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योग और प्राणायाम के साथ लड़ें कोरोना से लड़ाई

आज समूचा विश्व कोरोना रूपी महासंकट का सामना कर रहा है। भौतिकवाद की चकाचौंध में मनुष्य पहले से ही अंधा हो रखा है। मधुमेह, हार्ट अटैक,अस्थमा, आर्थराइटिस, लकवा जैसी अनेकों जानलेवा बीमारियां मनुष्य के गले की पहले ही फांस बन हुई हैं। डब्ल्यू एच ओ WHO के अनुसार आज विश्व में हर 10वां व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है और प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में मोतें शूगर की वजह से हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवाओं का बाजार बढ़ता ही जा रहा है जबकि हर साल वर्डफलू, इबोला, रैबीज,एनफ्लुऐंजा,व सार्स जैसे वायरस पनप रहे हैं। एक से निपटते हैं तो दूसरी बीमारी मुह बाये खड़ी मिलती है। अब ये कोरोनावायरस का प्रकोप सारे संसार के अस्तित्व के लिए यक्ष प्रश्न बना पड़ा है। सभी भय एवं व्याकुलता के माहौल में जी रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति की जुबान पर दिन भर लोकडाऊन कब खुलेगा ? घर की कैद से पीछा कब छुटेगा ? संक्रमण क्यों बढ़ रहा है ? वैक्सीन कब तक बनेगी ? हमारा भविष्य क्या होगा ? आदि आदि प्रश्न घूमते रहते हैं। इनका जवाब देने वाला फिलहाल कोई नहीं दिख रहा है।

ये प्रश्न हमें मानसिक रूप से ज्यादा परेशान करके शरीर की हार्मोन्स श्रावण प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। वहीं लोकडाऊन के चलते सारे दिन घरों में रहना और दिन भर कुछ न कुछ खाते रहना मोटापा सहित अन्य कई रोगों को आमंत्रण दे रहा है। लोकडाउन के दौरान विभिन्न योगासनों उनके करने का तरीका उनके लाभ पर लेखक सुशील कुमार नवीन ने इंटरनेशनल योगा एथलीट कविता आर्य से बातचीत की।

योगाचर्या कविता आर्य के अनुसार COVID-19 जो श्वश्न संस्थान पर हमला करता है और जिनकी एम्युनिटी कमजोर होती वही ज्यादा प्रभावित होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि तो फिर हमारी दिनचर्या में कैसे और क्या किया जाए कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हो सके तथा हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।निसंदेह ऐसी परिस्थिति में एक ही आशा की किरण है और वो है योग एवं आयुर्वेद को अपनी दिनचर्या में आवश्यक रूप से शामिल करना। योगाभ्यास द्वारा जहां हम शारीरिक क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं वहीं हार्मोनल ग्रंथियां उचित मात्रा में हार्मोन्स का श्रावण करके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करके सुरक्षा कवच का वातावरण तैयार कर सकते हैं।

कविता आर्य के अनुसार सुबह-शाम शौचादि से निवृत्त होकर अपने घर के आंगन या बालकॉनी में चटाई पर बैठकर तीन बार ओउम् का उच्चारण करके योग की शुरुआत करें। सर्वप्रथम कुछ सूक्ष्म व्यायाम करके शरीर को ऊर्जावान करें तथा कम से कम पांच बार सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। इतना करने के बाद मांसपेशियां आसन व प्राणायाम करने के लिए तैयार हो जाएंगी।

प्रथम आसन ताड़ासन
सीधे खड़े होकर श्ववास सीने में भरते जाएं और दोनों हाथों को धीरे धीरे सिर से उपर की ओर ले जाकर शरीर को तान दे। स्वास को फेफड़ों में रोककर रखें। आधा मिनट बाद स्वास बाहर निकालते हुए अपना हाथ नीचे जंघाओं के बराबर ले आएं। इसे हम दो से तीन बार तक दोहरा सकते हैं।
सावधानी:.जिनको हाई ब्लैड प्रैसर की शिकायत हो वे इस आसन में श्वास न रोकें। घुटनों में दर्द हो वे किसी तरह का सहारा लेकर ही इसे करें।
लाभ : फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। कब्ज दूर होती है। हर्णिया रोगियों के लिए भी ये लाभदायक है।

द्वितीय आसन त्रिकोणासन
इस आसन को खड़ा होकर ही किया जाता है। दोनों पांवों के बीच उचित दूरी बनाकर बाएं पंजे को बायीं ओर मोड़ें। हाथों को ऊपर उठा कंधों के बराबर लाएं। अब बायीं हथेली को बाएं पंजे के पास रखें। दायां हाथ उपर की ओर तथा गर्दन मरोड़ कर दाएं हाथ की हथेली पर ध्यान केंद्रित करें। आधा मिनट रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस आएं और फिर इसी तरह दूसरी तरफ से करने का प्रयास करें।
सावधानी: जोड़ों में जिनके दर्द रहता हो वे यह आसन न करें। दूसरे शरीर को वार्म-अप किए बिना इस आसन को करने से बचे।
लाभ: इससे सर्वाइकल व माइग्रेन ठीक होता है। कमर की अतिरिक्त भी चर्बी कम होती है।

