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व्यंग्य : जरूरी है राष्ट्रीय गाली कोष का निर्माण

देश में भयंकर लोकतांत्रिक व्यवस्था है और कहीं न कहीं किसी न किसी स्थान पर रोज ही चुनाव होते रहते हैं। देश में हर कहीं आदर्श आचरण संहिता का पालन करने वाले मौजूद रहते हैं। पार्टियां एक दूसरे को गाली-गलौज कर सरेआम आचार संहिता का पालन करती है। रंग-बिरंगी पार्टियां गालियों की मौजूदगी में खुलेआम राजनीतिक कार्यक्रमों को संपन्न करती है। हर एक पार्टी दूसरी पार्टी को धोखेबाज, मूर्ख, गधा आदि कहकर उन्हें सम्मानित करती है, जो सर्वथा उचित ही है। हर एक नेता व चमचा अपने-अपने ढंग से अपने-अपने मौलिक अंदाज में गालीधर्मा शब्दों की गाल में लुगदी बनाकर चलता-फिरता है और फटाक गाली दे मारता है। गाली के राष्ट्रीय कार्यक्रम को विधिपूर्वक संचालित करता है।कब कौनसा नेता कब किस नेता पर गालियों की बौछारें कर दे यह तय नहीं है। ऐसे में हमें एक राष्ट्रीय गाली कोष की स्थापना करनी चाहिए। बड़ी व छोटी सभी प्रकार की पार्टियों को हर प्रकार के माहौल में इस जनतांत्रिक व्यवस्था में कई प्रकार की गालियों की आवश्यकता होती है। चुनावी रैली के माइक का गला भी बिना गालियों के खाली नहीं रहता है अतः राष्ट्रहित में समस्त पार्टियों को एक-एक गाली गिफ्ट देना चाहिए। सभी पार्टियों को राष्ट्रीय गाली संहिता के आचरण के अनुकूल गालियां समर्पित करने की आजादी देनी चाहिए।

कई शीर्ष और निम्न स्तरीय महानुभावों ने गाली कला को कई चुनावों में महत्ता प्रदान की है। ऐसे चोटी के गालीशास्त्री को गाली कोष रचना के लिए अब शीघ्र ही राष्ट्र का आह्वान करना चाहिए। दूसरों पर कीचड़ उछालने वाले, दूसरों के चरित्रों को नीचा दिखाने वाले व उन्हें जूता दिखा कर के मीडियागर्दी मचाने वाले संत-नेताओं से राष्ट्रीय गाली कोष निर्माण पर टिप्पणियां मांगी जानी चाहिए। सौभाग्य से इस मामले में हमारा राष्ट्र गालियों को निर्यात करने की स्थिति में है। साथ ही कई रैला-रैलियों में गालियां बकने …सॉरी सॉरी समर्पित करने के लिए विभिन्न नियमानुसार आयोजन करने चाहिए। देश के कई राज्य इस मामले में पहले से ही आत्मनिर्भर है और उन्होंने विभिन्न प्रकार की रैला- रैलियों का आयोजन जारी कर रखा है। सबसे पहले आक-थू रैली का आयोजन करना चाहिए। इसके बाद धिक्कार रैली, पर्दाफाश रैली, छूमंतर रैली, तू गंजा रैली जैसी रैलियों को भी उपयोग में लेना आवश्यक है। आंखे खोलो रैली, थूक-थक्कारा रैली, कुत्ता रैली, गधा रैली, हाय थू-थू रैली, तू तू तू तू मैं मैं रैली, धक्कम पछाड़ रैली, टांगा- टोली रैली जैसी कई राजनीतिक सामाजिक न्याय वादी रैलियों का आयोजन गाली कोष के साये में होना चाहिए। राजनीति में गाली और ससुराल में साली का बड़ा महत्व है। किसी रैली-रैला में गालीमय ताली और फंसाने के लिए जाली का बड़ा महत्व है। राजनीति चमकाने में गालीपूर्ण रैली और भाषण में गाली युक्त शैली का बड़ा महत्व है। अब रैली से बढ़कर महा रैला निकालना चाहिए। गाली कोष की प्रतियां हर एक नेता के हाथ में देनी चाहिए। चलूं! पीछे गली में कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता ने एक धामा-धीम रैली निकाली है और इस रैली में वह विपक्षी पार्टियों को बारंबार भयंकरतम गाली विसर्जित कर रहा है। उसकी दो-चार गालियां इकट्ठी कर लूं ताकि राष्ट्रीय गाली कोष निर्माण में मदद मिल सके।

रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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