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नौकरी, मुलाकात, रेप, हत्या, एक्सीडेंट और मौतें…उन्नाव केस में अब जाकर हुआ इंसाफ

विजय कुमार दिवाकर
उन्नाव रेप केस के दोषी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर की सजा पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाते हुए 25 लाख रुपये जुर्माना का भी ऐलान किया. बता दें कि जज धर्मेश शर्मा ने कुलदीप सेंगर के वकीलों की तरफ से दिए गए हलफनामों को पढ़ा और केस में बहस हुई.
इससे पहले तीस हजारी कोर्ट में सेंगर की सजा पर सुनवाई हुई थी. इस दौरान सीबीआई ने दोषी सेंगर को उम्र कैद देने की मांग की थी. सीबीआई ने कहा कि मामला सिर्फ बलात्कार का नहीं, बल्कि इसमें मानसिक उत्पीड़न भी शामिल है. वहीं, इससे पहले इस मामले में तीस हजारी कोर्ट ने जांच को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी. आइए जानते हैं, कब क्या हुआ?

कुलदीप सिंह सेंगर ने दिया आय और संपत्ति का पूरा ब्योरा
सेंगर के दस्तावेजों के आधार पर उसकी कुल चल और अचल संपत्ति 44 लाख रुपये आंकी गई है. सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील ने कहा कि इसका मूल्य फिलहाल घट चुका है, क्योंकि उनकी कार की कीमत कम हो चुकी है. इसके अलावा सेंगर की बेटी का मेडिकल में दाखिला कराया गया है, जिसकी फीस देने के बाद ये रकम और कम हो जाएगी.
वहीं पीड़िता के वकील ने कहा कि उन्नाव की पीड़िता का घर पूरी तरह से टूट गया है. इसके अलावा पीड़िता के पिता के पास 3 भाइयों के बीच कुल 3 बीघा जमीन है. पीड़िता के वकील ने कहा कि विधायक ने अपने अपराध को छुपाने के लिए न सिर्फ केस को वापस लेने का दवाब बनाया बल्कि विधायक होकर ऐसा काम किया. अगर देश को चलाने वाले लोग जिनपर जनता की रक्षा का दायित्व है, वो ऐसा करेंगे तो फिर उनको सज़ा भी अधिकतम होनी चाहिए.

