National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद पर सरकार आशान्वित

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर देशी और वैश्विक संस्थाओं के दावों और प्रतिदावों के बीच भारत सरकार को अभी भी आशा है की हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है और इसे स्थिरता देकर अनुशासित बनाने की कोशिश की है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर 11 साल के निचले स्तर पर रहने के अनुमान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और इसमें फिर से पटरी पर लौटने की पूरी क्षमता है। प्रधानमंत्री ने कहा, हमें साथ मिलकर काम करने और एक राष्ट्र की तरह सोचने की शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव झेलने की ताकत अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारकों की मजबूती और उसके फिर से पटरी पर लौटने की क्षमता को दर्शाती है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा समय में नाजुक हालात में है। लेकिन सरकार इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखती। मोदी सरकार ने देश को वर्ष 2024 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार देश में 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की पूरी क्षमता है। मगर बुनियादी ढांचा और संरचना गड़बड़ाने के कारण ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता। भाजपा और मोदी सरकार अर्थव्यवस्था की मंदी को किसी भी सूरत में स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सरकारी नुमाइंदे कहते है आम आदमी की रोजी रोटी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। गाड़ियां पहले की तरह सड़कों पर दौड़ रही है। निजी क्षेत्रों में रोजगार में कमी नहीं हुई है। बैंक के कर्ज आम आदमी को मुहैया हो रहे है। विकास के कार्य अपनी रफ्तार पर है। दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने मोदी सरकार आने के बाद अर्थव्यवस्था तहस नहस करने का आरोप लगाया है। देश भीषण मंदी के दौर से गुजर रहा है। वहीँ सरकार कहती है यह अस्थाई झटका था जिसे यूपीए सरकार की गलत नीतियों के कारण मोदी सरकार को सहना पड़ रहा है। हम शीघ्र ही 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करेंगे। प्रधानमंत्री ने हाल ही एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 5-6 साल पहले हमारी अर्थव्यवस्था रसातल में जा रही थी…हमारी सरकार ने इसे स्थिरता देकर अनुशासित बनाने की कोशिश की है। पूर्व प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह ने भी देश की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
विश्व बैंक ने 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कम होकर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। हालांकि, उसने कहा है कि अगले साल 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। विश्व बैंक की हालिया जारी ‘वैश्विक आर्थिक संभावनाएं’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के ऋण वितरण में नरमी जारी रहने का अनुमान है, इसके चलते भारत की वृद्धि दर 2019-20 में पांच प्रतिशत तथा 2020-21 में सुधरकर 5.8 प्रतिशत रह सकती है। वहीं, विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 में बांग्लादेश की जीडीपी विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर तथा पाकिस्तान की 2.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के ऋण वितरण में नरमी से भारत में घरेलू मांग पर पर काफी असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत में ऋण की अपर्याप्त उपलब्धता तथा निजी उपभोग में नरमी से गतिविधियां संकुचित हुई हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा हाल ही जारी जीडीपी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2019-20 की जुलाई-सितंबर के दौरान स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी 35.99 लाख करोड़ रुपये रही जो पिछले साल इसी अवधि में 34.43 लाख करोड़ रुपये थी। इसी तरह दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही। सरकार की तरफ से जारी किए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में सरकार को 6.83 ट्रिलियन रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि खर्च 16.55 ट्रिलियन रुपये रहा।
विश्व बैंक के अनुसार, लोगों के उपभोग तथा निवेश में नरमी ने सरकारी खर्च के प्रभाव को नगण्य बना दिया। आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शेष समय में भी गतिविधियों के कमजोर बने रहने की आशंका है। हालांकि, विश्व बैंक ने रसोई गैस पर सब्सिडी को क्रमिक तौर पर समाप्त करने के भारत के प्रयासों की सराहना की है। उसने कहा कि एलपीजी पर सब्सिडी से काला बाजार तैयार हो रहा था और घरेलू इस्तेमाल का एलपीजी व्यावसायिक क्षेत्रों में पहुंच रहा था। सब्सिडी हटाने के कार्यक्रम से काला बाजार समाप्त हुआ। देश को 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए श्रम उत्पादकता को 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ाना होगा। इंडिया रेटिंग्स ने यह बात कही।
भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवें स्थान पर है। जनसंख्या में इसका दूसरा स्थान है। 1991 से भारत में बहुत तेज आर्थिक प्रगति हुई है जब से उदारीकरण और आर्थिक सुधार की नीति लागू की गयी है और भारत विश्व की एक आर्थिक महाशक्ति के रुप में उभरकर आया है। सुधारों से पूर्व मुख्य रुप से भारतीय उद्योगों और व्यापार पर सरकारी नियंत्रण का बोलबाला था और सुधार लागू करने से पूर्व इसका जोरदार विरोध भी हुआ परंतु आर्थिक सुधारों के अच्छे परिणाम सामने आने से विरोध काफी हद तक कम हुआ है। हालांकि मूलभूत ढाँचे में तेज प्रगति न होने से एक बड़ा तबका अब भी नाखुश हैैं।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी .32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar