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मिथुन राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: वर्ष के प्रारम्भ में राहु आपके तनु भाव में है तथा शनि महाराज की इस पर द्रष्टि होने के कारण आपके मन में अशान्ति का वातावरण रह सकता है। शनि एवं राहु दोनों शत्रु होने के कारण अधिक मानसिक अशान्ति रह सकती है। 24 जनवरी से 30 जनवरी तक आपको अपनी शारीरिक स्थिति पर ध्यान रखना होगा। 14 मई से 14 जून के समय में यदि यात्रा करें तो लू इत्यादि से बचते हुये अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। नियमित एवं सन्तुलित आहार लेते रहने से स्वास्थ्य अनुकूल बना रहेगा।

आर्थिक स्थिति: वर्ष प्रारम्भ में अपने भाग्यबल के द्वारा आर्थिक आय में वृद्धि कर पायेंगे। 08 फरवरी से 22 मार्च तक मंगल महाराज तथा गुरु महाराज दोनों साथ में धनु राशि में होने के कारण उत्साह एवं आनन्द में वृद्धि होगी तथा कार्य में मन लगेगा। अनेक प्रकार के आभूषण एवं रत्नों की प्राप्ति भी होगी। यदि आप शेयर बाजार से जुड़े हैं, तो वर्ष के पूर्वार्ध में जो निवेश आप करेंगे, उतरार्ध में आपको उसके अच्छे लाभ प्राप्त होंगे। भौतिक सुख में वृद्धि होगी तथा आर्थिक क्षेत्र में भी उन्नति होगी।

व्यवसाय: शासकीय विभाग, सेवा विभाग, प्रशासनिक कार्य अथवा व्यापार उधोग संस्थान में आंशिक सफलता मिल सकती है। खनीज-भूसम्पदा, विद्युत विभाग, पुलिस, आरक्षण विभाग, चिकित्सा एवं कृषि कार्यो में पूर्ण लाभ हो सकता है। नवीन कार्य लाभप्रद होंगे। निजी व्यवसाय के क्षेत्र में कार्यरत जातकों को योजनाबद्ध रूप से कार्य करने से लाभकारी परिणाम प्राप्त होंगे। नौकरी कर रहे जातकों का स्थानान्तरण हो सकता है। अपनी आय एवं व्यय का सन्तुलन बनाकर आगे बढ़ें तथा ऋण लेकर कोई वस्तु न क्रय करें।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: यह वर्ष आपके लिये शान्तिदायक वातावरण का निर्माण करेगा। जिन लोगो की सन्तान विवाहित हैं, उन्हें पौत्र रत्न की प्राप्ति हो सकती है। बेरोजगार जातकों की इच्छापूर्ति 15 जनवरी के उपरान्त हो सकती है, किन्तु पुरुषार्थ करना आवश्यक होगा। माता-पिता, सास-श्वसुर के साथ आपके सम्बन्धो में भी परिवर्तन हो सकता है। यह परिवर्तन अलग होने के रूप में हो सकता है या मतभेद होने के रूप में या मात्र उन परिस्थितियों के रूप में जिन पर आपका पूर्ण नियन्त्रण नहीं हो सकता।

प्रणय जीवन: इस वर्ष में आपका दाम्पत्यजीवन सुखमय व्यतित होंगा। छोटे-मोटे मधुर वाद-विवाद होते रहेंगे, किन्तु वह मात्र प्रेममयी ही होंगे। यदि प्रणय जीवन या प्रेम-प्रसंग के सन्दर्भ में कहें तो इस वर्ष अनेक स्त्रियों का आपकी ओर झुकाव रहेगा, किन्तु आप को सावधानी अवश्य रखनी होगी। स्त्री का साथ एक भिन्न प्रकार की उर्जा आपको देगा, किन्तु आप अपनी मर्यादा का ध्यान रखें। आपकी पत्नी का प्रेम वर्षभर आपको माधुर्यता देगा।

स्त्री जातक फल: स्त्रीवर्ग के लिये यह वर्ष स्वास्थ्य की द्रष्टि से दुर्बल कहा जा सकता है। पुराने रोगों से समस्या होगी। स्त्री सम्बन्धित रोग, उदर पीड़ा, वायुविकार आदि से परेशान रहेंगे। सन्तान उत्पन्न करने योग्य स्त्रियों को गर्भ ठहरेगा। जो दम्पति सन्तान प्राप्ति के इच्छुक हैं, इस वर्ष में उनकी इच्छा पूर्ति होगी। यदि आप अविवाहित हैं तो इस वर्ष आपका विवाह हो सकता है। यदि आप विवाहित हैं, तो जीवन साथी से छोटी-मोटी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक शान्ति रखें।

राजकीय स्थिति: यदि आप राजकीय क्षेत्र से जुड़े हुये हैं, तो इस वर्ष संघर्ष एवं कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। आपके साथ कार्य करने वाले सदस्य ही आपके साथ विश्वासघात कर सकते हैं। आप को शत्रुओं से अधिक मित्र के भेष में छुपे शत्रु से अधिक खतरा रहेगा। सामाजिक सम्पर्क क्षेत्र में विस्तार होगा एवं दूर हुये लोगों का पुन: आपके जीवन में प्रवेश होगा, शान्ति बनाये रखें तथा राजकीय विचारधारा से काम लें। शान्ति एवं धैर्य से कार्य करेंगे तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

