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खबरिया चैनल की जबरिया न्यूज़ें

न्यूज़ चैनल वाले भाई साहब को हम सब दर्शकों का घनघोर नमस्ते! एंकर भैनजी आप को साष्टांग प्रणाम! आप इन दिनों सुशांत केस को सुलझाने में रात-दिन लगे पड़े हैं। आपको बिल्कुल टाइम नहीं है। इस बात का हमें बहुत दुख है। हर तरह के न्यूज़ चैनल, हर समय, हर घड़ी सुशांत केस निपटाने में लगे हुए हैं। यह राष्ट्रीय महत्व की बात है। इसमें आप रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। नेता लोग बाढ़ पर्यटन में हवाई यात्रा कर रहे हैं और आप लोग न्यूज़ चैनल के इस स्टूडियो नर्क में पड़े हैं। इंडिया में कोरोना धमाल मचा रहा है और आपके स्टूडियो में सुशांत का ऑडियो कमाल मचा रहा है। न्यूज़ चैनल के आउटपुट और इनपुट दोनों जगह पर चार-चार सुरक्षा गार्ड बिठाने पड़ गए हैं। टीआरपी खींचने के लिए आपने घनघोर धंधा सेट कर रखा है।
आप सुबह से शाम तक बलात्कार की खबरों को उछालते रहते हैं। कितनी मेहनत करनी पड़ती है आपको! कितनी बार बलात्कार का रीक्रिएशन करना पड़ता है! बाप रे बाप! इतनी मेहनत! जब बलात्कार की खबरों से हल्की सी मुक्ति मिल जाती है तो आपको हीरो-हीरोइन के चैट ट्विटर आदि की खबरों का रायता फैलाना पड़ता है। कोरोना के चक्कर में मुआ यह क्रिकेट भी बंद है। तो अब कौन सी खबर का रायता फैलाएं? सनसनी मचानी ही पड़ेगी। सनसनी बेचने का ही धंधा है आपका। हर जगह गिरोह बंदी है। आपकी नौकरी भी खतरे में रहती है। आप इस मामले में कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। आप भी क्या करें? गिरोह में बंधे हैं न! इसलिए दिन-रात सुशांत के केस को निपटाने में लगे हैं।
आदरणीय चैनल महोदय! दर्शकों की आप से सिर्फ यही रिक्वेस्ट है। देश आपकी ओर कातर निगाहों से देख रहा है। आप ही इस पेचीदा मामले को तुरंत निपटा सकते हैं। टीआरपी और बिकाऊ कंटेंट के रहते ये सब आप योजनाबद्ध तरीके से कर सकते हैं।सीबीआई-ईडी तो बस टाइम पास है। पुलिस का रोल आप करते हैं और वकील का रोल भी आप। अच्छे-अच्छे जज को पीछे छोड़कर आप फटाक से जजमेंट दे डालते हैं और अच्छे-खासे सियासत बाज को घास खिलाते हुए आप कुर्सी की रहस्यमई दास्तान सुना डालते हैं। हे न्यूज़ चैनलों! आप पर बहुत ज्यादा भार आ गया है। दर्शक आपकी ओर टकटकी बांधकर बैठे हैं। आप तो मर्डर होने से पहले ही उसके हत्यारे का पता बता देते हैं। डकैती होने से पूर्व ही डाकू का अड्डा लाइव टेलीकास्ट कर देते हैं। चुनाव से पहले ही आप मुख्यमंत्री की कुर्सी में पड़े खटमल गिना देते हैं। रेगिस्तान में नाव डुबो सकते हैं।
हे न्यूज़ चैनल देवता! आप किसी भी स्टोरी को काउंटर करने के लिए 5/6 अलग-अलग स्टोरी आइटम बनाए रखते हैं। दंगों से पहले ही मूल आरोपी को पकड़कर स्टूडियो में सरेंडर करवा सकते हैं। स्टूडियो में लेटकर स्टोरी प्लांट कर सकते हैं कि 3 दिन पहले एक खेत में एक लड़के ने एक नाग को मार दिया था। एक नागिन उसके घर के पास बार-बार आ रही है। नागिन लड़के से बदला लेने के लिए इच्छाधारी रूप धरे खड़ी है। सनसनाहट ये है कि यही नागिन आपके स्टूडियो में आकर लड़के की तलाश कर रही है। यह सिर्फ आपके ही चैनल पर उपलब्ध है। चैनल-चैनल यही कथा चल रही है। हर चैनल ‘सिर्फ हमारे चैनल पर ही उपलब्ध’ है, की चीत्कार मचा रहा है।
आप यह भी स्टोरी प्लांट कर सकते हैं कि कुम्हारिया गांव में जो स्कूल है, उसमें रात को भूत आकर पढ़ाई करते हैं। कोरोना काल में यहां भूत बाकायदा होमवर्क करते हैं। एक दूसरे का प्रोजेक्ट वर्क भी टीचर से जंचवाते हैं। आप चाहे तो कुम्हारिया के पढ़ाकू भूतों की लाइव स्टोरी प्लांट कर सकते हैं। कोरोना काल में भूतों की पढ़ाई के प्रति आस्था की वैश्विक सराहना कर सकते हैं। भूत और टीचर दोनों को स्टूडियो में बुलाकर लाइव डिबेट करा सकते हैं। आप चाहें तो भूतनियों को बुलाकर जेंडर का अंतरराष्ट्रीय मुद्दा भी उठा सकते हैं। हे न्यूज़ देवता! आपके पास अनंत स्टोरियां है। कृपया करके अब सुशांत के केस को जल्दी निपटा दीजिए। आगे बहुत सारे केस और पाइप लाइन में घुसे पड़े हैं। न्यूज़ें देख-देख कर अब कई लोग सुसाइड जश्न मनाने का इरादा भी करने लगे हैं। खबरिया चैनल की जबरिया न्यूज़ें जबरदस्त है जी!

रामविलास जांगिड़

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