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खुद की जिम्मेदारी है कोरोना से बचाव

किसी भी विपरीत परिस्थिति से उबरने का सर्वोत्तम तरीका है संयम, अनुशासन, नेक नीयत ,और सकारात्मक सोच। हम सभी जानते हैं आज हमारा देश ही नहीं अपितु पूरा विश्व कोरोना संकट से जूझ रहा है । गत वर्ष भारत में जब इसने दस्तक दी थी तब हमें यह विश्वास था कि हम सभी एकजुट होकर इस महामारी पर विजय प्राप्त कर लेंगे । और कुछ हद तक हमें इसमें सफलता भी प्राप्त हुई। लेकिन पूरी तरह सफल होते उससे पहले कोरोनावायरस ओर भी घातक रूप में हमारे सामने आ गया। इसका कारण यह भी रहा कि हमने अपने आप को समय से पहले मुक्त कर दिया और कोरोना वायरस के लिए जो भी सावधानियां बरतनी चाहिए थी उनमें चूक होने लगी।
आज यह संकट भयानक रूप ले चुका है और हर इंसान इससे भयभीत भी है। रोजमर्रा की तस्वीरें सचमुच दर्दनाक हैं जहां कोरोना से मौतों के आंकड़े थमने का नाम ही नहीं ले रहे।
बहुत तकलीफ होती है देश और दुनिया का ये हाल देख कर और मन में एक ही सवाल उठता है…
इस रात की सुबह कब होगी ?
लेकिन प्रकृति ने मनुष्य को सोचने समझने की भरपूर क्षमता दी है, साथ ही समस्याओं का हल निकाल पाने का साहस व विवेक भी दिया है।
ऐसी स्थिति में हमें समझना होगा कि यह समस्या चंद दिनों या महीनों में खत्म होने वाली समस्या नहीं है लेकिन इस समस्या का समाधान हम इंसानों के पास ही है यदि हर इंसान खुद की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से उठाएं । यही इस बीमारी से बचने का एकमात्र तरीका है ।उचित दूरी मास्क है जरूरी, साफ-सफाई , नियमित दिनचर्या व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। प्रत्येक इंसान को इन बातों को अपने व्यवहार में इस तरह से लाना होगा जैसे वह सांसे लेता है।
एक जिम्मेदार नागरिक का दायित्व निभाते हुए इंसान को अपने में इंसानियत को जिंदा रखने की भी नितांत आवश्यकता है । जैसे खुद के बचाव के साथ दूसरे के बचाव का भी ध्यान रखना। आज एक तरफ लाखों कोरोना संक्रमित जहां इलाज के लिए जूझ रहे हैं वहीं उन्हें मदद करने के लिए बहुत सी निस्वार्थ समाज सेवी संस्थाएं व इंसानी जिगर रखने वाले लोग पर्सनल मदद करते हैं तो दूसरी तरफ ऑक्सीजन सिलेंडर की हेरा फेरी, दवाओं व इंजेक्शनों मैं मिलावट और उन्हें दुगुने तिगुने दाम पर बेचना ,जैसी बातें दिल को व्यथित करती हैं। जहां सभी का जीवन दाव पर लगा हो वहां पर भी यदि व्यक्ति अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए सोचेगा तो किसी के लिए भी ऐसे वायरस से मुक्ति पाना नामुमकिन होगा ।
याद रखने की बात है कि कोरोनावायरस की वैक्सीन तो बन चुकी है लेकिन इंसानियत सिखाने की कोई वैक्सीन नहीं होती वह तो इंसान को इंसान होने के अहसास से आती है । जो किसी का दर्द देखे तो सिहर उठे किसी की मुसीबत में मदद के लिए आगे बढ़कर मदद के लिए बढ़ सके। कोरोना काल शायद हमें यही समझाना चाहता है । यदि अब भी हमने अपनी मानसिकता नहीं बदली तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे पास पछतावे के सिवाय कुछ नहीं होगा।
कोरोना महामारी में आज कुछ अपवादों को छोड़ दें तो कितने ही डॉ अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हमें उनके प्रति आभारी होना चाहिए। पुलिस कर्मी, बैंक कर्मी, सफाई कर्मी , सब्जी वाले,राशन वाले , होम डिलीवरी वाले ,घर में काम करने वाले, फैक्ट्री में काम करने वाले, मीडिया कर्मी सभी दिन रात देश के लिए अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए लाॅकडाउन के चलते हमें अपने घरों में रहने की हिदायत दी गई है कुछ छूट के साथ कि जब बहुत जरूरी है तभी बाहर जाना है यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे किसी आजाद परिंदे को अचानक से पिंजरे में बंद कर दिया गया हो। लेकिन ये हमारे भले के लिए ही है। बस हमें अपने लिए अपने घर में ही खुला आकाश खोजना होगा और वह है अपने अंदर छिपी प्रतिभा को निखारना।वह कुछ भी हो सकती है जैसे चित्रकारी , बागवानी ,पाक कला नृत्य कला , किताबें पढ़ना , लिखना और परिवार के साथ वक्त बिताना ।इससे हमारे अंदर सकारात्मकता का संचार होगा ।यह भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है जो कि रोग से लड़ने में इंसान की मदद करती है ।साथ ही हर इंसान को कोरोना का वैक्सीन भी जरूर लगाना चाहिए सरकार की गाइडलाइन का पूरी ईमानदारी के साथ पालना करनी चाहिए ताकि हम इस वायरस से जल्द से जल्द निजात पा सकें।

कुछ पंक्तियां यहां लिखना चाहूंगी

कोरोना का कहर भी थम जाएगा
क्षति का दौर भी थम जाएगा
आस का दीप रखना मन में जला कर
जन जीवन भी पटरी पे दौड़ जाएगा

हिमाद्री ‘समर्थ ‘

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