विद्यार्थी जीवन: यदि आप परिश्रम करे बिना किसी अन्य पर विश्वास रखकर परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहते हैं, तो असफलता ही प्राप्त होगी। जो जातक दूर संचार, कम्प्यूटर, भौतिक विज्ञान आदि क्षेत्रों में अध्ययन करते हैं, उन्हें अपार सफलता मिलने की सम्भावना है। विज्ञान व प्रौद्योगिकी एवं वकालत के छात्रों को सफलता प्राप्ति में सरलता होगी। 10वीं एवं 12वीं कक्षा के छात्रों को टी.वी. एवं मोबाईल का उपयोग कम ही करना होगा। आत्मविश्वास एवं योग्य परिश्रम करेंगे तो सफलता आप ही की होगी।

सारांश: यदि इस वर्ष आप शान्तिपूर्ण समय व्यतीत करना चाहते हैं, तो वार्तालाप के समय उपयुक्त शब्दों का चयन करें। बिना रुके या निराश हुये, अविरत अपने कार्य में मग्न रहें। यदि किसी प्रकार का पुराना शारीरिक व मानसिक रोग है, तो शीघ्र ही अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करें। 24 जनवरी के उपरान्त अपने व्यवसाय एवं आजीविका पर शक्ति व ध्यान केन्द्रित करें, न ही किसी से ऋण लें तथा न ही किसी अन्य को ऋण दें। पारिवारिक जीवन में छोटी-मोटी बातों से मन दु:खी न करें तथा अपनी बुद्धि को भ्रमित न होने दें। प्रियतमा या पत्नी के साथ वाद-विवाद करने से अच्छा है कि, उनके साथ सुमधुर एवं अविस्मरणीय क्षण व्यतीत करें। किसी विशेष स्पर्धात्मक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो सफलता हेतु सोशियल मिडिया का उपयोग सामान्य ज्ञान एवं नयी सूचनायें प्राप्त करने हेतु करें। आन्तरिक प्रसन्नता भी बनाये रखें। इस वर्ष आपकी सन्तान सम्बन्धित इच्छा पूर्ण होने की आशा है।

मर्यादा: –

  1. वर्ष के प्रारम्भ में कोई दशा नहीं है, किन्तु 24 जनवरी से अष्टम ढैया लोहे के पद से प्रारम्भ होगी, जो पारिवारिक चिन्ता एवं अप्रत्याशित समस्या दे सकती है।
  2. दाम्पत्य जीवन, साझेदारी एवं सामाजिक जीवन में अनावश्यक वाद-विवाद से बचने का यथासम्भव प्रयास करें।
  3. दम्भ, आडम्बर, शक्तिहीन प्रदर्शन तथा मिथ्या अभिमान से दूरी बनाये रखें।
  4. आप उत्तम वक्ता हैं तथा वार्तालाप में कुशल तर्क में निपुण हैं, अतः इन गुणों का सकारात्मक लाभ लें।
  5. सामन्यतः आप महत्वकांक्षी तथा परिश्रमी भी हैं, किन्तु विपरीत परिस्थियों में शीध्र ही व्यथित हो जाते हैं, थोड़े परिवर्तनशील बनें।
  6. आप शीघ्र ही क्रोधित हो जाते हैं एवं तत्काल शान्त भी हो जाते हैं तथा आपको पश्चाताप भी शीघ्र ही होता है। इसलिये अपने व्यावहारिक जीवन में तथा व्यक्तित्व में परिवर्तन करें।
  7. परिवर्तन संसार का नियम है, यदि आप भी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो जीवन में परिवर्तन को स्वीकार करें। समस्याओं के अनुरूप दृष्टिकोण एवं विचार परिवर्तित करेंगे, तो शीघ्र ही सफलता प्राप्ति होगी।

समाधान: –

  • शनिवार के दिन सन्ध्याकाल में ससंकल्प काली उडद, काला तिल, तेल, नीलम, कुलथी, लोहा, काला कपड़ा, दक्षिणा, काला छाता, काले चमड़े के जूते आदि दान करें।
  • कीकर की दातुन करें।
  • नारियल, बादाम तथा उड़द शनिवार के दिन या शनि की होरा में प्रवाहित करें।
  • धन-सम्पत्ति एवं समृद्धि प्राप्त करने हेतु 43 दिन तक प्रतिदिन कौओं को रोटी डालें।
  • मदिरा पान एवं धम्रपान न करें।
  • तेल, सिन्दूर, गुड़ तथा नमक शनिवार की सन्ध्या में किसी अन्नक्षेत्र में दान करें।
  • माता-पिता एवं वृद्धों की सेवा करें।

निम्नलिखित मन्त्र की शनिवार एवं मंगलवार के दिन 1 माला (108बार) जपें।
ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

-पारिवारिक शान्ति के लिये महाकाली के चित्र के समक्ष यथाशक्ति पूजन कर निम्नलिखित मन्त्र का 21 दिनों तक 108 बार जाप करे-
धां धीं धूं धूर्जटे:,पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।

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