  • 4 जून 2017 को उन्नाव के माखी गांव से युवती गायब हुई. थाने में सुनवाई न होने पर पीड़िता की मां कोर्ट पहुंची. सात दिन बाद कोर्ट के दखल पर केस दर्ज हुआ.
  • 3 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता दिल्ली से पेशी पर आए. इसके बाद गांव पहुंचे, जहां विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल व अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की. विधायक पक्ष की तहरीर पर माखी थाना ने युवती के पिता पर आर्म्स एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर दी.
  • 4 अप्रैल 2018 को पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने माखी गांव के ही विनीत, सोनू, बउवा और शैलू समेत अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया. वहीं, इस मुकदमे में पुलिस ने विधायक के भाई अतुल सिंह का नाम हटा दिया.
  • 5 अप्रैल 2018 को पुलिस ने जिला अस्पताल में इलाज करने के बाद शाम को युवती के पिता को जेल भेज दिया, जबकि परिवार वाले इलाज कराने की मांग करते रहे.
  • 8 अप्रैल 2018 को पिता को झूठे मुकदमे में फंसाने और हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए युवती ने परिवार सहित लखनऊ में सीएम आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की. वहीं, जेल में बंद युवती के पिता की हालत भी बिगड़ गई और रात 9 बजे जेल अधीक्षक एके सिंह ने जिला अस्पताल भेजा. सुबह 3:49 बजे युवती के पिता की मौत हो गई.
  • 9 अप्रैल 2018 को इलाज के दौरान युवती के पिता की मौत का मामला तूल पकड़ा, तब सरकार ने कार्रवाई तेज की.
  • 10 अप्रैल 2018 को राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराई. जांच रिपोर्ट के बाद विधायक के भाई अतुल सिंह समेत 5 लोगों पर युवती के पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई.
  • 12 अप्रैल 2018 को मामला दिल्ली पहुंचा और कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा. इसके अलावा इसी रात यूपी सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच की मंजूरी दी. उसके बाद सुबह तड़के सीबीआई ने विधायक कुलदीप सेंगर और शशि सिंह के खिलाफ रिपोर्ट की.
  • 13 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने सेंगर को लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया.
  • 15 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने 14 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की.
  • 8 मई 2018 को पीड़िता के चाचा की आपत्ति पर विधायक को उन्नाव जेल से सीतापुर जेल भेज दिया गया.
  • 28 जुलाई 2019 को रायबरेली जेल में बंद चाचा से मिलने के लिए युवती अपने वकील की कार से चाची और मासी के साथ जेल जा रही थी, तभी कार की ट्रक से भिड़ंत हो गई, जिसमें चाची और मासी की मौत हो गई. वहीं, वकील और युवती बुरी तरह घायल हो गए.
  • 1 अगस्त 2019 को चीफ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने सभी पांचों मामले लखनऊ की अदालत से दिल्ली की सीबीआई अदालत को ट्रांसफर करने के आदेश दिए और कहा कि 45 दिनों में सुनवाई पूरी की जाए.
  • 2 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा की सुरक्षा को लकेर रायबरेली की जेल से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया.
  • 5 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को इलाज के लिए लखनऊ से दिल्ली लाने का आदेश दिया.
  • 9 अगस्त 2019 को दिल्ली की एक अदालत ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ आरोप तय कर दिए. सेंगर को धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण या उत्पीड़न), 376 (बलात्कार और अन्य संबंधित धाराओं) और POCSO के तहत दोषी ठहराया गया.
  • 14 अगस्त 2019 को पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सेंगर सहित नौ लोगों पर कोर्ट ने आरोप तय किए.
  • 7 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के एम्स में अस्थाई तौर पर कोर्ट लगाने का आदेश दिया.
  • 29 सितंबर 2019 को दिल्ली महिला आयोग ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में पीड़िता और उसके परिवार के लिए अस्थाई तौर पर रहने की व्यवस्था एक सुरक्षित स्थान पर की जाएगी.
  • 11 अक्टूबर 2019 को पीड़िता की कार पर हमले के मामले में सीबीआई ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
  • 10 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने 16 दिसंबर के लिए अपना फैसला सुरक्षित रखा.
  • 16 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को अपहरण और रेप मामले में दोषी करार दिया.

नौकरी, मुलाकात और बलात्कार
उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से मिलने के लिए उनके घर के करीब रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी एक महिला के साथ 4 जून 2017 को नौकरी मांगने के लिए पहुंची थी. जो महिला किशोरी को लेकर वहां गई थी. उसका नाम था शशि सिंह. वो सेंगर की करीबी थी. उसी के बाद अचानक एक दिन उस किशोरी ने खुलासा किया कि विधायक ने उसके साथ बलात्कार किया है. लड़की और उसका परिवार थाने के चक्कर लगाते रहे.
अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार उन्होंने कोर्ट की शरण ली. तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया. इसके बाद शुरू हुआ किशोरी के परिवार पर ज्यादती का सिलसिला. लड़की पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था. उसे मुकदमा वापस लेने के लिए कहा जा रहा था. लेकिन ये मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया. सत्तारुढ़ पार्टी के विधायक के खिलाफ सूबे की पुलिस जांच में लीपापोती कर रही थी.
लड़की के परिवार को धमका रही थी. लेकिन पीड़िता ने इंसाफ की आस नहीं छोड़ी. मामला जब तूल पकड़ने लगा तो अप्रैल 2018 में जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई. उसी वक्त सीबीआई की टीम ने आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पूछताछ के लिए बुलाया. अधिकारियों को भी दाल में काला नजर आ रहा था. तभी इलाहाबाद उच्च न्यायालय पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए इस मामले का संज्ञान लिया और सीबीआई को फरमान सुनाया कि फौरन आरोपी विधायक को गिरफ्तार करे.
सीबीआई ने अलग से प्राथमिकी दर्ज की और सेंगर को गिरफ्तारी के बाद एक सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में रखा गया. मामला को लेकर जनता में आक्रोश बढ़ रहा था. लिहाजा सीबीआई की टीम भी तेजी से काम कर रही थी. सीबीआई ने जांच के बाद पीड़िता के बलात्कार के आरोप की पुष्टि कर दी. आरोपी विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण की 4 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

