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कविता : मन की बात

मन की बात
सभ्यता संस्कृति एकता
युवा कल्याण की बात।

बात है शूरूआत की
बढते दुख पर हाथ की
जिसके साक्ष्य देश के
करोड़ो सुनने वाले
वही आगे जाने वाले।

बात है ज्ञान की
सबके उत्थान की
लोक कल्याण की
बढ़ते भारत की शान की।

बात है विज्ञान की
इसरो की बढ़ती पहचान की
बात है गर्व की
अदम्य साहस पराक्रम की।

बात है विविधता में एकता की
वेशभूषा खान पान की
हुनरमंद के पहचान की
बात है एक भारत श्रेष्ठ भारत की।

बात है पशु पक्षी की
लुप्त होते प्रजाति की
खोज होते नये नये जीवो की
यही तो ज्ञान है
मन की बात पर ध्यान है।

बात है सोलर इनर्जी की
अपने लिए कुछ कर जाने की
रोज नये नये आयाम की
समेटकर मन से मन की बात की।

बात है खान पान हाट की
निखारे बिना जात पात की
कला धरोहर के पहचान की
मन की बात से बढ़ते विस्तार की।

आशुतोष
पटना बिहार

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