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हिंदी व भोजपुरी के बहुप्रतिभाशाली सृजक डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना गीत, कथा के कालजयी सृजक हैं : डॉ शरद नारायण खरे

पटना। निरंतर बदलती हुई लेखकीय चेतना में भावों का उतार-चढ़ाव और कल्पना का बहुरंगी चित्रण मिलता है, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना की कविताओं और कहानियों में ! निश्चित तौर पर जीवन की सहज अनुभूतियों और सामाजिक विसंगतियों को रेखांकित किए बिना, कोई भी साहित्य जीवंत हो ही नहीं सकता l सामाजिक जीवन की विसंगतियों और सौंदर्य बोध को, पूरी शिद्दत के साथ बयां करने में समर्थ है डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना की भाव प्रवीण कविताएं !”
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में, वरिष्ठ कवि गोरख प्रसाद मस्ताना( बेतिया) से, ऑनलाइन भेंटवार्ता लेते हुए, संयोजक सिद्धेश्वर ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किया !
ऑनलाइन भेंटवार्ता एवं एकल पाठ के आरंभ में मुख्य अतिथि डॉ शरद नारायण खरे (मध्य प्रदेश) ने, डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना के व्यक्तित्व-कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा – ” डॉ मस्ताना सृजन के महारथी है ! बेतिया बिहार के सुपरिचित कलमकार हिंदी व भोजपुरी के बहुप्रतिभाशाली सृजक डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना गीत, कथा, लघुकथा व अन्यान्य विधाओं की अनेकानेक कृतियां सृजित कर साहित्य जगत में उच्च प्रतिष्ठा हासिल कर चुके हैं।हिंदी के साथ ही उन्होंने भोजपुरी साहित्य में भी ख़ूब यश अर्जित किया है।उनकी रचनाओं में गहराई, संवेदना,सामाजिक चेतना सभी कुछ नज़र आता है।इसीलिए उनकी रचनाएं कालजयी हैं।”
अपनी भेंटवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में डॉ मस्ताना ने कहा कि – ” इतिहास गवाह है कि लयात्मक कविताएं ही लंबे समय तक जीवित रहती है और सपाट बयानी कविताएं धीरे -धीरे जनमानस से गायब हो जाती है l
उन्होंने कहा कि अब यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि बड़ी रकम वाली पुरस्कार देने वालों की क्या राजनीति है ? सच तो यह है कि आम पाठकों द्वारा प्राप्त सम्मान से बढ़कर कोई पुरस्कार या सम्मान नहीं होता l ऑनलाइन इस तरह की साहित्यिक आयोजन इस बात का प्रमाण है l ”
इसके बाद डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना ने अपनी एक दर्जन से अधिक कविताओं का पाठ किया, जिसे देर रात तक श्रोताओं ने सुनते हुए, आनंद विभोर होते रहे और जमकर अपनी प्रतिक्रियाओं का आदान प्रदान किया !
इस कार्यक्रम में अपूर्व कुमार, ऋचा वर्मा, दुर्गेश मोहन, घनश्याम कलयुगी, रामनारायण यादव, संजय रॉय, आलोक चोपड़ा, मीना कुमारी परिहार, विनोद प्रसाद, , संतोष मालवीय आदि ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की, प्रसारित रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की !

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