हत्या और हत्या का प्रयास
इस मामले में पहले तो विधायक सेंगर के भाई अतुल ने पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा फिर उसे साजिश के तहत झूठे मामलों में फंसा कर पुलिस थाने भिजवा दिया. जहां उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में बहुत बाद में अतुल को गिरफ्तार किया गया. जब विधायक सेंगर जेल चला गया, तब भी वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. वो जेल में रहकर भी पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ साजिश रचता रहा.
28 जुलाई 2019 को, पीड़िता के अपने चाचा, चाची और वकील के साथ उनकी कार में केस के सिलसिले में यात्रा कर रही थी. तभी हाइवे पर एक ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी. जिससे पीड़िता के परिजनों की मौत हो गई, जबकि वो और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए. इस मामले में सेंगर पर हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और आपराधिक धमकी के लिए मामला दर्ज किया गया. एफआईआर में सेंगर के भाई मनोज सिंह सेंगर, शशि सिंह और उनके सहयोगियों सहित 10 लोगों को नामजद किया गया.

भाजपा से निष्कासन
इस मामले में बीजेपी के आला नेता पहले कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने की कोशिश करते रहे. यही नहीं जेल में बंद होने पर भी सेंगर लगातार नेताओं से मिल रहा था. वो खुद को बचाने के लिए हर तरह से कोशिशें करता रहा. लेकिन जब ये मामला देशभर में छाया और लोग सड़कों पर उतर आए.
विपक्ष ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया तो भाजपा ने उसे पार्टी से निलंबित कर दिया. अगस्त 2019 में बड़े पैमाने पर बीजेपी की यूपी सरकार को सार्वजनिक और राजनीतिक आक्रोश का सामना करना पड़ा. हालांकि निलंबन और बाद में निष्कासन के बाद भी सेंगर को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित नहीं किया गया.

