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सार्वजनिक जागरुकता प्रोग्राम का आयोजन किया गया

इन्सटीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज़, अपोलो हाॅस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर जागरुकता बढ़ाने के लिए इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित किया सार्वजनिक जागरुकता प्रोग्राम

विजय न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली। इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन और इन्सटीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज़, अपोलो हाॅस्पिटल्स ने लोगों को स्ट्रोक की पहचान, प्रबंधन एवं रोकथाम के बारे में शिक्षित करने के लिए एक ‘सार्वजनिक जागरुकता प्रोग्राम’ का आयोजन किया। प्रोग्राम का आयोजन, डाॅ विनीत सूरी, सीनियर कन्सलटेन्ट, न्यूरोलोजी एवं को-आर्डिनेटर, न्यूरोलोजी विभाग, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स और प्रेज़ीडेन्ट, इण्डियन स्ट्रोक एसोसिएशन द्वारा किया गया। बैठक में हिस्सा लेने वाले प्रख्यात दिग्गजों में शामिल थे, श्री एल के अडवाणी, भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री; मिस शहनाज़ हुसैन, अग्रणी ब्यूटी चेन की संस्थापक; श्रीमती शर्मिला टैगोर, भारतीय फिल्म अभिनेत्री; श्री अशोक चैहान, संस्थापक, एमिटी युनिवर्सिटी; श्रीमती पिया सिंह, चेयरमैन, डीएलएफ; श्री विजय कपूर, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेन्ट गवर्नर आदि। आमंत्रित लोगों में 200 से अधिक स्ट्रोक से उबर चुके मरीज़ और उनके परिवारजन भी शामिल थे, जिन्हें स्ट्रोक के प्रबंधन और रोकथाम के तरीकों पेर जानकारी दी गई। इस अवसर पर एक सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया, जिसमें — लोगों को सम्मानित किया गया।
डाॅ सुरी ने बताया कि स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है, हर दो सैकण्ड में एक स्ट्रोक होता है और हर 6 सैकण्ड में स्ट्रोक के कारण एक जान चली जाती है। दुनिया में 4 में से एक व्यक्ति को अपने जीवन में स्ट्रोक होता है। इतने भयावह आंकड़ों के बावजूद इसके बारे में जागरुकता की कमी है। स्ट्रोक को न्यूमोनिक BEFAST (B- Sudden Balance loss सवेे यानि अचानक शरीर का संतुलन खोना E- Sudden loss of vision in 1 or both Eyes यानि एक या दोनों आंखों से अचानक देखने में परेशानी F- Face droop यानि चेहरे में बदलावए । A- Arm drift बाजु का सुन्न होना और S- Slurred or difficult Speech यानि बोलने में परेशानी) द्वारा पहचाना जा सकता है।
अगर मरीज़ को पहले कुछ घण्टों के अंदर सही इलाज मिल जाए तो इसका इलाज संभव है या इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इन घण्टों को गोल्डन आवर्स कहा जाता है। इलाज के लिए मरीज़ को इन्ट्रावीनस इन्जेक्शन दिया जाता है जिससे 4.5 घण्टे के अंदर क्लाॅट घुल जाता हे। इसी तरह दिमाग में मौजूद क्लाॅट को निकालने के लिए 6 घण्टे (कुछ मरीज़ों में 24 घण्टे) के अंदर एंजियोग्राफी द्वारा मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी की जाती है। स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों को होने वाली बीमारी नहीं, 10-15 फीसदी स्ट्रोक के मामले युवाओं में होते हैं। जीवनशैली से जुड़ी आदतें जैसे धूम्रपान, नशीली दवाओं का सेवन युवाओं में इसका मुख्य कारण है।  स्ट्रोक के80 फीसदी मामलों को सरल उपायों द्वारा रोका जा सकता है जैसे ब्लड प्रेशर पर नियन्त्रण, उच्च रक्तचाप और मोटापे पर नियन्त्रण, जीवनशैली में बदलाव जैसे नियमित व्यायाम, वज़न कम करना, धूम्रपान न करना, तंबाकू न चबाना और मध्यम मात्रा में शराब का सेवन।

इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स के बारे में
भारत का पहला जेसीआई-मान्यता प्राप्त अस्पताल, इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिल्ली सरकार एवं अपोलो होस्पिटल्स एंटरप्राइज़ लिमिटेड के बीच संयुक्त उद्यम है। जुलाई 1996 में अपोलो होस्पिटल्स ग्रुप द्वारा स्थापित यह अस्पताल तीसरा सुपर स्पेशलटी टर्शरी केयर अस्पताल है। 15 एकड़ में फैले इस अस्पताल में 300 से ज़्यादा स्पेशलटीज़, 19 आॅपरेशन थिएटर, 138 आईसीयू बैड, चौबीसों घण्टे फार्मेसी, छ।ठस्.मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी, 24 घण्टे एमरजेंसी सेवाएं तथा एक सक्रिय एम्बुलेन्स सेवा है। अपोलो होस्पिटल्स दिल्ली भारत में किडनी और लिवर ट्रांसप्लान्ट का प्रमुख प्रोग्राम संचालित करता है। भारत का पहला पीडिएट्रिक एवं एडल्ट लिवर ट्रांसप्लान्ट इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स में ही किया गया। अत्याधुनिक नैदानिक, चिकित्सा एवं सर्जिकल सुविधाओं की सम्पूर्ण रेंज उपलब्ध कराने वाले इस अस्पताल को द वीक सर्वे के द्वारा पिछले कई सालों से भारत के 10 सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों की सूची में शामिल किया जा रहा है।

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