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कोरोना काल में कैसे मनाएँ श्रीहनुमान जन्मोत्सव

विवेक मित्तल/विजय न्यूज़ नेटवर्क।

बीकानेर। कोरोना काल में कैसे मनाएँ श्रीहनुमान जन्मोत्सव (जयन्ती) के बार में जानकारी देते हुए सनातन संस्था, दिल्ली की कु. कृतिका खत्री ने बताया कि अनेक भक्त श्रीहनुमान जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रातः हनुमानजी के मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं। सूर्याेदय के समय हनुमान जन्म मनाया जाता है; परन्तु कोरोना महामारी के चलते अनेक स्थानों पर यातायात बंदी के कारण अनेक स्थान पर धार्मिक स्थल बन्द हैं। इसलिए मन्दिरों में जाकर दर्शन करना सम्भव नहीं है। ऐसे में श्रीहनुमान जन्मोत्सव (जयन्ती) के उपलक्ष्य में घर पर ही श्रीहनुमानजी की उपासना करें।
हनुमानजी का जन्मोत्सव प्रातः सूर्याेदय के समय मनाया जाता है। हनुमानजी की मूर्ति अथवा प्रतिमा की यथासम्भव पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पद्धति से पूजा करनी चाहिए। सूर्याेदय के समय शंखनाद कर पूजा आरम्भ करें। भोग लगाने के लिए सोंठ और चीनी का मिश्रण ले सकते हैं। पूजा के उपरान्त श्रीराम एवं श्रीहनुमान की आरती करें।
शनि की साढेसाती के प्रभाव को न्यून (कम) करने के लिए हनुमानजी की पूजा करते हैं। आसुरी शक्तियाँ तथा आध्यात्मिक कष्ट से रक्षा करने हेतु हनुमानजी की उपासना विशेष फलदायी होती हैं, कष्ट को समूल अल्प करने के लिए हनुमानजी का नामजप निरन्तर करना, यही एक उत्तम साधन है। नामजप एवं हनुमान चालीसा का पाठः हनुमान जयन्ती के दिन अन्य दिनों की तुलना में हनुमान तत्त्व 1 सहस्र गुना सक्रिय रहता है। इसका अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए घर पर ही ‘श्रीहनुमान चालीसा’ का पाठ करें, शेष समय ‘श्री हनुमते नमः’ नामजप अधिकाधिक करें! श्रीहनुमान चालीसा पाठ करने के लिए श्रेष्ठ समय दोपहर 12ः09 बजे से 1ः24 बजे तक का है।

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