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कविता : मौका परस्ती

मत कर बंदे मौका परस्ती,
देर न लगता मिटते हस्ती।

तुम जो करोगे वह पाओगे,
हाथ मल मल पछताओगे।

जन्मे हो इंसान के रूप में,
इंसानियत तुम दिखालाओ।

कर लो कुछ सत्कर्म यहां,
मरने पर क्या ले जाओगे।

जीव जंतु पर दया करना,
सच बोलते कभी ना डरना।

नीति की बात अपना करके,
अपनी मंजिल तुम पाओगे।

झांकते रहना अपने दिल में,
दिमाग पर रखना काबू तुम।

धोखा तुम किसी से न करना,
सत्य मार्ग पर आगे तू बढ़ना।

मत कर बंदे तू मौका परस्ती,
देर नहीं लगता मिटते हस्ती।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
देवदत्तपुर दाऊदनगर
औरंगाबाद बिहार
व्हाट्सएप नंबर 95 07 34 1433

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