National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

प्रखर चिंतक,साहित्य मनीषी : हीरो वाधवानी

विजय न्यूज़ नेटवर्क। डॉ. शम्भू पंवार
साहित्यकार, लेखक समाज का आईना होते है। वो समाज में जो देखते है, व्यवहार में जो महसूस करते है, उसे अपनी लेखनी के माध्यम से शब्दों की माला में पिरोकर समाज के सामने पेश करते है। सही मायने में एक सच्चा सामाजिक चिंतक, साहित्यकार समाज हित मे साहित्य सृजन से समाज को दिशा बोध कराता है।
ऐसे ही प्रखर चिंतक, लेखक, साहित्यकार है हीरो वाधवानी। अजमेर (राजस्थान) में श्री कोडूमल व श्रीमती लाली बाई के घर 5 अप्रैल 1952 को जन्मे
हीरो वाधवानी व्यापार के सिलसिले में मनिला (फिलीपींस)में रहते हुवे भी साहित्य सृजन एवं अपनी मातृभूमि के प्रति लगाव हमेशा बनाए रखा।ओर उम्र के इस पड़ाव पर यह लगाव उनको वापस अपनी जन्म भूमि अजमेर ले आया है।और साहित्य सृजन आज भी जारी है।
वाधवानी का बचपन से ही लेखन के प्रति झुकाव रहा। आठवीं कक्षा में ही उन्होंने कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। और जब दसवीं कक्षा में आए तब उनकी एक एकांकी एक रचना “बंद मुट्ठी का राज” को काफी प्रसिद्धि मिली। तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके अंदर एक रचनाकार भी है और यह एहसास आज तक लेखन से जोड़े हुवे है। वाधवानी जी ने वास्तविक घटना पर आधारित एक और रचना “तीन कंधों वाली अर्थी” को काफी प्रसिद्धि मिली,यह रचना उनकी एक पुस्तक “अदबी आइनो ” नामक सिंधी पुस्तक में है।
हीरो वाधवानी जी ने गद्य, साहित्य की 25 विविध विधाओं पर लिख चुके है।तथा 5 भाषाओं (हिंदी अंग्रेजी उर्दू सिंधी फिलिपिनो) के ज्ञाता हैं। इनकी 5 पुस्तकें अदबी आइनो,प्रेरक,सिंधी सुविचार,सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियां और मनोहर कृतियां है।
आज के व्यस्त जीवन में एक प्रखर चिंतक व साहित्य मनीषी हीरो वाधवानी जी ने सूक्तियों के जरिए अपने प्रखर चिंतन व सकारात्मक विचारों से जनमानस को अनमोल संग्रह दिया है।अपने जीवन के अनुभव को सरल व सहज रूप में अभिव्यक्त किया है, जो पाठक में सकारात्मक ऊर्जा का नव संचार करने में सक्षम है।हर एक सूक्ति जीवन के हर पहलू को सकारात्मक जीवन जीने के लिए पथ प्रदर्शक का कार्य करती है।
कुछ अनमोल सूक्तियां इस प्रकार है:-
* मां है तो अंधेरे में से भी रोशनी की किरण निकाल लेती है ।
*शरीर का बोझ, ईर्ष्या और अहंकार के बोझ से कम होता है ।
*सदाचारी, संयमी और परोपकारी इंसान ईश्वर के अधिक निकट है ।
* दुखी मां की आंखों से बहने वाले आँसुओ से ईश्वर के पैर झुलसते है।
* ज्ञान और भोजन ईश्वर का प्रसाद है, इन्हें बांटना चाहिए। *आलस्य, सफलता और समय का दुश्मन है।
* जब सास और बहू मिलकर हँसती है तो घर मुस्कुराता है।
* मां, ईश्वर से एक ओंस ज्यादा है।
*हिम्मतवाला इंसान हाथी से भी अधिक शक्तिशाली होता है।
* नेकी हरी-भरी बदी उजड़ी हुई फसल है।
*बेटा हीरो हो या ना हो बेटी अधिकतर पारसमणि होती है।
* सत्य की जड़े समुद्र होती है और झूठ बिना जड़े वाला होता है ।

हीरो वाधवानी जी की सूक्तियां को पढ़ने से एक निराश व हताश इंसान में भी आशा की लो जागृत हो जाती है।सूक्तियों को जो इंसान अपने जीवन में अपना लेता है तो मानो उसने जीवन का सार पा लिया है।
पदम भूषण, महाकवि, गीतकार गोपालदास नीरज जी ने इनकी पुस्तक को पारस पत्थर की तरह बताया है।इस महान विभूति के विचारों से चिंतक हीरो वाधवानी जी की लेखनी का महत्तव सहज ही लगाया जा सकता है।
वाधवानी जी लेखनी समाज में एक सकारात्मक एवं आशावादी सोच जागृत करने में सक्षम है, जो सुखद जीवन का सार बताते हुवे,नैतिकता का अहसास कराती है।वास्तव में हीरो वाधवानी जी एक प्रखर चिंतक व साहित्यकार है।
.

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar