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कविता : कोशिश कर आगे बढ़

कोशिश कर आगे बढ़

बता तुम्हें क्या हुआ,
बैठ मत माथे पर हाथ धर
कैसे चलेगा तुम्हारा घर।
क्यों बना ली मेहनत से दूरी,
कैसे सपने होंगी तुम्हारी पूरी।
कोशिश कर आगे बढ़।

मुंह खोल कुछ तो बोल,
क्यों उदासी को गले लगाया ,
कहो किसने तेरा दिल दुखाया।
क्यों बना ली तुने समाज से दूरी,
बता क्या है तुम्हारी मजबूरी।
कोशिश कर आगे बढ़।

कोशिश करने पर ही,
मिलेंगी एक दिन मंजिल,
जब तुम मजबूत करोगे दिल।
हिम्मत कर छोड़ दे जी हजूरी,
चाहे करना पड़े कहीं मजदूरी।
कोशिश कर आगे बढ़।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
देवदत्तपुर दाऊदनगर औरंगाबाद बिहार
व्हाट्सएप नंबर 95 07 34 1433

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