उन्नाव रेप कांड के पीछे है 18 साल पुरानी दुश्मनी
उन्नाव रेप कांड की पीड़िता के परिवार और आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के बीच दुश्मनी का रिश्ता 18 साल पुराना है. यही वजह है कि पीड़िता की चाची और मौसी की मौत का इल्जाम भी विधायक सेंगर के सिर पर है. इससे पहले पीड़िता के ताऊ, फिर पिता की मौत के लिए भी विधायक को ही ज़िम्मेदार ठहराया गया था. यहां तक कि पीड़िता के चाचा को हत्या की कोशिश के मुकदमे में फंसाने के लिए भी साजिश रचने का इल्जाम विधायक सेंगर पर ही है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसले के बाद अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर 18 साल पहले पीड़िता के परिवार और विधायक के बीच रंजिश शुरू कैसे हुई थी? हम आपको बताते हैं. दरअसल, इस कहानी की शुरूआत उन्नाव जिले के माखी गांव से होती है. माखी गांव के सराय थोक मोहल्ला में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़ित लड़की का घर है. दोनों घरों के बीच करीब 50 कदम का फासला है.
कहानी में हम आपको कुछ साल पीछे लेकर चलते हैं. माखी गांव के सराय थोक मोहल्ले में तीन भाई रहा करते थे. तीनों भाई इलाके में दबंग के तौर पर जाने जाते थे. इन पर कई अलग-अलग मुकदमे भी दर्ज थे. पीड़िता के ताऊ की करीब 15 साल पहले गांव में ही पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी.
पीड़िता का चाचा इस वक्त रायबरेली जेल में बंद है. उसी से मिलने के लिए रविवार को पीड़िता जेल जा रही थी. जबकि पप्पू सिंह पीड़िता के पिता थे. जिनकी विधायक के भाई और उसके गुर्गों के हाथों पिटाई के बाद 2017 में मौत हो गई थी.
यानी पीड़ित लड़की के ताऊ और पिता दोनों मारे जा चुके हैं. जबकि पीड़िता का चाचा हत्या की कोशिश के एक मामले में रायबरेली की जेल में दस साल की सजा काट रहा है. और इसी चाचा की पत्नी और साली की भी अब उसी सड़क हादसे में मौत हो चुकी है, जिसे लेकर तमाम शक और सवाल उठ रहे हैं.
अब यहां जो सबसे अहम बात है वो ये कि एक ताऊ की मौत को छोड़ दें तो बाकि हर मौत और चाचा के जेल जाने को लेकर सीधे उंगली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की तरफ उठ रही है. यहां तक कि रेप का इल्ज़ाम भी उसी के सिर है. और अब इस सड़क हादसे का शक उसी पर जा रहा है. पर ऐसा क्यों? क्यों करीब डेढ़ दशक में एक पूरा परिवार बिखर गया? रेप पीड़ित लड़की के और विधायक के परिवार के बीच क्या कोई पुरानी दुश्मनी है? अगर हां तो किस बात पर?
तो कहानी शुरू होती है 2002 में. तब से पहले तक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़ित लड़की के ताऊ, चाचा और पिता से कुलदीप सिंह सेंगर की खूब बनती थी. सभी का एक-दूसरे के घर आना जाना था. खाना-पीना था. 2002 में जब कुलदीप सिंह सेंगर पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहा था, तब पीड़ित लड़की के ताऊ, चाचा और पिता ने सेंगर को चुनाव जितवाने में भरपूर मदद की थी.
मगर पहली बार विधायक बनने के बाद कुलदीप सिंह सेंगर ने अचानक तीनों भाइयों से किनारा करना शुरू कर दिया. इसके बाद दोनों परिवारों के बीच दरार पड़नी शुरू हो गई. धीरे-धीरे ये दरार आपसी रंजिश में बदल गई. इसी बीच ग्राम प्रधान का चुनाव आ गया. तब सेंगर को सबक सिखाने के लिए पीड़ित लड़की के ताऊ ने खुद प्रधानी का चुनाव लड़ने का फैसला किया.
उधर, दूसरी तरफ विधायक सेंगर की मां चुन्नी देवी प्रधानी का चुनाव लड़ रही थीं. तब पहली बार था, जब दोनों परिवार आमने-सामने थे. हालांकि चुनाव से ऐन पहले कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के ताऊ के मुकदमों को हथियार बना कर उसकी उम्मीदवारी खारिज करा दी थी. लिहाज़ा अब उसकी जगह उसके करीबी देवेंद्र सिंह की मां को चुनाव में उतार दिया गया. इसी प्रधानी के चुनावी प्रचार के दौरान पीड़िता के परिवार और सेंगर परिवार के बीच झड़प हो गई थी. बाद में विधायक सेंगर की तरफ से पुलिस ने महेश सिंह के खिलाफ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया था.
इन दोनों परिवारों के बीच की आपसी दुश्मनी में पहला कत्ल पीड़िता के ताऊ का हुआ था. गांव में ही कुछ लोगों ने ईंट-पत्थरों से हमला करे उसे मार दिया था. उसकी हत्या की साजिश रचने का इलज़ाम तब विधायक कुलदीप सेंगर पर ही लगाया था. भाई की मौत के फौरन बाद पीड़ित लड़की का चाचा उन्नाव छोड़ कर गायब हो गया. फिर करीब 17 साल बाद 2018 में उसे दिल्ली के करीब से पकड़ा गया और अब उसी मामले में वो रायबरेली जेल में दस साल की सजा काट रहा है.
4 जून 2017 को 17 वर्षीय पीड़िता ने इल्ज़ाम लगाया कि विधायक सेंगर ने अपने घर पर उसकी अस्मत लूटी. इस इल्ज़ाम के बाद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़ित लड़की के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था. तब पीड़िता के पिता ने कहा भी था कि उन्हें फर्जी मामले में फंसाया जा रहा है. लेकिन पुलिस ने फिर भी आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था. जहां दो दिन बाद ही उनकी मौत हो गई. ये दोनों परिवारों के बीच रंजिश में हुई दूसरी मौत थी.
और अब पीड़ित परिवार के परिवार में दो और मौत हो गई. एक चाची और दूसरी चाची की बहन की. चाची भी इस मामले में विधायक सेंगर के खिलाफ अहम गवाह थीं. जबकि खुद पीड़ित लड़की की हालत नाजुक बनी हुई है. ज़ाहिर है मामला सिर्फ रेप तक नहीं है. बल्कि ये एक पूरे परिवार के उजड़ने और उसे उजाड़ने का मामला है. इस पूरे केस की जड़ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम आता है.

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