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उद्योग जगत को जल्द कोरोना वायरस संकट दूर होने की अपेक्षा

  • मौजूदा हालात में भारत-चीन व्यापार पर चर्चा में शामिल हुए सभी संबद्ध भागीदार
  • कोरोना वायरस से प्रभावित भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार पर नई दिल्ली में परिचर्चा

विजय न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत और चीन के द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग संबंध का लंबा इतिहास रहा है और पिछले दशक में इसमें लगातार वृद्धि हुई है। भारत और चीन में भी दोनों देशों की बहुत सी कंपनियों के कदम रखने के साथ हमारे आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं। हालांकि कोरोना वायरस की वजह से हाल ही में दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक संबंधों पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। हालात की गंभीरता देखते हुए और भारत और चीन के वर्तमान व्यापार संबंधों को दर्शाने के लिए किरिन क्रेयन्स ने अंतर्राष्ट्रीय विज्ञापन संघ के सहयोग से एक परिचर्चा ‘वी स्टैंड विद चाइना’ का आयोजन किया है। गौरतलब है कि किरिन चीनी ब्रांडों की भारत में तरक्की के लिए उन्हें एकीकृत मार्केटिंग साधन देने वाले संगठनों में प्रमुख नाम है।

चाइना काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (सीसीपीआईटी), चैंबर ऑफ चाइनीज इंटरप्राइजेज इन इंडिया (सीसीईआई), इंडिया चाइना इकनॉमिक एंड कल्चरल काउंसिल (आईसीईसी) और साथ ही, भारत में कार्यरत कई चीनी ब्रांड के प्रतिनिधि इस परिचर्चा में भाग लेने एकजुट हुए ताकि वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियों और दोनों देशों के बीच भावी व्यापार पर संपूर्ण दृष्टिकोण सामने आए।

श्री कुणाल ललानी, को-फाउंडर, किरिन क्रेयन्स और सीएमडी, द क्रेयन्स नेटवर्क ने मेहमानों का स्वागत किया और चर्चा का संदर्भ सामने रखा। “किरिन क्रेयॉन भारत का पहला और एकमात्र चीन-भारत एकीकृत मार्केटिंग प्लैटफाॅर्म है। आज भारत और चीन दोनों देशों के कारोबार में छाई चुप्पी घबराने वाली है क्योंकि लगभग 87 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार खतरे में है। लेकिन हम ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कमर कस लिया है और इस संकट में चीन के लोगों, कारोबारियों और ब्रांडों के साथ खड़े हैं।’’

आयोजन की शुरुआत के बाद श्री सुकृत सिंह, सह-संस्थापक, किरिन क्रेयन्स ने भारत-चीन ब्रांड की कहानी और इसके भविष्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में चीन के साथ एकजुट रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भारत में विभिन्न चीनी ब्रांडों की मौजूदगी के मद्देनजर इस परिचर्चा में विभिन्न संगठनों के मार्केटिंग और विज्ञापन के खर्चों पर कोरोना वायरस के गंभीर प्रभाव के बारे में भी जानकारी दी गई। श्री सुकृत सिंह ने कहा, “चीनी ब्रांड हमारे देश की संरचना के अभिन्न भाग हैं। वर्तमान में चीन में हमारे 8000 से अधिक एग्जीक्युटिव (जो चीनी नव वर्ष मनाने गए थे) हैं। इसका न केवल ब्रांड और मीडिया बल्कि संपूर्ण उद्योग जगत पर डोमिनो इफेक्ट (लंबा दुष्परिणाम) होगा।

परिचर्चा में कई खास विशेषज्ञ मौजूद थे जैसे कि काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (सीसीपीआईटी) के मुख्य प्रतिनिधि श्री हैरिस लिउ; जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में ईस्ट एशियन स्टडीज के चेयरमैन प्रो. श्रीकांत कोडापल्ली; भारत चीन आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिषद के चेयरमैन श्री साकिब; भारत में चीनी उद्यम संघ के अध्यक्ष श्री एलन वांग; और रनिंग विद द ड्रैगन के लेखक श्री साईबाल दासगुप्ता।

परिचर्चा में कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श हुए जैसे भारत-चीन संबंध के ऐतिहासिक महत्व, द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि, सीओवीआईडी-19 का असर और वर्तमान कोरोना वायरस संकट के बाद नव निर्माण।

परिचर्चा में उपस्थित किरिन क्रेयन्स के सह-संस्थापक और विवो इंडिया के पूर्व सीएमओ श्री विवेक झांग और भारत चीन आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद साकीब ने चीन की जमीनी सच्चाई के बारे में बताते हुए कोरोना वायरस के बारे में गलतफहमी और हालात पर काबू पाने और जन जीवन सामान्य करने के सरकार के प्रयासों की जानकारी दी।

श्री विवेक झांग ने वाॅयसकाॅल के माध्यम से कहा, “इस सप्ताह अधिकांश चीनी कंपनियों ने काम शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के प्रमुख ने यह विश्वास दिलाया है कि अप्रैल के अंत तक स्थिति पूरी तरह से काबू में होगी।’’

परिचर्चा के सबसे महत्वपूर्ण अंतिम सत्र में श्री हैरिस लियू, मुख्य प्रतिनिधि, सीसीपीआईटी ने भारत सरकार के समर्थन पर आभार जताया। सीओवीआईडी-9 की वर्तमान स्थिति और निकट भविष्य के बारे में बताया।

भारतीय चीनी उद्यम संघ के अध्यक्ष श्री एलन वैंग ने 2 देशों के संबंध, व्यापार, चुनौतियों आदि के बारे में विस्तार से बताया। यह संघ भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध और व्यापार का प्रमुख भागीदार है। श्री वांग ने बताया, “हमारे संघ के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार अब तक हमारे उद्यमों के केवल 2000 लोग भारत में बने हुए हैं और चीनी कम्पनियों का घाटा 50 मिलियन डॉलर से अधिक है और हमारा मानना है कि यह नुकसान बढ़ रहा है।”

इस बैठक में प्रस्तुत चुनौतियों पर विचार, मंथन और संपूर्ण समाधान के लिए सभी प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ परिचर्चा सम्पन्न हुई। इस दौरान व्यापार, द्विपक्षीय संबंध, वीजा और कोरोना वायरस जैसे सभी अहम् मुद्दों पर संवाद हुए।

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