National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

मुझमे हमेशा के लिए बस चुकी है ‘किरण’

‘किरण’ से इमोशनली अटैच हो चुकी हूँ

काजल यादव ने बातचीत के दौरान कहा
मुंबई में पलने-बढ़ने की वजह से मै बिहार की संस्कृति और रहन-सहन से पूरी तरह अनजान थी। लेकिन जब फिल्म आशीर्वाद छठी मैया में किरण का किरदार निभाया तो उस किरदार की सादगी ने मेरे दिल मेरे दिल मेँ घर कर लिया। दिन बीतने के साथ मै काजल से किरण बनने लगी। इस बात का अहसास मुझे दुबई स्टेज शो के दौरान हुआ। दरअसल ,एक परफार्मेंस के दौरान मुझे मिनी स्कर्ट पहननी थी और मै खुद को असहज महसूस करने लगी। मुझे बार-बार साड़ी में लिपटी किरण याद आने लगी।परेशान होकर मैंने जब मां को फोन लगया तो मां बोल पड़ी कि मै किरदार से बाहर नही निकल पाई हूं और बाहर निकलने में थोड़ा वक्त लगेगा। लेकिन मुझे लगता है कि किरण हमेशा के लिए मुझमें बस चुकी है, जिसे मै कभी भी खुद से बाहर नही निकाल पाऊँगी। भोजपुरी सिनेमा का चर्चित चेहरा काजल यादव ने बातचीत के दौरान ये बात कही। फिल्म आशीर्वाद छठी मैया में काजल, किरण का किरदार निभाया है । ये फिल्म भोजपुरी चैनल B4U भोजपुरी की प्रस्तुति है : –

सवाल : किरण बनकर छठ को जान पाई
जवाब : मै कभी भी छठ का हिस्सा नही बन सकी थी। पिछले साल छठ का प्रसाद खाने का मौका मिला था। जब स्क्रिप्ट में छठ के 36 घंटे की निर्जला व्रत की कठिन तपस्या के बारे में पढ़ा तो मेरे रोंगेटे खड़े हो गये। मै इस मौके पर को-एक्टर आदित्य ओझा का धन्यवाद करना चाहती हूं, दरअसल उनके परिवार में हमेशा छठ मनाया जाता है, सेट पर वो मुझे छठ की एक-एक बारिकी से अवगत कराते थे। जिससे मुझे इस त्यौहार को समझने और शार्ट देने में आसानी हुई।

सवाल : लड़कियों के लिए सबसे सेफ है भोजपुरी इंडस्ट्री
जवाब : मैने अपने करियर की शुरूआत तेलुगु सिनेमा से की थी, लेकिन मै साऊथ इंडस्ट्री को समझ नही पाई। हिन्दी की भी फिल्में की, लेकिन भोजपुरी का चटपटा फ्लेवर मुझे भा गया, या यूं कहूं कि ये मेरे अंदर समा गया। दरअसल भोजपुरी इंडस्ट्री ने मुझे बहुत सम्मान दिया और मै यहां खुद को बहुत सहज महसूस करती हूं। मुझे लगता है कि दूसरे इंडस्ट्री की अपेक्षा लड़कियां भोजपुरी इंडस्ट्री में ज्यादा सुरक्षित हैं।

इंडस्ट्री में नहीं चलता नेपोटिज्म का सिक्का
इंडस्ट्री उन्ही का सम्मान करती है जो काबिल हैं किसी बड़े डायरेक्टर या फिर सुपरस्टार के बच्चे होने पर आपको एंट्री जरूर आसानी से मिल जाती है । लेकिन आपके किस्मत का फैसला जनता करती है और आप केवल अपनी काबिलियत के दम पर ही जनता के दिल में जगह बना सकते हैं, नेपोटिज्म के बल पर नहीं।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar