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पानी और बिजली के प्रति ईमानदारी

हो सकता है आप घरेलू पम्प खरीदने जाएं और विक्रेता पम्प की खूबियाँ कुछ इस प्रकार बताए . यह पम्प बहुत अच्छा है । इससे कारपोरेशन के नल से पानी खींच सकते हैंण् बसए नल से डायरेक्ट कनेक्शन कर दें । मैं खुद अपने घर में कई साल से इस पम्प का उपयोग कर रहा हूँ । अभी तक कोई प्रॉब्लम नहीं हुई वगैरहण्ण्ण् वगैरहण्ण् उन दिनों ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान की सुविधा नहीं थी । पब्लिक सर्विस सेंटर खोले गए थे । कम बिजली बिल देखकर वहां पर नियुक्त कर्मचारी ने तपाक से पूछ थाए ष्क्यों साबए कोई व्यवस्था बना ली क्या घ्श् उसका इशारा मीटर शिथिल करके या डायरेक्ट कनेक्शन लेकर बिजली चोरी की व्यवस्था बना लेने से था । ऐसी सोच दयनीय है । कम बिजली प्रयोग करके बिजली के प्रति मितव्ययी होना आपको शक के दायरे में खड़ा कर सकता है ! आपको बिजली.चोर बना सकता है ।

ज्ञातव्य है कि जल के स्त्रोत सीमित हैं । भू.जल स्तर गिरता जा रहा है । नदियों में जल की मात्रा घट रही है । दिन ब दिन पीने के पानी की कमी हो रही है । इसी प्रकार बिजली उत्पादन के साधन भी सीमित हैं । जबकि इन साधनों को उपयोग करने वालेए बढती जनसंख्या के आंकड़ों के साथ बढ़ रहे हैं । क्या यही एक कारण है कि पानी और बिजली की चोरी इन दिनों आम हो गई सी लगती है घ् हालांकि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं हैं जो ईमानदार हैं । वे आवश्यकताओं को सीमित रखते हैं । उनकी इन साधनों के प्रति मितव्ययिता पूजनीय हैण्

बिजली और पानी चोरों की संख्या बहुतायत में है । इसके आंकड़े देना संभव नहीं है किंतु आस.पड़ोस का अवलोकन करेंगे तो स्थिति साफ हो जाएगी । इसमें हर वर्गए जातिए धर्म और समाज के व्यक्ति शामिल हैं । केवल अशिक्षित ही इस बीमारी के शिकार नहीं है बल्किए उच्च शिक्षित समाज के प्रतिष्ठित और मार्गदर्शक भी बहुतायत में हैं । ऐसे चोर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं । एक तो वे जो गरीब हैं । केवल और केवल प्रकाश के लिए बिजली और जीवनयापन के लिए पानी की चोरी करते हैं । वे अपनी झोपड़ी या घर के पास से गुजरने वाली बिजली के तारों से सीधा कनेक्शन ले लेते हैं । यह कनेक्शन अक्सरए प्रतिदिन शाम को बनाए जाते हैं और सुबह होते.होते निकाल भी दिए जाते हैं । इसी प्रकार ये पास से गुजरने वाली पानी की पाइप लाइन में छेद करके पानी चोरी करते हैं ।

कभी कुछ समय हुआए बिजली चोरी का अनोखा मामला प्रकाश में आया । एक बड़ी इमारत में स्ट्रीट लाइट से बिजली चोरी का मामला था । स्ट्रीट लाइट के तार से सीधा कनेक्शन लिया गया था । आश्चर्य तब हुआ जब यह पाया गया कि इस इमारत से एक तार विकसित कॉलोनी के एक घर को जाता था ! यह तार लगभग 15 मीटर मैदान को खोदकर जमीन के नीचे से डाली गई थी । विकसित कॉलोनी में रहने वाले संपन्न रहवासी को बिजली चोरी करने की क्या जरूरत थी घ् इतनी आमदनी थी कि वह अपने उपयोग के बिजली का भुगतान कर सकता थाए लेकिन फिर भी चोरी की जा रही थी । ऐसे चोरों को मैं दूसरे प्रकार का पानी और बिजली चोर मानता हूं जो केवल चोरी करने के लिए चोरी करते हैं । इनकी संख्या अत्यधिक है । मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर बड़े उद्योगपति तक इस लत के शिकार हैं । इन साधनों की सबसे अधिक बर्बादी भी यहीं से शुरू होती हैए जो केवल जरूरत के लिए चोरी नहीं करते । ऐसे अनेक घर हैं जो नल खुलने के समय से आधे घंटे पूर्व पंप चालू कर देते हैं और नल बंद होने के देर बाद तक चालू रखते हैं । पाइपलाइन में से पानी की एक.एक बूंद चूस लेते हैं । हालांकि जल की आवश्यक मात्रा शीघ्र पूरी हो जाती है । लेकिन शेष पानी बरबाद किया जाता है । प्रतिदिन वाहनए आंगनए छत और बगीचे के पेड़ पौधे धोए जाते हैं । यदि इसके बाद भी पानी आता है तो पाइपलाइन को घर की नाली के मुहाने पर ठूंस दिया जाता है ताकि नाली साफ हो जाए । यह पानी की बर्बादी नहीं तो क्या है घ्

हद तो तब हो जाती है जब महकमों में कार्यरत कर्मी स्वयं पानी और बिजली की चोरी में लिप्त होते हैं । ऐसे चोर ज्यादा निर्भीकए आश्वस्त और चोरी करने की तकनीक में पारंगत होते हैं । इन्हें पकड़े जाने का भय नहीं होता है । वे जानते हैं कि निपटना कैसे है । ऐसे लोग आम चोरों में सम्मानित चोर होते हैं । कभी आप इनके सामने दुखड़ा रोएंए पानी और बिजली की दरों को लेकर चर्चा करेंए ये तुरंत चोरी के तरीके सुझा देंगे ।

मेरा मानना है कि जरूरतमंदों के द्वारा इन साधनों की चोरी उतनी घातक नहीं जितनी तथाकथित समर्थ चोर इन साधनों की बर्बादी करते हैं । कानून इनके सामने बौना है । इन साधनों की बेइंतेहा बर्बादी राष्ट्रीय हित में नहीं है । देश के विकास के लिए इन साधनों के उपयोग के प्रति ईमानदारी और मितव्ययिता पहली शर्त है ।

राकेश सोहम्
एल – 16 , देवयानी काम्प्लेक्स, जय नगर
गढ़ा रोड , जबलपुर [म.प्र ]
फ़ोन : 0761 -2416901 मोब : 08275087650

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