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बाइडेन सरकार में भी इमरान खान को नहीं मिल रहा भाव, पीएम मोदी का वही रुतबा

पाकिस्तान। पाकिस्तान लगातार अमेरिका संग अपने रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लग रही है. अमेरिका पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर उदासीन बना हुआ है. डोनाल्ड ट्रंप के बाद जब जो बाइडेन ने सत्ता की कमान संभाली तो पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में बदलाव देखने को मिलेगा. उसे उम्मीद थी कि आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर अमेरिका से मदद मिलेगी.
पाकिस्तान के अधिकारियों ने माना कि अब तक तमाम प्रयासों के बावजूद अमेरिका ने ठंडी प्रतिक्रिया दी है. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बाइडेन प्रशासन से रिश्तों को सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है. सुरक्षा सहयोग पर भरोसा करने के बजाय पाकिस्तान आर्थिक रिश्तों को बहाल करने की जुगत में लगा हुआ है. व्यापारिक संबंधों, निवेश, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन को कुछ ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है जहां पाकिस्तान अमेरिकी सहयोग लेना चाहता है.
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि पाकिस्तान अमेरिका से द्विपक्षीय रिश्तों को स्थापित करना चाहता है. इस पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि हम चीनी या भारतीय लेंस से अमेरिका से अपने रिश्तों को नहीं देखना चाहते हैं.
पाकिस्तान के लिए संकट यह है कि अमेरिका का नया बाइडेन प्रशासन इमरान खान सरकार को तवज्जो नहीं दे रहा है. बाइडेन प्रशासन ने अब तक इमरान खान सरकार को कोई पॉजिटिव सिग्नल नहीं दिया है. जबकि भारत को बाइडेन प्रशासन ने पूरी तवज्जो दी है. हिंद प्रशांत और क्वॉड को लेकर अमेरिका भारत को पूरी अहमियत दे रहा है. यहां तक कि अफगानिस्तान शांति वार्ता में भी अमेरिका भारत को बड़ी भूमिका में देखना चाहता है. जो बाइडेन को व्हाइट हाउस में आए करीब ढाई महीने से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से औपचारिक तौर पर फोन पर बात तक नहीं की है. जबकि यह रिवाज सा रहा है कि जब भी अमेरिका का कोई नया प्रमुख बनता है तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से फोन पर बात करता है. बाइडेन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति से बात की है लेकिन इमरान खान से अब तक कोई संपर्क नहीं किया.

बाइडेन ने इमरान खान से नहीं की बात
पाकिस्तान की गुजारिशों के बावजूद बाइडेन ने सीधे इमरान खान से बात नहीं की है. इसे लेकर इसलिए हैरानी जताई जा रही है क्योंकि पाकिस्तान की अफगानिस्तान शांति वार्ता में अहम भूमिका रहने वाली है. इमरान खान सरकार के अधिकारियों को भरोसा है कि अफगान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान को महत्व मिलेगा और बाइडेन जरूर प्रधानमंत्री से बात करेंगे.
इस बीच, बाइडेन प्रशासन ने जलवायु शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण नहीं दिया है. अमेरिका इस महीने के अंत में इस समिट की मेजबानी करने के लिए तैयार है. इससे इमरान खान आहत हैं जबकि भारत को इसके लिए आमंत्रित किया गया है. बाइडेन के क्लाइमेट चेंज दूत जॉन केरी ने भी इस्लामाबाद की अनदेखी की और भारत, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की. इसी तरह अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने हाल ही में भारत और अफगानिस्तान की यात्रा की, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान की अनदेखी की, हालांकि उन्होंने काबुल में फोन पर सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से फोन पर बात की.

पाकिस्तान से क्यों खफा है अमेरिका?
सवाल है कि ऐसा क्या है जिसके चलते अमेरिका पाकिस्तान से इतना खफा है. नए अमेरिकी प्रशासन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने डेनियल पर्ल के कथित मास्टरमाइंड को तब बरी किया गया जब बाइडेन अमेरिका की कमान संभालने जा रहे थे. अमेरिका ने पाकिस्तान से सख्त लहजे में कह चुका है कि अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए.

ऐसा नहीं है कि अमेरिका सिर्फ डेनियल पर्ल केस के चलते पाकिस्तान को लेकर उदासीन है. दूसरी वजह चीन है. माना जा रहा है कि अमेरिका पाकिस्तान से लगातार चीन से दूर रहने की हिदायत दे रहा है. पाकिस्तान चीन से नजदीकी बढ़ा रहा है और वाशिंगटन को ये बात नागवार गुजर रही है.

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