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यूरोप और चीन के बिगड़ते रिश्ते

चीन की चालबाज़ी से अब पूरी दुनिया वाकिफ हो रही है । कोरोना वायरस चीन के वुहान से निकला है यह बात भले ही चीन ना माने मगर पूरी दुनिया ने चीन को ही इस जानलेवा बीमारी की वजह मान रही है और इसका खामियाज़ा चीन ने भुगतना भी शुरू कर दिया है । इस वायरस का नुकसान चीन से ज्यादा अमेरिका और यूरोपियन देशों को उठाना पड़ रहा है । हज़ारों की तदाद में लोग यहां मर रहें जिसकी वजह वुहान से निकला कोरोना वायरस है । मगर अब अधिकतर देश चीन से अपने रिश्ते कम करने का प्रयास कर रहें हैं और अगर सभी देशों ने किया तो चीन जल्द ही अपने घुटनों पर आ जाएगा । अमेरिका ,जर्मनी , इटली , भारत ने पहले ही चीन से व्यापार कम करने की ओर संकेत दे दिये हैं और इसमे यूरोपियन यूनियन भी शामिल हो चुका है । यूरोपियन यूनियन चीन का एक बहुत बड़ा व्यापारिक साझेदार है और यह बात चीन भी अच्छे से जनता है कि अगर इस देश सम्बन्ध बिगड़े तो इसका बहुत बड़ा नुकसान उसे उठाना पड़ेगा । इसी को देखते हुए चीन ने यूरोपियन देशों की मदद करना शुरू किया। स्पेन , फ्रांस ,जर्मनी जैसे देशों को मास्क , रैपिड टेस्टिंग किट आदि जैसी सुविधाओं को यहां भेजा । सवाल यह उठ रहा है कि आखिर चीन इतनी दरियादिली दिखा क्यों रहा है ? तो इसका जवाब है कि चीन दुनिया का ध्यान वुहान से भटकना चाहता है । वह बताने का प्रयास कर रहा है कि वुहान से यह वायरस नहीं निकला है और इसके जिम्मेदार हम नहीं हैं। दूसरी बात यह है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते प्रतिदिन बिगड़ते जा रहें हैं जिसके चलते चीन अब यूरोप की तरफ अपना संबन्ध बचाने का प्रयास कर रहा है। मगर यूरोप ने चीन को करारा जवाब दिया और बताया कि जर्मनी और फ्रांस ने जो किट भेजे हैं वह चीन से बहुत अधिक हैं । इस बात से यूरोप कहना चाह रहा है कि अब युरोपीयन देशों में एकता और बढ़ गई है । इसके साथ ही जो रैपिड टेस्टिंग किट चीन ने भेजीं थी वह अधिकतर खराब थीं जिसके चलते चीन पर भरोसा और कम हो गया । यूरोपियन यूनियन और चीन के संबन्ध बेहद मजबूत हैं अब इनके बीच दरार की वजह क्या बन रही है ? तो जवाब है कि यूरोप जान चुका है कि चीन इस वायरस की अहम जानकारी को पूरी दुनिया से छुपाया । इसके अलावा चीन कह रहा कि उसके यहां कोरोना वायरस अब खत्म हो चुका है इसके बावजूद वह अपनी रणनीति और प्रयास को दुनिया के सामने नहीं ला रहा है और तीसरी बात यह है कि यूरोप का विश्वास अब चीन से उठ चुका है । इन सभी देशों के अलावा इटली ने इस वायरस को जैविक हमला बताते हुए जो नुकसान उनके देश में हुए हैं उसका हर्जाना चीन से मांगा है । इसके साथ ही यूरोप चीन से नये-नये उपकरण भी भारी मात्रा में लेता है जिससे आर्थिक नुकसान भी उसे होता है । मगर अब वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है और इसी लिए वह अब अपने ही देश में नए उपकरण बनाने का प्रयास करेगा । बात करें भारत और चीन के रिश्तों की तो भारत ने तो चीन की करतूत जान ली है और इसी को देखते हुए कड़े कदम भी उठाने शुरू कर दिये हैं । हाल ही में भारत ने अपने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बहुत बड़ा बदलाव किया जिससे चलते चीन बौखला गया है । तो कुल मिलाकर देखा जाए तो चीन अपने आप को सच्चा मित्र बताने का प्रयास कर रहा था मगर युरोपीयन यूनियन ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया अब चीन की चालबाज़ी जान चुकी है और अगर ऐसे ही सारे देश चीन का बहिष्कार करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब कोरोना वायरस का सच भी सबके सामने होगा ।

यशस्वी सिंह
मीडिया छात्र, इलाहाबाद विश्विद्यालय, (इविवि)
प्रयागराज

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