तृतीय आसन पश्चिमोत्तानासन
यह बैठकर किया जाने वाला आसन है। दंड आसन यानि पांवों को सीधा करके बैठ जाएं। हथेलियों को जमीन पर जंघाओं के पास ही रखें। अब स्वास लेते हुए हाथों को ऊपर उठाए फिर नीचे की ओर लाएं। पांवों के पंजों को पकड़ते हुए छाती जंघाओं व सिर घुटनों के आगे टिकाएं व स्वास बाहर निकालें। आधा मिनट रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस आएं। इस आसन को क्षमतानुसार दो तीन बार किया जा सकता है।
सावधानी: हाल ही में जिनके पेट में शल्य चिकित्सा हुई है वे इस आसन को न करें। माहवारी एवं गर्भकाल में महिलाएं इसे न करें।
लाभ: इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। उदर विकार दूर होते हैं। शरीर से पसीने की दुर्गंध दूर होती है। पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में लाभदायक है।

चतुर्थ आसन गोमुख आसन
दंडासन में बैठकर दाएं पैर को मोड़कर दायीं ऐड़ी को बाएं नितंब के पास रखेंगे और इसी तरह बाएं पैर को मोड़कर दायीं ऐड़ी को दाएं नितंब के पास रखेंगे। हाथों को ऊपर नीचे की दिशा में कमर पर पकड़ लेंगे लंबे गहरी स्वास प्रस्वास करनी है। कम से कम 30 सेकंड और ज्यादा से ज्यादा यथाशक्ति इस आसन को कर सकते हैं
सावधानी : शरीर को वार्म-अप करके ही इस आसन का अभ्यास करें।
लाभ : महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी है। फेफड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ, पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करता है। कंधे, घुटनों के जोड़ इससे क्रियाशील रहते हैं।

पंचम आसन सर्वांगासन
सबसे पहले कमर के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को उठाकर बिना घुटनों को मोड़े पांवों को सिर के पीछे रखें। अब दोनों हथेलियों को कमर पर रखकर पैरों को ऊपर की ओर सीधा करें। ध्यान पंजों पर हो। आधा मिनट तक रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस आएं। इस आसन को अपनी क्षमतानुसार कई बार किया जा सकता है।
सावधानी: जिन्हें मिर्गी के दौरे आते हों तो वे इस आसन को न करें। मासिक धर्म व गर्भकाल के दौरान भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
लाभ: हृदय रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होता है। आंखों के लिए भी यह उपयोगी आसन है। इससे उदर विकार भी दूर होते हैं तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

प्राणायाम से करे श्वसन प्रकिया मजबूत
अष्टांगयोग के अनुसार प्राण शक्ति पर नियंत्रण को प्राणायाम कहा है। यहां हम दो भस्त्रिका और उज्जाई दो तरह के प्राणायाम का अभ्यास करेंगे जो कि स्वश्न संस्थान को मजबूत करते हैं तथा शरीर को रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम
भस्त्रिका अर्थात लोहार की धोंकनी की भांति आवाज करते हुए स्वास-प्रस्वास करना। दवाबपूर्वक स्वास को भीतर खींच कर फेफड़ों में भरें और फिर दवाबसहित बाहर निकाल दें। इस प्राणायाम को अपने शरीर की क्षमतानुसार 5-10 मिनट तक किया जा सकता है।
सावधानी- गर्मी के मौसम में ज्यादा देर तक इसे करना उचित नहीं है। ह्रदय रोगियों को ऑपरेशन के बाद छः महीने तक इसे नहीं करना चाहिए।
लाभ: यह प्राणायाम फेफड़ों व श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है। शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ सर्दी के रोगों से बचाव भी करता है।

उज्जायी प्राणायाम
यह प्राणायाम करने के लिए गले को टाइट करें। नाक से लंबा गहरा स्वास फेफड़ों में भरें। यथासंभव रोककर बायीं नासिका से श्वास को बाहर निकाल दें। तीन-चार बार लगातार इस प्रक्रिया को दोहराएं, यही उज्जाई प्राणायाम है।
सावधानी: जिनका गले का ऑपरेशन हुआ है उन्हें कम से कम छह महीने तक इस प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
लाभ: यह प्राणायाम गले से संबंधित सभी रोगों का निदान करता है। थायरायड रोगियों के लिए भी ये रामबाण है।इससे फेफड़ों की कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है।

अंत में पुन:: ओउम् का जप करेंगे, तीन बार गायत्री मंत्र का उच्चारण करके योगासनों का समापन करेंगे। लोकडाऊन के दौरान रोजाना सुबह और शाम को अपने घरों में रहकर एक-एक घंटा ये यौगिक क्रियाएं की जाएं। इससे समय का भी सदुपयोग होगा, शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी, रात को नींद अच्छी आएगी और हम सभी शारीरिक, मानसिक व आत्मिक रूप से स्वस्थ बन सकते हैं।

कविता आर्य का परिचय
इंटरनेशनल योगा एथलीट कविता आर्य पांच बार नेशनल योग चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता है। वर्ल्ड योग चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता है। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से शारीरिक शिक्षा विषय में टोपर रहते हुए मास्टर डिग्री करने के अलावा उत्तराखंड विश्वविद्यालय से योग विषय में मास्टर ऑफ आर्ट्स है। अब वे (योग द्वारा खिलाड़ी के प्रर्दशन में सुधार ) विषय पर शोध पीएचडी कर रही हैं। कविता समय समय पर योग गुरु बाबा रामदेव के साथ साथ मंच साझा करती है।योग विशेषज्ञ के रूप में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में व्याख्यान देती रहती हैं।

योग विशेषज्ञ :इंटरनेशनल योगा एथलीट कविता आर्य।
संकलनकर्त्ता: सुशील कुमार नवीन, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक।

सुशील कुमार ‘नवीन’ , हिसार
[email protected]
नोट- लेखक को पत्रकारिता में 20 वर्ष का अनुभव है। फिलहाल लेखक स्वतन्त्र लेखन और शिक्षण कार्य में जुटे हुए हैं।
96717 26237

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