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स्ट्रोक के इलाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सालाना वैश्विक स्वास्थ्य दिवस शुरू किया गया

· हर साल 15 मई को विश्व थ्रोम्बेक्टोमी दिवस मनाया जाएगा

· स्ट्रोक के मरीजों को थ्रोम्बेक्टोमी केयर देने से लंबे समय तक उन्हें लकवाग्रस्त होने से बचाया जा सकता है

· भारत में स्ट्रोक संबंधी विकलांगता रोकने के लिए थ्रोम्बेक्टोमी केयर के भौगोलिक विस्तार की जरूरत है

गुरुग्राम। स्ट्रोक के साथ गंभीर दूसरी बीमारियां होने और ज्यादातर मरीजों के समय पर सही उपचार केंद्र नहीं पहुंच पाने को देखते हुए सही समय पर डॉक्टरी परामर्श लेने और जन जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है। साथ ही ऐसे कई मरीजों की जान बचाने के लिए आधुनिक चिकित्सा के बारे में भी उन्हें जानकारी देना जरूरी है।

स्ट्रोक जैसी थ्रोम्बेक्टोमी सर्जरी के इलाज के क्षेत्र में हुई तरक्की से मरीज यदि स्ट्रोक के बाद विंडो पीरियड में डॉक्टर पर पहुंच जाता है तो न सिर्फ उनका इलाज हो सकता है बल्कि ज्यादातर मामलों में ऐसी स्थिति से उन्हें उबारा भी जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सोसायटी आॅफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी (एसवीआईएन) ने 15 मई को सालाना तौर पर पहला और समर्पित विश्व स्ट्रोक थ्रोम्बेक्टोमी दिवस शुरू करने का फैसला किया है।

‘मिशन थ्रोम्बेक्टोमी 2020+’ बैनर तले इस मुहिम का लक्ष्य लोगों को इस बारे में जागरूक करना है कि यदि स्ट्रोक के लक्षण उभरने के 24 घंटे के अंदर थ्रोम्बेक्टोमी सर्जरी करा ली जाती है तो इससे न सिर्फ स्ट्रोक से जुड़ी विकलांगता से लंबे समय तक बचा जा सकता है बल्कि लाखों मरीजों की जान भी बचाई जा सकती है।

विश्व में एमटी2020+ के सभी सदस्य इस कमेटी के साथ दो दिवसीय ग्लोबल एमटी रिवोल्यूशन रीजनल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उपस्थित हुए। दो दिवसीय सत्र में थ्रोम्बेक्टोमी की क्षमता बढ़ने और आम लोगों तक इसकी आसान पहुंच के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. विपुल गुप्ता एमटी2020+ में उत्तर भारत समिति के सह—अध्यक्ष हैं और देश के इस हिस्से में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी से संबंधित डाटा संग्रह और जागरूकता से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।

डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा, ‘एक्यूट स्ट्रोक की स्थिति में बीमारी और मृत्यु के खतरे से बचने के लिए सही समय पर इलाज जरूरी माना जाता है, वहीं कोविड के इस दौर में हेल्थकेयर सिस्टम में बड़ा बदलाव आ गया है। लोगों में जागरूकता बढ़ाने और सजग हो जाने के लिए नई वैश्विक अपील से सभी जरूरतमंद स्ट्रोक मरीजों को थ्रोम्बेक्टोमी केयर हासिल करने में मदद मिलेगी और उन्हें बीमारी और मृत्यु से बचाया जा सकता है। यह मरीजों पर केंद्रित एक और कदम है जो मरीज को सर्वोच्च स्तर की देखभाल पाने के क्षेत्र के रूप में इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी की तरक्की के बारे में बताता है। बहुत कम चीर—फाड़ वाली स्ट्रोक थ्रोम्बेक्टोमी सर्जरी आपातकालीन उपचार का पहला स्थापित मानक है जो अत्यंत प्रभावी और सुरक्षित है। इस उपचार में बंद रक्तनलिकाओं को कैथेटर आधारित डिवाइस के जरिये खोलते हुए रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्थायी रूप से नुकसान होने से बचाया जाता है।’

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी हालिया डाटा के मुताबिक, विश्व में लगभग 1.3 करोड़ लोग हर साल 30—35 फीसदी (लगभग 50 लाख) की दीर्घकालीन विकलांगता दर के साथ स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं। ऐसे मरीजों में विकलांगता की दर बहुत ज्यादा होती है, इसके बावजूद इनमें से 15 लाख मरीजों को ही थ्रोम्बेक्टोमी कराना पड़ता है और इसमें भी सिर्फ 2 लाख लोग यह उपचार प्राप्त कर पाते हैं।

ब्रेन स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है और लंबे समय तक विकलांगता का सबसे बड़ा कारण है। समय पर इलाज कराने से शरीर को होने वाले नुकसान में बहुत कमी आती है, वहीं मरीजों के लिए इसके शुरुआती लक्षणों को जान लेना और तत्काल अस्पताल में भर्ती होना भी बहुत जरूरी होता है। हर साल लगभग 16 लाख भारतीय ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं जिसमें छह लाख से ज्यादा की मौत हो जाती है और जो बच जाते हैं उनमें से 45 फीसदी मरीजों को गंभीर स्थायी विकलांगता से जूझना पड़ता है। हर चौथे युवा में किसी न किसी समय स्ट्रोक का खतरा रहता है।

स्ट्रोक को हालांकि बुजुर्गों का रोग कहा जाता है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी दोगुना होता जाता है, वहीं भारत में स्ट्रोक के सभी मामलों में से 20—30 फीसदी मामले 45 साल से कम उम्र के लोगों में ही देखे गए हैं।

एमटी2020 ग्लोबल के अध्यक्ष और जीईसी के सह—अध्यक्ष तथा एसवीआईएन के पूर्व अध्यक्ष दिलीप यवागल ने कहा, ‘हमें बहुत खुशी है कि इस सालाना विश्व दिवस का एलान किया गया है जिसमें हमें विश्व के विभिन्न संबंधित व्यक्तियों को अपने—अपने क्षेत्र में स्ट्रोक के लिए थ्रोम्बेक्टोमी कराने में सुधार लाने की त्वरित, समान और स्थायी रूप से कार्यवाही करने की अपील करने का मौका मिलेगा। पहला विश्व स्ट्रोक थ्रोम्बेक्टोमी दिवस 15 मई को घोषित किया गया है जिसमें 22 देश अपने अपने क्षेत्र में थ्रोम्बेक्टोमी इलाज को लेकर हुई व्यापक प्रगति पर अपनी रिपोर्ट देंगे।’

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