बताया जाता है कि महावारी के पहले पेट के निचले हिस्से में दर्द होता ही है, इसलिए अधिकांश महिलाएं इस तेज दर्द को भी कभी गंभीरता से नहीं लेती।
मार्च महीने को इंडोमीट्रिओसिस जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इंडोमीट्रिओसिस सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार लगभग 25 मिलियन भारतीय महिलाएं इस बीमारी की शिकार हैं। बावजूद इसके आज भी अधिकांश महिलाएं इस बीमारी के प्रति अधिक जागरूक नहीं है। मेडस्केप इंडिया अभियान के तहत बीते 17 साल से स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहीं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता दुबे बताती हैं कि अपने मिलियन स्माइल प्रोजेक्ट के तहत हमने देशभर की छह हजार महिलाओं का स्वास्थ्य जांच किया। सेहत के मामले में शहरी महिलाएं भी अधिक जागरूक नहीं है। खून की कमी, अनियमित महावारी के साथ ही पीसीओडी और इंडोमीट्रिओसिस की समस्या बढ़ी है। एक अध्ययन के अनुसार 25 से तीस प्रतिशत महिलाओं को इंडोमीट्रिओसिस की वजह से गर्भधारण करने में परेशानी हुई। हालांकि कुछ दवाओं और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से इंडोमीट्रिओसिस होने के बाद भी गर्भधारण किया जा सकता है, जिसके लिए सही समय पर इलाज किया जाना जरूरी है। डॉ. सुनीता कहती हैं कि महावारी के समय होने वाले असहनीय दर्द को कम करने के लिए एस्ट्रोयाड दवाएं नहीं लेनी चाहिए, इससे हार्मोन अनियंत्रित हो सकते हैं जो बाद में गर्भधारण में समस्या पैदा कर सकते है। लैप्रोस्क्रोपी सर्जरी के जरिए सुरक्षित तरीके से गर्भाश्य के पास जमे अतिरिक्त टिश्यू को हटाया जाता है, जो दवाओं से अधिक सुरक्षित है। सही समय पर जांच होने पर इलाज की सही दिशा भी तय की जा सकती है।

क्या है इंडोमीट्रियोसिस
इंडोमीट्रियोसिस एक क्रानिक बीमारी है जो महावारी के साथ साथ बढ़ती है। बीमारी में पेट के नीचले हिस्से में महावारी के आने से एक से दो हफ्ते पहले ही असहनीय दर्द शुरू होने लगता है। बीमारी में इंडोमीट्रियल टिश्यू, जो आमतौर पर गर्भाश्य की अंदरूनी परत में पाए जाते हैं, इन टिश्यू का काम गर्भधारण के समय गर्भ को पोषण देना होता है, लेकिन गर्भधारण न होने पर यह टिश्यू टूटकर कर महावारी के दौरान गर्भाश्य बाहर जमने लगते है, इन्हीं जमे हुए टिश्यू की वजह महावरी के दौरान दर्द बढ़ता है और कई बार यह धक्के के रूप में निकलते भी हैं।

समस्या से निजात पाने का तरीका
अमूमन दर्द से छुटकारा पाने के लिए महिलाओं को दर्दनिवारक दवाएं लेने से मना किया जाता है, जिससे अस्थाई रूप से महावारी रूक भी जाती है। लैप्रोस्कोपी की मदद से टिश्यू की अतिरिक्त परत को हटा दिया जाता है, जिससे दर्द कम हो जाता है और महिला गर्भ भी धारण कर सकती है। महावारी में साफ सफाई बहुत जरूरी है। गंदे कपड़े का इस्तेमाल हरगिज न करें।

प्रस्तुतिः डाॅ0 रमेश ठाकुर,
पताः 5/5/6, द्वितीय तल, गीता कालोनी, नई दिल्ली
संपर्कः 9350977026

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