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ज्यादा मीठा खाने से भी हो सकता है फैटी लिवर का खतरा

हेपेटिक स्टीएटोसिस जिसे आम भाषा में फैटी लिवर कहते हैं, खराब जीवन शैली के कारण होने वाली एक आम बीमारी है। बता दें कि लिवर मे कुछ मात्रा में फैट होना नॉर्मल है लेकिन जब वसा की मात्रा अधिक हो जाती है तो इससे स्वास्थ्य परेशानियां होने लगती हैं। लापरवाह जीवन शैली, फिजिकल इनैक्टिविटी, जंक फूड, अधिक शराब के सेवन और खान-पान की गलत आदतों की वजह से अधिकांश लोग इसकी चपेट में आते हैं।

फैटी लिवर को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षणों को समझना बेहद मुश्किल हो जाता है। जब तक बीमारी की पहचान होती है तब तक लिवर काफी ज्यादा डैमेज हो सकता है। लिवर शरीर का दूसरा सबसे बड़ा ऑर्गन होता है जो खून से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है। वहीं, लिवर में फैट की अधिकता से सूजन का खतरा होता है जो इस प्रमुख अंग को डैमेज कर सकता है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक फैटी लिवर के मरीजों को अपने खानपान का विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बीमारी से ग्रस्त रोगियों के लिए भोजन पचाना आसान नहीं होता है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा चीनी खाने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है. IIT मंडी में हुए एक शोध के अनुसार खाने के बाद अगर लोग ज्यादातर कुछ मीठे पकवान का सेवन करते हैं तो इससे उनमें नॉन एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक ज्यादा चीनी खाने से लिवर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में अगर लोग इस बीमारी से खुद को बचाए रखना चाहते तो छोटी उम्र से ही उन्हें चीनी का सेवन कम से कम करना चाहिए।

इन चीजों से भी करें परहेज: फैटी लिवर के मरीजों को अधिक नमकीन खाना, मसालेदार, ट्रांस फैट युक्त फूड्स से दूरी बना लेनी चाहिए। घी-तेल और मैदा के इस्तेमाल से बने खाद्य पदार्थों को सेवन से भी बचना चाहिए। शराब, सोडा, कोल्डड्रिंक्स और फ्रूट जूस से परहेज करें। डाइट में शामिल करें ये चीजें: ग्रीन टी, कॉफी, करी पत्ता, ताजे फल, दलिया, प्याज, गिलोय, लहसुन जैसे गुणवान फूड्स को डाइट का हिस्सा बनाएं।

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