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कितना कारगर कितना मीठास नई शिक्षा नीति-2020 का आगाज

देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिपरिषद द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी दिया जाना शिक्षा जगत के अच्छे दिन के संकेत दे रहे हैं। शिक्षा बजट का लक्ष्य जीडीपी का 6% रखा जाना अब तक की 4. 43 से कहीं ज्यादा है।शिक्षाविदो की राय में शिक्षा की वेहतरी के लिए यह कदम अच्छा माना जा रहा है। जिससे शिक्षा जगत को अवश्य लाभ होगा।भारत दूसरी सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है जहाँ 1028 विश्‍वविद्यालय, 45 हजार कॉलेज, 14 लाख स्‍कूल तथा 33 करोड़ स्‍टूडेंट्स शामिल हैं।यह बदलाव आने वाले भविष्य को निश्चित ही समृद्ध और शक्ति प्रदान करने वाला हो सकता है। देश में लंबे समय से यह एक गंभीर मसला था।शिक्षा में व्याप्त ह्रास को कम करने की ।जिसके लिए सरकार लगातार कोशिशें कर रही थी। देश के होनहारो के प्रति अहम और सकारात्मक सोच सरकार की प्रतिबद्धता पर मुहर है।। वहीं आलोचको के लिए करारा जबाव भी है।इसमें अनेक फारमेट और आप्शन दिए गए हैं। लंबे अंतराल के बाद कोई गैर कांग्रेसी सरकार शिक्षा नीति लागू कर रही है यह 1986 के बाद पहला अवसर है जब इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा।अब तक संशोधनो के जरिए ही कामा चलाया जा रहा था।

(5+3+3+4 फारमूला लागू )

(1) नीति में-10+2 की जगह 5+3+3+4

फार्मेट बनाया गया है।

(2) पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल

के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा

2 शामिल होंगे।

(3) अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5,

इसके बाद तीन साल कक्षा 6 से 8

और अगले चार साल कक्षा 9 से 12

तक होंगे।

(4) छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू

किए जाएंगे।

(5) संगीत और कला को बढ़ावा दियाजाएगा।

भाषा, साहित्य, संगीत,

फिलॉसफी, कला, नृत्य, रंगमंच,

शिक्षा, गणित, स्टैटिक्स, प्योर एंड

अप्लाईड साइंस, समाजशास्त्र,

अर्थशास्त्र, खेल, अनुवाद और

व्याख्या, सभी कालेजों में पढ़ाया

जाएगा।

(6) उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल

रेगुलेटर का गठन किया जाएगा।

(7) मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम

लागू किया गया है।मौजूदा

व्यवस्था में बीच में पढ़ाई छुपाने पर

कोई उपाय नहीं होता।लेकिन अब

ऐसे छात्रों के लिए पुनः अवसर होंगे

(8) शोध को बढ़ावा देने के लिए के लिए

नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन

(एनआरएफ़) की स्थापना की

जाएगी।

(9) छात्रों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति

पोर्टल।

(10) कॉलेजों में अब टीचर्स ट्रेनिंग

डिपार्टमेंट।

(11) प्रैक्टिकल एग्‍जाम्स का होगा

अधिक महत्‍व।

(12) मातृभाषा या लोकल लैंग्वेज पर

जोर।

(13) ई-पाठ्यक्रम पर जोर।

14) शिक्षक की गुणवत्ता पर जोर।

उपर्युक्त कदमों से प्राइमरी से ही मजबूती प्रदान करने की सोच और संकल्प प्रदर्शित हो रही है ।वोकेशनल कोर्स मध्य में है जो आधारभूत फिजिकल विकास, व्यक्तित्व विकास, स्कील विकास, तथा डिजिटल विकास के लिए जरूरी और सार्थक होगा ।
वैसे आदि काल से ही देश शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है। जहाँ गुरू और शिष्य की कहिनीयों से इतिहास भरे पड़े हैं।महाभारत रामायण में भी गुरूओ और उनके वीर शिष्य की कहानियाँ है। नीति तो बनते ही रहेंगे नीति निभाने की प्रक्रिया सही हो तो सब कुछ सही और सुचारू रूप ले सकता है। जरूरत है, इस नीति को अपनाने की।विगत चंद दशकों मे हमी ने हमारी पद्धति को कमजोर की है और इसे व्यवसाय का बाजार बना डाला है।आज योग्यता दब रही है और अयोग्यता हावी है । व्यवस्था में परिवर्तन प्रकृति की तरह होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार न हो और देश के होनहार प्रगति कर सकें।

आशुतोष
(पटना बिहार)

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